मानवता अभी जिंदा है: सड़क पर भटक रहे विक्षिप्त के लिए 'वरदान' बनी रेड क्रॉस की टीम, पहुंचाया 'अपना घर'
- moolchand sinha

- 21 hours ago
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धमतरी :
कहते हैं कि सेवा का धर्म सबसे बड़ा होता है और जब समाज अपनों को छोड़ देता है, तब 'मानवता के सिपाही' कमान संभालते हैं। धमतरी जिले के आमदी क्षेत्र में पिछले कई दिनों से एक मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति लावारिस हालत में भटक रहा था। भूख, प्यास और बेबसी से जूझ रहे इस शख्स के लिए इंडियन रेड क्रॉस समिति और वरदान परमार्थ एंबुलेंस सेवा के सदस्य फरिश्ता बनकर सामने आए।
भटकती जिंदगी को मिला सहारा
आमदी क्षेत्र में भटक रहे इस विक्षिप्त व्यक्ति की स्थिति पर स्थानीय जागरूक नागरिक महेंद्र भैया और गजेंद्र कुंभकार की नजर पड़ी। उन्होंने तत्काल इसकी सूचना रेड क्रॉस और वरदान परमार्थ संस्था के सक्रिय सदस्य शिवा प्रधान को दी। सूचना मिलते ही बिना समय गंवाए शिवा प्रधान अपनी टीम (पप्पू साहू और डुमन साहू) के साथ मौके पर पहुंचे और उस व्यक्ति को सुरक्षित रेस्क्यू कर धमतरी लाया गया।
'अपना घर आश्रम' में मिलेगी नई जिंदगी
इस नेक कार्य को अंजाम देने में सनी छाजेड़ का मार्गदर्शन और सहयोग सराहनीय रहा। अर्जुनी थाना को विधिवत सूचना देने के बाद, उक्त व्यक्ति को रायपुर स्थित "अपना घर आश्रम" में भर्ती कराया गया है।
"हमारा लक्ष्य सिर्फ रेस्क्यू करना नहीं, बल्कि उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना है। अपना घर आश्रम में ऐसे बेसहारा लोगों का न केवल इलाज होता है, बल्कि उन्हें अपनों जैसा प्रेम भी मिलता है।" — संस्था सदस्य
क्यों खास है यह पहल?
सटीक समन्वय: स्थानीय लोगों और सेवाभावी संस्थाओं के बीच का तालमेल मिसाल बना।
सफलता का ट्रैक रिकॉर्ड: इससे पहले भी कई मानसिक रोगी यहाँ उपचार पाकर पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं।
संवेदनशीलता: यह कार्य केवल ड्यूटी नहीं, बल्कि समाज के प्रति नैतिक जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है।
रेड क्रॉस और वरदान परमार्थ एंबुलेंस सेवा की इस पहल ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि संवेदनशीलता और सेवा भाव से किसी की भी उजड़ी हुई दुनिया को फिर से बसाया जा सकता है।






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