**तहसीलों की अव्यवस्था पर अधिवक्ताओं का तीखा प्रहार: 7 दिन में सुधार नहीं तो राजस्व न्यायालयों का बहिष्कार**
- moolchand sinha

- Oct 30, 2025
- 2 min read

कुरूद |
क्या ये विडंबना नहीं कि न्याय के मंदिर में खड़े होकर भी इंसाफ की राह में महीनों की जद्दोजहद करनी पड़े? क्या वकीलों को पक्षकारों की मदद करने से पहले लिपिकों की ‘सेवा’ और चक्करदार चक्रव्यूह में ही फंसना पड़े?
कुरूद अनुभाग की तहसीलों में यही तस्वीर सामने आ रही है — जहाँ फ़ाइलें चलती कम, और रस्साकशी ज्यादा। अब वकालत समाज का सब्र टूट चुका है।
28 अक्टूबर को अधिवक्ता कार्यालय में हुई तूफ़ानी बैठक में अधिवक्ताओं ने कलेक्टर को सीधा अल्टीमेटम थमा दिया:
“7 दिन में सुधार नहीं — तो अनिश्चितकालीन बहिष्कार।”
ये सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि सिस्टम की जड़ें हिलाने वाली एक न्यायिक आन्दोलन की शुरुआत मानी जा रही है।
🎯 बैठक का केंद्र — तहसील प्रणाली पर प्रहार
कुरूद, भखारा, मगरलोड तहसीलों और करेली बड़ी व सिर्री उपतहसीलों की कार्यप्रणाली पर वकीलों ने गंभीर सवाल उठाए। आरोपों के अनुसार, राजस्व न्यायालयों में मामलों का निस्तारण नहीं, बल्कि “निस्तारण का व्यापार” चल रहा है।
मुख्य आरोप:
🔹 प्रतिलिपि शाखा की मनमानी — सत्यप्रतिलिपि/नकल के लिए अधिवक्ता और पक्षकार महीनों दौड़ते हैं
🔹 नए राजस्व मामलों का पंजीयन लटका कर रखना — फाइलें धूल खाती हैं, न्याय रुकता है
🔹 लिपिकों का हस्तक्षेप व भ्रम फैलाना — “वकील की जरूरत नहीं” कहकर गलत दिशा देना
🔹 अवैध वसूली का आरोप — “काम करवाने” के नाम पर अतिरिक्त रकम
🔹 वर्षों से एक ही जगह जमे लिपिक — प्रभाव, पकड़ और मनमानी
अधिवक्ताओं का कहना है कि इस अव्यवस्था ने न्याय प्रक्रिया को चोट पहुँचाई है और आम लोगों का विश्वास डगमगा दिया है।
निर्णायक चेतावनी
संघ ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए कहा है —“यदि 7 दिन में सुव्यवस्था बहाल नहीं हुई तो समस्त राजस्व न्यायालयों का अनिश्चितकालीन बहिष्कार किया जाएगा।”
कानूनी समुदाय की यह एकजुटता साफ बताती है कि अब समझौतों का दौर खत्म — और जवाबदेही का दौर शुरू हो चुका है।
प्रमुख चेहरे: संघ के योद्धा

इस क्रांतिकारी बैठक में संघ के संरक्षक एल पी गोस्वामी ने नेतृत्व संभाला, जबकि अध्यक्ष रमेश पाण्डेय ने अल्टीमेटम की धमकी दी। उपाध्यक्ष नरेश डिगरे और ममता सोनकर, सचिव यशवंत साहू, सह-सचिव श्याम शंकर चंद्राकार, कोषाध्यक्ष महेंद्र साहू के अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र साहू, बी डी साहू, रमेश सिन्हा, जय प्रकाश साहू, के डी जागेंद्र, एस पी लाम्बा, एनेन्द्र साहू, यजुवेन्द्र साहू, देवचरण साहू, गुलेश्वर साहू, राजेश साहू, हरीश साहू, ईश्वरी तारक, जालम साहू, चंद्रशेखर साहू, राकेश देवांगन, दिलीप साहू, तोष कुमार, चक्रधारी, भुनेश्वरी साहू, खेमप्रकाश सोनवानी, हेमंत निर्मलकर समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित थे। यह एकजुटता ही संघ की ताकत है!
आगे की राह: न्याय की जंग में क्या होगा?
यह मुद्दा सिर्फ कुरूद तक सीमित नहीं—यह पूरे राज्य के राजस्व तंत्र की पोल खोल रहा है। अगर सुधार हुए, तो पक्षकारों को राहत मिलेगी; वरना बहिष्कार से अदालतें ठप्प हो जाएंगी।




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