स्वच्छता की नई चमक: भखारा की स्वच्छता दीदियों ने 'कबाड़' को बनाया 'कला', कचरे से महक रहे गुलदस्ते

कुरूद/भखारा |
जहाँ दुनिया जिसे 'कचरा' समझकर फेंक देती है, भखारा नगर की स्वच्छता दीदियां उसी बेकार सामग्री में नई जान फूँक रही हैं। "वेस्ट टू वेल्थ" के मंत्र को धरातल पर उतारते हुए, मणिकंचन सेंटर अब केवल स्वच्छता का केंद्र नहीं, बल्कि नवाचार और आत्मनिर्भरता की वर्कशॉप बन गया है।
मणिकंचन सेंटर में कचरे से महक रहे गुलदस्ते: वेस्ट मटेरियल बना आय का जरिया
नगर पंचायत की यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ रचनात्मकता का एक सटीक उदाहरण पेश कर रही है। खाली समय का सदुपयोग करते हुए स्वच्छता दीदियां पुरानी प्लास्टिक बोतलों, खराब पाइपों और अन्य वेस्ट मटेरियल से ऐसे आकर्षक गुलदस्ते और डेकोरेटिव बुके तैयार कर रही हैं, जिन्हें देखकर कोई कह नहीं सकता कि ये कभी कचरा थे।
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कचरे से महक रहे गुलदस्ते: प्रोजेक्ट के मुख्य आकर्षण और मार्गदर्शन
इनोवेटिव रीसायक्लिंग: प्लास्टिक बोतलों को काटकर और रंग-बिरंगे रंगों से सजाकर तैयार किए गए उत्पाद घरों की शोभा बढ़ा रहे हैं।
कुशल नेतृत्व: सीएमओ हरि बावरिया एवं अध्यक्ष ज्योति हरख जैन के विजन ने इस प्रोजेक्ट को पंख दिए हैं।
टीम वर्क: प्रभारी बिंदु शर्मा के मार्गदर्शन में स्वच्छता दीदियां पूरे उत्साह के साथ "कबाड़ से जुगाड़" की इस मुहिम को आत्मनिर्भरता से जोड़ रही हैं।
नगर में सराहना की लहर
स्थानीय नागरिकों ने इस पहल को "सुपर हिट" करार दिया है। लोगों का कहना है कि यह न केवल कचरा प्रबंधन का बेहतरीन तरीका है, बल्कि स्थानीय हुनर को प्रोत्साहित करने वाला एक 'तगड़ा' कदम है।




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