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Ajay Chandrakar Kurud: कुरुद पुराना बाजार चौक स्कूल का भूमिपूजन नहीं, अव्यवस्था के खिलाफ 'क्राइसिस मैनेजमेंट' का सबसे तगड़ा विज़नरी मॉडल


Ajay Chandrakar Kurud distributing school bags to students during Purana Bazar Para school bhumi pujan ceremony

कुरुद।

यह केवल एक प्राथमिक शाला के नए कमरों का भूमिपूजन नहीं था, बल्कि दशकों पुरानी शहरी अव्यवस्था और संकुचित दायरे से जूझते कुरुद के शैक्षणिक ढांचे को मुकम्मल समाधान देने का एक साहसिक 'क्राइसिस मैनेजमेंट' मॉडल था। बालक एवं कन्या प्राथमिक शाला (पुराना बाजार पारा) में नवीन भवन और अतिरिक्त कक्षों (Additional Classrooms) के निर्माण की आधारशिला रखते हुए क्षेत्र के लोकप्रिय नेता Ajay Chandrakar Kurud ने साफ कर दिया कि भविष्य का नेतृत्व केवल समस्याओं को गिनता नहीं, बल्कि कड़े फैसले लेकर उनका स्थायी समाधान निकालता है।

इस ऐतिहासिक अवसर पर जहां इंफ्रास्ट्रक्चर की नई नींव रखी गई, वहीं कुरुद की माटी का नाम रोशन करने वाले प्रतिभावान विद्यार्थियों का सम्मान कर उनके हौसलों को नई उड़ान दी गई।

Ajay Chandrakar Kurud ने बदला पुराना ढर्रा

इस पूरे प्रोजेक्ट के पीछे का तार्किक विन्यास (Logic) बेहद गहरा है। कुरुद जब नगर पंचायत से नगरपालिका बना, तो उसके सामने सबसे बड़ा संकट (Crisis) पुराना बाजार पारा स्कूल का था, जहां 7000 वर्ग फीट के बेहद संकरे परिसर में सब्जी मंडी की चीख-पुकार और भारी शोर-शराबे के बीच बच्चे पढ़ने को मजबूर थे। यहां तक कि शिक्षिकाओं की स्कूटी खड़ी करने तक की जगह नहीं थी।

इस अव्यवस्था को दूर करने के लिए Ajay Chandrakar Kurud का मैनेजमेंट तीन स्तरों पर दिखा:

संसाधनों का पुनर्गठन (Space Optimization): उन्होंने पुरानी आईटीआई और अस्थायी पशु चिकित्सालय की जमीनों का विन्यास बदलकर स्कूलों के लिए पहले से 3 से 4 गुना अधिक जगह (लगभग 25,000 वर्ग फीट) का बंदोबस्त किया।

सृजन बनाम आंशिक असुविधा का सिद्धांत:

उन्होंने स्पष्ट लॉजिक रखा कि जब भी कोई बड़ा सृजन होता है, तो थोड़ी असुविधा अनिवार्य है, जैसे मकान बनाते समय मजदूर को टीटनेस का इंजेक्शन लगवा पड़ता है। लेकिन दूरगामी परिणाम सुखद होते हैं।

अंध-विरोध का तार्किक जवाब:

उन्होंने आलोचकों को दोटूक चुनौती दी कि लोकतंत्र में आलोचना का स्वागत है (जैसे आचार्य शुक्ल की 'चिंतामणि' या कबीरदास का दर्शन), लेकिन केवल विरोध के बजाय विपक्ष 3 बेहतर लिखित विकल्प (Alternatives) दे, प्रशासन उसे मानने को तैयार है।

डिग्री के मोह से आगे: कुरुद को कौशल और 'मल्टी-टास्किंग' का हब बनाने का संकल्प

भाषण के मुख्य तार्किक बिंदु को समाचार का हिस्सा बनाते हुए Ajay Chandrakar Kurud ने कहा कि आज का जमाना सिर्फ औपचारिक कागजी डिग्रियों का नहीं, बल्कि 'मेधा' (Intellect) और 'कौशल' (Vocational Skills) का है। एप्पल, ओला, उबर और पेटीएम जैसी दुनिया की दिग्गज कंपनियां डिग्रियों से नहीं, बल्कि इंसानी दिमाग के आइडिया और क्रियान्वयन से खड़ी हुई हैं।

चूंकि कुरुद के मध्यमवर्गीय परिवारों की आर्थिक क्षमता प्राइवेट यूनिवर्सिटीज जितनी नहीं है, इसलिए स्थानीय स्तर पर ही नर्सिंग कॉलेज, बीएड कॉलेज, नए स्कूल भवन, ऑडिटोरियम और बी.ए. एलएलबी (BA LLB) जैसे रोजगारोन्मुखी कोर्स लाए जा रहे हैं। लक्ष्य साफ है—युवाओं को 'मल्टी-टास्किंग' बनाना, ताकि नौकरी न भी मिले तो वे आत्मनिर्भर रह सकें।

प्रतिभावान छात्र-छात्राओं का सम्मान: भविष्य का उत्सव

समारोह का सबसे ऊर्जावान क्षण वह था, जब विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कुरुद के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को मंच पर सम्मानित किया गया। कुरुद की इस युवा मेधा का सम्मान करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यही नौनिहाल आने वाले समय में कुरुद और पूरे छत्तीसगढ़ का नाम वैश्विक पटल पर दर्ज कराएंगे। यह सम्मान समारोह कुरुद के बच्चों में नए आत्मविश्वास का संचार कर गया।

सत्ता, संगठन और प्रशासन की एकजुट मौजूदगी

कुरुद के इस नव-निर्माण उत्सव में नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति चंद्राकर, जनपद पंचायत अध्यक्ष गितेश्वरी साहू, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष रविकांत चंद्राकर, वरिष्ठ बीजेपी नेता सुरेश अग्रवाल विधायक प्रतिनिधि भानु चंद्राकर, भाजपा मंडल अध्यक्ष कृष्णकांत साहू की गरिमामयी उपस्थिति रही। वहीं प्रशासनिक विंग से जिला शिक्षा अधिकारी राजेश बेस, सहायक संचालक यदुनंदन वर्मा, तहसीलदार सूरज बंछोर और मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) महेंद्र राज गुप्ता सहित भारी संख्या में शिक्षक, पलकगण और सजग नागरिक उपस्थित थे।

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