"Navodaya Selection 2026: सेलदीप स्कूल के 7 सितारों ने अभावों को दी मात"
- moolchand sinha

- 3 days ago
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कुरूद/ धमतरी।
आज के दौर में जहाँ शिक्षा को महंगी फीस और आलीशान इमारतों का पर्याय मान लिया गया है, छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गाँव सेलदीप ने इस धारणा को ध्वस्त कर दिया है। शासकीय प्राथमिक शाला सेलदीप ने एक बार फिर ऐतिहासिक कीर्तिमान रचते हुए साबित कर दिया कि सफलता 'सुविधाओं' की नहीं, बल्कि 'अटल संकल्प' की मोहताज होती है।
इस वर्ष विद्यालय के 7 छात्र-छात्राओं का चयन जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) के लिए हुआ है, जो न केवल इस शाला के लिए बल्कि पूरे अंचल के लिए अतुलनीय गौरव का विषय है।
संकट में अवसर: 'सेलदीप मॉडल' ऑफ एक्सीलेंस
ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर संसाधनों की कमी को विफलता का बहाना माना जाता है, लेकिन सहायक शिक्षक तेजराम साहू ने इसे एक 'चुनौती' के रूप में स्वीकार किया। उन्होंने सिद्ध कर दिया कि बिना किसी कॉर्पोरेट कोचिंग और हाई-टेक गैजेट्स के भी ग्रामीण बच्चों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए 'अजेय' बनाया जा सकता है।
सफलता के शिखर पर ये 7 होनहार:विद्यार्थी का नाम पिता का नाम
कु. गुंजन श्री ओंकार साहू , पूर्वी निषाद श्री गोपी निषाद , देवदत्त श्री चंपेश्वर साहू , जयकुमार श्री प्रवीण (रवि) निषाद , डागेश कुमार श्री चंद्रभूषण साहू , काव्या साहू श्री तोरण साहू , भेषकुमार श्री कल्याणसींग कंवर ,
परंपरा बन चुकी है जीत
सेलदीप स्कूल के लिए यह उपलब्धि कोई 'इत्तेफाक' नहीं है। यहाँ से प्रतिवर्ष नवोदय में चयन होना अब एक 'विजयी परंपरा' बन चुका है। यह निरंतरता दर्शाती है कि यहाँ के मार्गदर्शन में कुछ विशिष्ट है। गाँव की गलियों से निकलकर देश के प्रतिष्ठित आवासीय विद्यालयों तक पहुँचने का यह सफर उन सभी के लिए एक कड़ा जवाब है, जो मानते हैं कि प्रतिभा केवल शहरों की चकाचौंध में पनपती है।
बदलाव की एक महालहर
आज शासकीय प्राथमिक शाला सेलदीप केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि एक 'प्रेरणा पुंज' बन चुका है। यह उन हजारों शिक्षकों और अभिभावकों के लिए एक जीवंत केस स्टडी है, जो सीमित संसाधनों में असाधारण परिणाम लाने का साहस रखते हैं।
बधाई संदेश:
"अगर शिक्षक ठान ले, तो पत्थर से भी रत्न तराशे जा सकते हैं।" इन नन्हे सितारों और इनके मार्गदर्शक गुरुजनों को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की अनंत शुभकामनाएँ!



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