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Dhamtari District Hospital Medicine Shortage: दवाओं के अकाल से मरीजों की जान आफत में, पूर्व विधायक लेखराम साहू ने कलेक्टर को घेरा


Dhamtari District Hospital Medicine Shortage issue raised by Lekharam Sahu with Collector Avinash Mishra

धमतरी।

कहने को तो यह जिला अस्पताल है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यहां मरीजों को 'इलाज' कम और 'असुविधाएं' ज्यादा मिल रही हैं। सरकारें दावों के बड़े-बड़े ढोल पीटती हैं कि गरीबों को मुफ्त दवाइयां मिल रही हैं, मगर धमतरी के इस मुख्य सरकारी अस्पताल में आज Dhamtari District Hospital Medicine Shortage (दवाइयों की कमी) इस कदर बढ़ गई है कि रेबीज और हार्ट अटैक जैसी अति-आवश्यक आपातकालीन दवाओं के भी लाले पड़े हुए हैं। टेंडर की कागजी प्रक्रियाएं पूरी होने के बावजूद अस्पताल की दवा अलमारियां खाली हैं, जिससे मरीजों की जान सीधे तौर पर दांव पर लगी है।

सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के इसी फासले को पाटने और इस Dhamtari District Hospital Medicine Shortage के गंभीर मुद्दे पर प्रशासन को जगाने के लिए, कुरूद के पूर्व विधायक एवं पिछड़ा वर्ग कांग्रेस (नई दिल्ली) के राष्ट्रीय समन्वयक श्री लेखराम साहू ने सीधे व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

Dhamtari District Hospital Medicine Shortage पर भड़के लेखराम साहू, कलेक्टर अविनाश मिश्रा को सौंपा ज्ञापन

इस गंभीर अव्यवस्था को लेकर वरिष्ठ नेता लेखराम साहू ने धमतरी कलेक्टर अविनाश मिश्रा से सीधे मुलाकात की और एक बेहद तीखा ज्ञापन सौंपा। उन्होंने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े करते हुए कहा कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अस्पताल की अलमारियां खाली क्यों हैं?

"एक तरफ सरकार गरीबों को मुफ्त इलाज और निशुल्क दवाइयां देने का ढोल पीटती है, तो दूसरी तरफ Dhamtari District Hospital Medicine Shortage के कारण गरीब परिवारों की जेब पर डाका डाला जा रहा है। लोगों को बाहर से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं।"

सिर्फ दवाएं ही नहीं, दिव्यांगों की बैसाखी और साइकिल पर भी लगा 'ताला'

इस मुलाकात के दौरान पूर्व विधायक ने स्वास्थ्य विभाग की एक और असंवेदनशीलता को उजागर किया। अस्पताल और संबंधित समाज कल्याण विभाग में इस वक्त दिव्यांगों के लिए जरूरी उपकरणों का भी टोटा है:

समानों की भारी किल्लत: जरूरतमंद दिव्यांगों को दी जाने वाली इलेक्ट्रॉनिक साइकिल और बैसाखी (क्रचेस) तक स्टॉक में उपलब्ध नहीं हैं।

योजनाएं सिर्फ फाइलों में: उपकरणों की कमी की वजह से दूर-दराज से आने वाले दिव्यांगजन योजनाओं के लाभ से पूरी तरह वंचित हैं और दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

आपातकालीन दवाओं की कमी से बढ़ रहा है मौत का खतरा

समाचार का सबसे डरावना पहलू यह है कि यह शॉर्टेज आम दवाओं की नहीं, बल्कि लाइफ-सेविंग ड्रग्स (जीवन रक्षक दवाओं) की है। हार्ट अटैक या रेबीज (कुत्ते के काटने पर लगने वाला इंजेक्शन) जैसी आपातकालीन स्थिति में अगर मरीज को चंद मिनटों के भीतर सही दवा न मिले, तो उसकी मौके पर ही मौत हो सकती है। जिला अस्पताल की यह सुस्ती किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है।

आगे क्या?

पूर्व विधायक लेखराम साहू ने कलेक्टर से साफ शब्दों में कहा है कि जिला अस्पताल की इस बदहाली को तुरंत सुधारा जाए। उन्होंने प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि दवाओं की आपूर्ति तत्काल बहाल नहीं की गई और दिव्यांगों को उनके उपकरण नहीं मिले, तो वे जनता के हक के लिए उग्र आंदोलन और प्रदर्शन करने से पीछे नहीं हटेंगे।

अब देखना यह है कि इस तीखे विरोध के बाद धमतरी का स्वास्थ्य महकमा कितनी जल्दी नींद से जागता है!

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