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"तन भगवा, मन कांग्रेस?" विक्की सरदार के भाजपा प्रवेश के बाद फेसबुक वाल पर 'आस्था' का खेल, सियासी गलियारों में चर्चा गरम!


विक्की सरदार इंद्रजीत सिंह दिगवा फेसबुक प्रोफाइल कांग्रेस आस्था

कुरूद , kurud।

राजनीति में 'दलबदल' की खबरें तो आम हैं, लेकिन विक्की सरदार (इंद्रजीत सिंह दिगवा) का मामला अब कुरुद से लेकर रायपुर तक कौतूहल का विषय बन गया है। 7 अप्रैल को पूरे परिवार सहित पूर्व मंत्री एवं विधायक अजय चंद्राकर के समक्ष विधिवत भाजपा की सदस्यता लेने और 'राष्ट्रवाद' का दामन थामने के बावजूद, विक्की सरदार की फेसबुक वाल पर आज भी कांग्रेस पार्टी के प्रति आस्था के निशान मिट नहीं पाए हैं।

यह स्थिति सवाल खड़ी करती है कि क्या यह केवल एक तकनीकी चूक है या फिर "दिल है कि मानता नहीं?"

7 अप्रैल को पहना भगवा गमछा, पर डिजिटल दुनिया में अब भी 'हाथ' का साथ?

विक्की सरदार भाजपा प्रवेश अजय चंद्राकर रायपुर 7 अप्रैल सपरिवार सदस्यता
विक्की सरदार भाजपा प्रवेश अजय चंद्राकर रायपुर 7 अप्रैल सपरिवार सदस्यता

कुरुद की राजनीति में 7 अप्रैल का दिन एक बड़े धमाके के रूप में दर्ज हुआ, जब मगरलोड ब्लॉक युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष विक्की सरदार ने पूरे तामझाम के साथ भाजपा प्रवेश किया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि प्रवेश के इतने दिनों बाद भी उनकी सोशल मीडिया प्रोफाइल और पोस्ट्स में कांग्रेस के प्रति वही पुरानी 'वफादारी' और 'आस्था' झलक रही है।

घेरे में वफादारी:

सवाल: क्या भाजपा में प्रवेश केवल एक राजनीतिक समझौता था, जबकि वैचारिक जड़ें अभी भी कांग्रेस में ही दफन हैं?

असमंजस: विक्की सरदार के समर्थक और भाजपा कार्यकर्ता भी इस दोहरी छवि को देख कर हैरान हैं कि आखिर "असली सरदार" किस तरफ है?

उपेक्षा का दर्द या वफादारी का बोझ?

भाजपा प्रवेश के वक्त यह तर्क दिया गया था कि "गद्दारी नहीं, खुद्दारी की जीत" हुई है और कांग्रेस में 'अपनों की बेरुखी' के कारण उन्होंने 'भगवा' को चुना। लेकिन आज फेसबुक वाल पर दिख रही आस्था यह बयां कर रही है कि विक्की सरदार शायद अभी भी उस मोहभंग से बाहर नहीं निकल पाए हैं।

"जो लोहा 7 अप्रैल को भगवा रंग में ढलने का दावा कर रहा था, वह डिजिटल दुनिया में अब भी तिरंगे (कांग्रेस) की चमक बिखेर रहा है।"

अजय चंद्राकर के 'गढ़' में चर्चाओं का बाज़ार गर्म

विधायक अजय चंद्राकर के कुशल नेतृत्व में भाजपा का कुनबा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन विक्की सरदार के इस 'डिजिटल स्टैंड' ने विपक्ष को चुटकी लेने का मौका दे दिया है।

भाजपा कार्यकर्ताओं में सुगबुगाहट: क्या नए साथियों का हृदय परिवर्तन पूरी तरह हो चुका है?

कांग्रेस का तंज: "जमीन बदल गई, पर जमीर और आस्था आज भी वहीं है।"

"जहाँ सम्मान नहीं, वहां विक्की सरदार नहीं"— तो फिर फेसबुक पर यह प्यार कैसा?

विक्की सरदार ने खुद कहा था कि जहाँ सम्मान नहीं मिलता, वहां वे नहीं रुकते। लेकिन फेसबुक पर कांग्रेस के प्रति आस्था जताना उनके 'खुद्दारी' वाले बयान पर सवालिया निशान लगा रहा है। क्या यह दशमेश पिता के वंशज की सादगी है या फिर पुरानी यादों का मोह, जो उन्हें पूरी तरह भाजपाई होने से रोक रहा है?

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