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​कलियुग में राम-भरत जैसा भाई का त्याग और प्रेम (Bhai ka tyag aur prem), कहानी भखारा के हेमलाल चौरे की


bhai ka tyag aur prem - Hemlal Chaure
bhai ka tyag aur prem - Hemlal Chaure


bhai ka tyag aur prem shoemaker
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भखारा/ कुरूद।

आज के दौर में जहाँ जमीन के एक टुकड़े के लिए सगे भाई एक-दूसरे के दुश्मन बन जाते हैं, वहीं धमतरी जिले के भखारा से एक ऐसी कहानी सामने आई है जो रिश्तों की परिभाषा बदल देगी। यहाँ एक छोटा भाई अपनी मेहनत से 'शहंशाह' बना, लेकिन उसका दिल अपने बड़े भाई के लिए आज भी एक छोटे बच्चे जैसा कोमल है।

​ ग्राउंड रिपोर्ट: एक ही सड़क, दो अलग दुनिया

​नगर पंचायत भखारा के मुख्य मार्ग पर स्थित 'राजेश बुट हाउस' क्षेत्र की जानी-मानी दुकान है। यहाँ दुकान की गद्दी पर बैठकर सफल व्यापार चलाने वाले हेमलाल चौरे (उप-सरपंच,कोसमर्रा) की गिनती इलाके के रईसों और सज्जन पुरुषों में होती है। लेकिन हैरानी तब होती है जब ठीक उसी दुकान के सामने फुटपाथ पर उनके बड़े भाई संतराम चौरे जूते पॉलिश करते नजर आते हैं।

​ ​💖 रिश्तों की गहराई: bhai ka tyag aur prem की एक मिसाल

​जब हमारी टीम ने इस विरोधाभास की तहकीकात की, तो जो सच निकलकर आया वह दिल जीत लेने वाला था। उच्च शिक्षित (B.Sc.) होने के बावजूद परिवार को बिखरने से बचाने के लिए हेमलाल ने सरकारी नौकरी छोड़ दी। उन्होंने बताया:

  • बड़प्पन: उन्होंने अपना स्वयं का पक्का मकान अपने भाई को रहने के लिए दे दिया है।

  • सादगी: एक सफल बिजनेसमैन और जनप्रतिनिधि होने के बाद भी वह खुद किराए के मकान में रहते हैं।

  • त्याग: भाइयों के बच्चों की शादियाँ और उनके लिए रोजगार की व्यवस्था करना वह अपना सौभाग्य मानते हैं।

"किराए के कमरे में रहकर सुकून मिलता है, क्योंकि मेरा भाई अपने घर में चैन से सोता है। काम कोई छोटा-बड़ा नहीं होता, बस दिल बड़े होने चाहिए।" — हेमलाल चौरे


​यह खबर समाज के लिए एक कड़ा संदेश है कि इंसान की असली पहचान उसके बैंक बैलेंस या मकान की ऊँचाई से नहीं, बल्कि उसके त्याग और संस्कारों से होती है। संतराम चौरे का स्वाभिमान और हेमलाल चौरे का समर्पण आज के समाज के लिए 'राम-भरत' के प्रेम का आधुनिक उदाहरण है। की गिनती इलाके के रईसों और सज्जन पुरुषों में होती है। लेकिन हैरानी तब होती है जब ठीक उसी दुकान के सामने फुटपाथ पर उनके बड़े भाई संतराम चौरे जूते पॉलिश करते नजर आते हैं।

"वाकई, समाज में रिश्तों की मर्यादा बनाए रखने के लिए bhai ka tyag aur prem की ऐसी मिसालें मिसाल पेश करती हैं।"


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