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दिव्यांगता को बनाया ताकत: राष्ट्रपति सम्मानित कलाकार बसंत साहू बच्चों को सिखा रहे रंगों की उड़ान



राष्ट्रपति सम्मान प्राप्त करते कलाकार बसंत साहू

कुरूद।

शारीरिक सीमाएँ अगर हौसलों के सामने खड़ी भी हों, तो जुनून उन्हें रास्ता बना देता है। इसका जीवंत उदाहरण हैं राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित कलाकार बसंत साहू। दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने अपनी अद्भुत कैनवास रंग पेंटिंग से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। आज वही कला और अनुभव वे बच्चों के भविष्य को रंगों से संवारने में लगा रहे हैं।

राष्ट्रपति सम्मानित कलाकार का मार्गदर्शन

राष्ट्रीय स्तर पर अपनी कैनवास पेंटिंग से देशभर में पहचान बना चुके बसंत साहू आज कला जगत का जाना-पहचाना नाम हैं। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित बसंत साहू स्वयं दिव्यांग हैं, लेकिन उनकी प्रतिभा और रचनात्मकता की उड़ान किसी सीमा में बंधी नहीं है।

वर्ष 2018 से उनके मार्गदर्शन में संचालित “बसंत फाउंडेशन” बच्चों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन चुका है। यहाँ बच्चों को केवल पेंटिंग नहीं सिखाई जाती, बल्कि उनकी छुपी हुई रचनात्मक प्रतिभा को पहचानकर उसे नई दिशा दी जाती है।

देश-प्रदेश से जुड़ रहे नन्हे कलाकार

इस पहल की खास बात यह है कि इसकी गूँज अब केवल कुरूद या धमतरी तक सीमित नहीं रही। अब प्रदेश और देश के विभिन्न क्षेत्रों से बच्चे इस आर्ट क्लास से जुड़कर चित्रकला की बारीकियां सीख रहे हैं।

आज के दौर में जब बच्चों का अधिकतर समय मोबाइल और डिजिटल स्क्रीन में बीत रहा है, ऐसे में यह मंच अभिभावकों के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरा है, जो अपने बच्चों को मोबाइल एडिक्शन से दूर रचनात्मक वातावरण देना चाहते हैं।

कला के माध्यम से संस्कार और संघर्ष की सीख

बसंत फाउंडेशन की यह आर्ट क्लास केवल चित्रकारी तक सीमित नहीं है। यहाँ बच्चों को संघर्ष, धैर्य, अनुशासन और आत्मविश्वास का महत्व भी समझाया जाता है।

जब बच्चे देखते हैं कि एक दिव्यांग कलाकार अपनी प्रतिभा के दम पर राष्ट्रीय स्तर तक पहुँच सकता है, तो उनके भीतर भी अपने सपनों को साकार करने का साहस जाग उठता है।

“कला केवल देखने की वस्तु नहीं, बल्कि जीने का तरीका है।

हम बच्चों को रंगों के माध्यम से जीवन जीने की कला सिखा रहे हैं।”

— बसंत साहू, संस्थापक, बसंत फाउंडेशन

अभिभावकों के लिए संदेश

बसंत फाउंडेशन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों को मोबाइल की आभासी दुनिया से बाहर निकालकर कला, संस्कृति और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ें।

यहाँ आने वाला बच्चा केवल पेंटिंग नहीं सीखता, बल्कि आत्मविश्वास, संस्कार और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना भी सीखता है — ताकि वह भविष्य में समाज के लिए प्रेरणा बन सके।

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