TET की अनिवार्यता: कुरुद में शिक्षकों का आक्रोश, मशाल जलाकर विरोध
- moolchand sinha

- 2 days ago
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कुरुद, धमतरी |
क्या 25 साल का अनुभव अब एक परीक्षा का मोहताज होगा? धमतरी जिले के कुरुद में सोमवार की शाम उस वक्त हड़कंप मच गया जब सैकड़ों शिक्षकों ने हाथों में जलती मशालें लेकर 'कारगिल चौक' को घेर लिया। मौका था सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के विरोध का, जिसने सेवारत शिक्षकों के लिए TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) अनिवार्य कर दी है। कुरूद शिक्षकों का आक्रोश रूप ने शासन और प्रशासन की नींद उड़ा दी है।
कुरुद में शिक्षकों का आक्रोश: क्यों जलाई गई मशालें?
कुरुद विकासखण्ड के कोने-कोने से आए शिक्षकों ने 'सर्व शैक्षिक संगठन' के बैनर तले इस "काले कानून" के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। प्रदर्शन के दौरान दिग्गज शिक्षक नेताओं ने नीतिगत विसंगतियों पर कड़ा प्रहार किया:
राजेश पाण्डेय (तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ): "यह नीति नहीं, शिक्षकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। 20 साल से भविष्य गढ़ रहे शिक्षकों की योग्यता पर सवाल उठाना दुर्भाग्यपूर्ण है।"
हुमन चंद्राकर (संयुक्त शिक्षक संघ): "25 साल की सेवा के बाद अब परीक्षा देना मानसिक प्रताड़ना है। सरकार को हमारे अनुभव को प्राथमिकता देनी चाहिए।"
हुलेश चंद्राकर (सहायक शिक्षक फेडरेशन): "यह तो सिर्फ आगाज है। अगर कानून में संशोधन नहीं हुआ, तो यह मशाल की आग कुरुद से निकलकर राजधानी रायपुर तक पहुंचेगी।"
शिक्षकों की मुख्य मांगें: क्यों आर-पार की लड़ाई के मूड में है संगठन?
शिक्षकों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस 'अन्याय' के खिलाफ कानूनी और जमीनी, दोनों मोर्चों पर तैयार हैं:
TET से पूर्ण मुक्ति: पुराने और सेवारत शिक्षकों को इस परीक्षा की बाध्यता से 100% बाहर रखा जाए।
वरिष्ठता संरक्षण: अनुभव के आधार पर मिलने वाली सीनियरिटी और सेवा लाभों को यथावत रखा जाए।
सरकार का हस्तक्षेप: राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखे और कानून में संशोधन की प्रक्रिया तुरंत शुरू करे।
कुरुद के इन दिग्गज नेताओं ने संभाली आंदोलन की कमान
"शिक्षक एकता जिंदाबाद" के गगनभेदी नारों के बीच इस मशाल रैली को सफल बनाने में कुरुद के प्रमुख शिक्षक पदाधिकारियों ने सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से:
देवेंद्र दादर, अशोक निर्मलकर, हुलेश चंद्राकर, राजेश पाण्डेय, हुमन चंद्राकर, खुमान साहू, प्रकाश चंद्र सेन, योगेंद्र चंद्राकर, लुकेश साहू, मिथलेश कंवर, हरीश निर्मलकर, फलेश्वर कुर्रे, चेतन साहू, संजय साहू, सतीश साहू, देवनाथ साहू, सेवक पटेल और इनायत अली सहित बड़ी संख्या में शिक्षक साथी उपस्थित रहे।
"क्या 20 साल से स्कूल चला रहे शिक्षक की योग्यता एक दिन की परीक्षा तय करेगी? कुरुद का मशाल विद्रोह केवल एक परीक्षा का विरोध नहीं, बल्कि उस अनुभव का सम्मान है जिसने पीढ़ियों को गढ़ा है।"


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