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Babu Chhote Lal Srivastava Kandel की ऐतिहासिक भूमि पर 'हरी क्रांति', पोषण वाटिका से सुधरा बच्चों का स्वास्थ्य


Babu Chhote Lal Srivastava Kandel की धरा पर कंडेल आंगनबाड़ी की हरी-भरी बाड़ी में उगी लौकी, कार्यकर्ता और मध्यान्ह भोजन करते नौनिहाल

धमतरी, 19 जून 2026:

छत्तीसगढ़ के स्वाधीनता आंदोलन और किसान चेतना का उद्गम स्थल रहा ग्राम कण्डेल आज एक बार फिर देश के सामने मिसाल बनकर उभरा है। यह वही ऐतिहासिक भूमि है जहाँ महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर किसान नेता और समाजसेवी

Babu Chhote Lal Srivastava Kandel ने साल 1920 में अंग्रेजी हुकूमत की चूलें हिला देने वाले 'कण्डेल नहर सत्याग्रह' का नेतृत्व किया था। आज एक सदी बाद, इसी जागरूक मिट्टी ने अपनी समृद्ध विरासत को दोहराते हुए कुपोषण के खिलाफ एक और सफल आंदोलन छेड़ दिया है।

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन और प्रशासनिक विजन को जमीन पर उतारते हुए ग्राम कण्डेल के आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-01 में विकसित की गई 'पोषण वाटिका' आज बच्चों के स्वस्थ बचपन और आत्मनिर्भरता का एक नया और अनुकरणीय मॉडल बन चुकी है।

Babu Chhote Lal Srivastava Kandel और कंडेल नहर सत्याग्रह की विरासत

कण्डेल की मिट्टी का इतिहास संघर्ष और विजय का रहा है। जब बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव ने इस धरती से किसानों के हक की आवाज उठाई थी, तब उसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दी थी। आज उसी कण्डेल गाँव में कुपोषण जैसी गंभीर शारीरिक चुनौती से निपटने के लिए एक नया 'सत्याग्रह' आकार ले चुका है। यह आधुनिक प्रयास दिखाता है कि कण्डेल आज भी आत्मनिर्भरता और सामूहिक सहभागिता के पथ पर अडिग है।

Babu Chhote Lal Srivastava Kandel की धरा पर सीमित संसाधन और दो महिलाओं का असीमित संकल्प

जिस गाँव ने कभी पूरे देश को हक के लिए एकजुट होना सिखाया था, आज उसी गाँव की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती अंगूरी रैदास और सहायिका श्रीमती चैतबती साहू ने अपनी निष्ठा से नया इतिहास लिख दिया है। सीमित संसाधनों के बावजूद, इन्होंने केंद्र परिसर की महज़ 2 डिसमिल (लगभग 870 वर्ग फीट) खाली भूमि को 'सुपोषण के केंद्र' में तब्दील कर दिया है।

नियमित देखभाल और समर्पण से तैयार इस वाटिका में आज विभिन्न प्रकार की हरी पत्तेदार सब्जियां, लौकी, कुम्हड़ा (कद्दू), भाटा (बैंगन) और धनिया जैसी मौसमी व पूरी तरह रसायनमुक्त (ऑर्गेनिक) सब्जियां लहलहा रही हैं।

कंडेल आंगनबाड़ी केंद्र की पहल: के सपनों का आत्मनिर्भर गांव

कंडेल आंगनबाड़ी केंद्र की पहल: Babu Chhote Lal Srivastava Kandel के सपनों का आत्मनिर्भर गांव

यह पोषण वाटिका सिर्फ पौधों की क्यारी नहीं, बल्कि बच्चों की सेहत की सुरक्षा कवच है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य बाजार की कीटनाशकों से युक्त सब्जियों के मुकाबले बच्चों को पूरी तरह शुद्ध और पोषक तत्वों से भरपूर आहार देना है।

जमीन पर दिखा असर: मध्यम कुपोषित बच्चा हुआ पूरी तरह 'सामान्य'

यह पहल सिर्फ कागजी दावों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके परिणाम बेहद सटीक और धरातल पर दिखने वाले हैं। इन ताजी और शुद्ध सब्जियों को प्रतिदिन आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों के मध्यान्ह भोजन में शामिल किया जा रहा है। इसका सबसे सुखद परिणाम हाल ही में तब देखने को मिला, जब केंद्र में दर्ज एक 'मध्यम कुपोषित' श्रेणी का बच्चा इस पोषणयुक्त आहार की बदौलत अब पूरी तरह 'सामान्य' श्रेणी में आ चुका है। ताजी सब्जियों के नियमित सेवन से बच्चों में आवश्यक विटामिन और खनिज तत्वों की कमी दूर हो रही है।

एक बार फिर जन-आंदोलन बना Babu Chhote Lal Srivastava Kandel : घर-घर पहुंची 'किचन गार्डन' की गूंज

जैसे एक दौर में बाबू जी के एक आह्वान पर पूरा गाँव उठ खड़ा हुआ था, ठीक वैसे ही आज इस पोषण वाटिका ने ग्रामीणों की सोच में एक बड़ा बदलाव ला दिया है। आंगनबाड़ी केंद्र में आने वाले माता-पिता अब हरी सब्जियों के महत्व को समझ रहे हैं। प्रेरणा का आलम यह है कि कण्डेल के कई परिवारों ने अब अपने घरों के बाड़ी में खुद की 'पोषण वाटिका' विकसित करना शुरू कर दिया है।


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