"राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कुरूद का चयन महज प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि अजय चंद्राकर की मंत्रालय स्तर पर मजबूत पकड़ और ज्योति भानु चंद्राकर की 'डेटा-ड्रिवन' लीडरशिप का परिणाम है। जहाँ अन्य निकाय केवल बजट मांग रहे थे, कुरूद ने 'सॉल्यूशन' पेश किया। इसीलिए 180 निकायों को पछाड़कर कुरूद 'आदर्श' की श्रेणी में टॉप पर है।"