Maraud Toll Plaza Dispute: धमतरी पुलिस पर फिर उठे सवाल, एसपी ने आरक्षक को किया सस्पेंड

धमतरी।
क्या वर्दी का रौब कानून से बड़ा हो गया था? क्या अनुशासन की सीमाएं लांघने वालों पर अब पुलिस कप्तान का डंडा चलना शुरू हो गया है? इन सवालों के बीच धमतरी पुलिस एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। मरौद टोल प्लाजा के पास एक ट्रक चालक से कथित मारपीट, अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज के मामले में Maraud Toll Plaza Dispute ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में कुरूद थाने में पदस्थ आरक्षक पवन बर्मन को पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
प्राथमिक जांच में सामने आया कि आरक्षक अपनी निर्धारित ड्यूटी स्थल से अनुपस्थित था और बिना अनुमति मरौद टोल प्लाजा क्षेत्र में मौजूद था। वहीं ट्रक चालक के साथ कथित दुर्व्यवहार और बल प्रयोग की शिकायत मिलने पर मामला सीधे पुलिस अधीक्षक तक पहुंचा। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने बिना देर किए निलंबन की कार्रवाई करते हुए आरक्षक को पुलिस लाइन रूद्री अटैच कर दिया।
Maraud Toll Plaza Dispute में शिकायत पहुंची ऊपर, खुली अनुशासनहीनता की परतें
सूत्रों के अनुसार, पीड़ित चालक की शिकायत और प्रारंभिक जांच में मिले तथ्यों ने पुलिस महकमे को भी चौंका दिया। इस Maraud Toll Plaza Dispute की जांच में प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए गए, जिसके बाद पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट संदेश दिया कि वर्दी की आड़ में किसी भी प्रकार की मनमानी या अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
एक विवाद शांत नहीं हुआ, दूसरा सामने आ गया
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब धमतरी पुलिस पहले से ही अर्जुनी थाना क्षेत्र के चर्चित बाईपास विवाद को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रही है। मुजगहन-पोटियाडीह बाईपास पर देर रात चेकिंग के दौरान थाना प्रभारी और एक युवक-दंपति के बीच हुई बहस और कथित मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विभाग की काफी किरकिरी हुई थी। उस मामले की जांच के लिए पहले ही डीएसपी स्तर की तीन सदस्यीय समिति गठित की जा चुकी है और अब इस नए Maraud Toll Plaza Dispute ने पुलिस की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
जनता के बीच उठ रहे सवाल: क्या बदलेगी जमीनी पुलिसिंग?
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने पुलिस की कार्यप्रणाली और अनुशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि Maraud Toll Plaza Dispute में कप्तान सूरज सिंह परिहार की त्वरित कार्रवाई ने यह संकेत जरूर दिया है कि विभाग की छवि खराब करने वाले कर्मियों पर सख्ती जारी रहेगी। लेकिन बड़ा सवाल अब भी कायम है—क्या केवल निलंबन से जनता का डगमगाता भरोसा लौट पाएगा, या जमीनी स्तर पर पुलिसिंग के तौर-तरीकों में भी बदलाव देखने को मिलेगा?
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