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Dhamtari Congress Protest: नई खाद नीति के विरोध में सड़कों पर उतरे कांग्रेसी, ज्ञापन में दिखी 'अनोखी मुस्कान'


Dhamtari Congress Protest against new fertilizer policy in Kurud

कुरूद (धमतरी)। छत्तीसगढ़ सरकार की नई खाद वितरण नीति के खिलाफ कुरुद में एक बड़ा सियासी और सामाजिक मोर्चा खोला गया। किसानों के हितों की रक्षा और खेती-किसानी को बचाने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कुरुद सोसायटी के अधिकारियों के माध्यम से उच्च अधिकारियों के नाम एक तगड़ा और तार्किक ज्ञापन सौंपा।

इस Dhamtari Congress Protest में मुख्य रूप से कांग्रेस जिलाध्यक्ष श्रीमती तारिणी चन्द्राकर, जिला महामंत्री रमेसर साहू, पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष आशीष शर्मा और नगर पालिका उपाध्यक्ष देवव्रत साहू उपस्थित रहे। उनके साथ पार्षद उत्तम साहू, अर्जुन ध्रुव, मनीष साहू, ब्लॉक महामंत्री चंद्रप्रकाश देवांगन सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र के किसान एकजुट हुए।

​Dhamtari Congress Protest में उठा 'बॉडी लैंग्वेज' पर सवाल: एक तरफ आंसू, दूसरी तरफ मुस्कान

इस पूरे प्रदर्शन के दौरान एक दिलचस्प और हैरान करने वाला विरोधाभास भी देखने को मिला। एक तरफ जहां क्षेत्र का अन्नदाता खाद की कमी और कालाबाजारी के कारण आर्थिक तंगी और आंसुओं से जूझ रहा है; वहीं दूसरी ओर, ज्ञापन सौंपते वक्त कांग्रेस नेताओं के चेहरों पर तैरती मुस्कान जनचर्चा ।

इस Dhamtari Congress Protest को करीब से देखने वाले जागरूक नागरिकों और राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जहां एक ओर किसान के हक की लड़ाई और उनके आंसू पोंछने का दावा किया जा रहा है, वहीं नेताओं की यह 'मुस्कुराती तस्वीरें' इस गंभीर आंदोलन की संवेदनशीलता पर बड़े सवाल खड़े करती हैं।

'गलत नियम' और किसानों का बढ़ता संकट: कांग्रेस अध्यक्ष का सायं सरकार पर हमला

ज्ञापन के माध्यम से नेताओं और किसानों ने शासन की नई नीति पर गंभीर सवाल उठाए। Dhamtari Congress Protest की अगुवाई कर रही कांग्रेस जिला अध्यक्ष तारणि नीलम चंद्राकर ने सरकार को घेरते हुए कहा:

"सायं सरकार की यह नई नीति पूरी तरह से किसान विरोधी है! प्रति एकड़ खाद का कोटा घटाकर (1 बोरी DAP और 1 बोरी यूरिया) सरकार ने किसानों की कमर तोड़ दी है। इतने कम खाद में किसानी करना असंभव है। एक तरफ भाजपा किसानों के हितैषी होने का ढोंग करती है, वहीं दूसरी तरफ अन्नदाता खुले बाजार में महंगे दामों पर खाद खरीदने और कालाबाजारी की मार झेलने को मजबूर है। कांग्रेस किसानों के आंसुओं को बहने नहीं देगी, इस गलत नियम को वापस लेना ही होगा!"

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