“180 नगरीय निकायों में कुरूद को बड़ी उपलब्धि: अजय चंद्राकर की पहल से ₹6.25 करोड़ स्वीकृत”
- moolchand sinha

- Mar 11
- 2 min read

| रायपुर-कुरूद] :
छत्तीसगढ़ की राजनीति में 'चाणक्य' कहे जाने वाले और अपने धारदार तर्कों के लिए मशहूर पूर्व मंत्री व वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सत्ता और संगठन के गलियारों में उनके 'विजन' का वजन कितना है।
राज्य के #SANKALP_बजट में जब 180 नगरीय निकायों की लंबी फेहरिस्त सामने आई, तो सबकी निगाहें इस बात पर टिकी थीं कि बाजी कौन मारेगा? सस्पेंस खत्म हुआ और परिणाम चौंकाने वाला रहा— रायपुर संभाग के केवल 6 चुनिंदा शहरों में 'कुरूद' का नाम चमक रहा है।
द सस्पेंस: 180 में से सिर्फ कुरूद ही क्यों?
सवाल बड़ा था— क्या रायपुर संभाग के बड़े शहरों के बीच कुरूद अपनी जगह बना पाएगा? सस्पेंस तब खत्म हुआ जब 'आदर्श शहर समृद्धि योजना' की लिस्ट बाहर आई। पूरे संभाग में महज 6 और प्रदेश की चुनिंदा 32 नगर पालिकाओं में कुरूद का नाम टॉप पर था। यह महज इत्तेफाक नहीं, बल्कि पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के अनुभव और नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति भानु चंद्राकर की 'लॉजिकल प्लानिंग' का घातक कॉम्बो है।
अजय चंद्राकर का 'विजन-2030' और ₹6.25 करोड़ का कवच
वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर जानते हैं कि राजनीति वोट से चलती है, लेकिन इतिहास 'विकास' से लिखा जाता है। स्वीकृत ₹6.25 करोड़ की राशि कुरूद के लिए कोई साधारण फंड नहीं, बल्कि एक 'अर्बन रेवोल्यूशन' है।
ज्योति भानु चंद्राकर का 'लॉजिक' जो गेम बदल देगा:
नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति भानु चंद्राकर ने इस बजट को लेकर जो खाका खींचा है, वह किसी महानगर के मॉडल से कम नहीं है:
इंटेलिजेंट ड्रेनेज:
अब बारिश में सड़कें तालाब नहीं बनेंगी; पानी निकासी का 'स्मार्ट रूट' तैयार है।
डिजिटल आई (Eye): स्मार्ट ट्रैफिक और चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी, ताकि अपराधी कुरूद की सीमा में घुसने से पहले सौ बार सोचें।
इको-लंग्स:
शहर के बीचों-बीच ऐसे 'ग्रीन पैच' और पार्क, जो फेफड़ों को शुद्ध हवा और बुजुर्गों को सुकून देंगे।
ई-गवर्नेंस: फाइलें अब दफ्तरों में नहीं अटकेंगी; नागरिक सेवाएं अब जनता की मुट्ठी में होंगी।
विकास का 'अजेय' किला
विश्लेषकों की मानें तो अजय चंद्राकर ने कुरूद को एक ऐसी 'लीग' में खड़ा कर दिया है जहाँ तुलना रायपुर या दुर्ग से होगी। यह बजट आवंटन साबित करता है कि चंद्राकर का प्रशासनिक दखल आज भी उतना ही 'सटीक और तगड़ा' है जितना उनके भाषण।
"हम केवल पत्थर की इमारतें नहीं बना रहे, हम एक 'स्मार्ट सोसाइटी' की नींव रख रहे हैं। ज्योति भानु चंद्राकर की सक्रियता और सरकार के संकल्प ने मिलकर कुरूद को छत्तीसगढ़ का 'आदर्श' बना दिया है।"
अजय चंद्राकर (विधायक, कुरूद)
अब आगे क्या?
₹6.25 करोड़ की पहली किश्त तो सिर्फ शुरुआत है। कुरूद अब उस राह पर निकल पड़ा है जहाँ रोजगार, व्यापार और आधुनिक जीवनशैली का संगम होगा। विपक्ष के पास सवाल तो बहुत थे, लेकिन चंद्राकर की इस 'विकास वाली गुगली' ने फिलहाल सबको खामोश कर दिया है।
तैयार रहें...
क्योंकि छत्तीसगढ़ का सबसे हाई-टेक शहर अब आपकी नज़रों के सामने आकार ले रहा है!




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