हक की हुंकार: कुरूद से रायपुर तक 'मनरेगा महासंग्राम', कांग्रेस ने घेरी सत्ता की दहलीज़
- moolchand sinha

- Mar 18
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[ रायपुर/कुरूद]
छत्तीसगढ़ की सियासत में आज 'मनरेगा' महज एक योजना नहीं, बल्कि सरकार और विपक्ष के बीच आर-पार की जंग का मैदान बन गई। "मनरेगा बचाओ संग्राम" के बैनर तले कांग्रेस ने सड़क से लेकर सदन की देहरी तक वह 'हक की हुंकार' भरी, जिसने राजधानी की कानून व्यवस्था और सत्ता के गलियारों में कंपन पैदा कर दिया। कुरूद ब्लॉक से धमतरी जिलाध्यक्ष तारणी नीलम चंद्राकर के नेतृत्व में निकला कार्यकर्ताओं का रेला जब रायपुर की सड़कों पर उतरा, तो मंजर किसी ऐतिहासिक 'जन-विद्रोह' जैसा नजर आया।
सदन में 'वॉकआउट', सड़क पर 'वॉटर कैनन' का डर बेअसर
लड़ाई की शुरुआत विधानसभा के भीतर हुई, जहाँ कांग्रेस विधायकों ने मनरेगा कानून में बदलाव को 'मजदूरों की मौत का वारंट' करार देते हुए स्थगन प्रस्ताव पेश किया। चर्चा की मांग ठुकराए जाने से आक्रोशित विपक्ष ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर यह साफ कर दिया कि अब समझौता नामंजूर है।
बाहर, भारत माता चौक पर जनसैलाब उमड़ा था। प्रभारी महासचिव सचिन पायलट, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने मंच से साय और मोदी सरकार की नीतियों की परतें उधेड़ते हुए इसे 'गरीब विरोधी' करार दिया।
पुलिसिया घेराबंदी बनाम कार्यकर्ताओं का शौर्य
जनसभा के बाद जब तारणी नीलम चंद्राकर और वरिष्ठ नेताओं की अगुवाई में हजारों का हुजूम विधानसभा की ओर बढ़ा, तो पुलिस ने लोहे की दीवारें (बैरिकेड्स) खड़ी कर दीं। पुलिस की तगड़ी घेराबंदी और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प और धक्का-मुक्की हुई। हाथ में तिरंगा और जुबां पर "मजदूरों को हक दिलाओ" के नारे लिए कांग्रेसी हर बाधा को पार करने पर आमादा दिखे।
धमतरी कांग्रेस का 'पावर शो'
कुरूद से पहुंचे इस जत्थे में तारणी नीलम चंद्राकर की सक्रियता और नेतृत्व क्षमता चर्चा का विषय रही। उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चलने वालों में नीलम चंद्राकर, कविता बाबर, शारदा साहू, महिम शुक्ला, होमेंद्र साहू, आशीष शर्मा और डिहू राम जैसे दिग्गज शामिल रहे, जिन्होंने इस आंदोलन को धमतरी जिले की अस्मिता से जोड़ दिया।
"यह केवल राजनीति नहीं, उन हाथों को काम दिलाने की जंग है जिनसे सरकार रोजगार छीनना चाहती है। रायपुर की सड़कें गवाह हैं कि कुरूद का एक-एक कार्यकर्ता अब चैन से नहीं बैठेगा।" > — तारणी नीलम चंद्राकर, जिलाध्यक्ष
कांग्रेस का यह 'जंगी प्रदर्शन' केवल एक विरोध नहीं, बल्कि आने वाले चुनावों के लिए चुनावी शंखनाद भी है। मनरेगा के बहाने कांग्रेस ने ग्रामीण वोट बैंक की नब्ज पर हाथ रख दिया है। अब देखना होगा कि सदन में बहिष्कार और सड़क पर हुई यह 'हक की हुंकार' सरकार की नीतियों में कितना बदलाव ला पाती है।


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