धमतरी में बदलेगा खेती का भूगोल: 152 गांवों में फसल विविधीकरण से लिखी जाएगी आय की नई इबारत
- moolchand sinha

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धमतरी, 3 सितंबर 2026।
छत्तीसगढ़ के धान के कटोरे में अब खेती का गणित बदलने की तैयारी है। धमतरी फसल विविधीकरण योजना के तहत नदी तटवर्ती क्षेत्रों की खेती को केवल धान तक सीमित रखने के बजाय जमीन की प्रकृति के अनुसार फसल विकल्प तय किए जाएंगे। महानदी, पैरी, सोंढूर और खारून किनारे बसे 152 गांवों के 38 हजार किसानों की 30,841.96 हेक्टेयर जमीन इस धमतरी फसल विविधीकरण के दायरे में है।
धमतरी फसल विविधीकरण का आधार - जमीन जैसी, खेती वैसी
नदी किनारे के सभी खेतों की परिस्थितियां एक जैसी नहीं होतीं। इसी अंतर को धमतरी फसल विविधीकरण का आधार बनाया गया है। प्रत्येक गांव की भूमि की ऊंचाई, ढाल, मिट्टी, जलभराव, जल निकासी और भूजल की स्थिति का सर्वे कर गांववार माइक्रो-प्लान तैयार किया जाएगा।
इस योजना में तीन कृषि जोन प्रस्तावित हैं। पहला जोन - अति निम्न और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र, जहां धान के साथ खस, बच और लेमन ग्रास जैसी औषधीय फसलें। दूसरा जोन - मध्यम ऊंचाई और मौसमी जलभराव वाला, जहां धान के बाद कम अवधि की दलहन, तिलहन और सब्जियां। तीसरा जोन - ऊंची और बेहतर जल निकासी वाली भूमि, जहां धमतरी फसल विविधीकरण के तहत दलहन-तिलहन, सब्जी, फलदार पौधों और जैविक खेती के क्लस्टर विकसित होंगे।
महानदी किनारे 97 गांव, सोंढूर किनारे 23 गांव, पैरी किनारे 18 गांव और खारून किनारे 14 गांव चिन्हित किए गए हैं। धमतरी, कुरूद, मगरलोड और नगरी में उड़द-मूंग, मूंगफली, रागी, सरसों, मक्का और चना के प्रदर्शन प्लॉट लगेंगे ताकि किसान खेत में ही नई फसल का परिणाम देख सकें। सितंबर-अक्टूबर से धमतरी फसल विविधीकरण अभियान शुरू होगा।
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पानी के हिसाब से तय होगी खेत की फसल
नदी किनारे के क्षेत्रों को मोटे तौर पर तीन कृषि जोन में विकसित करने का प्रस्ताव है।
अति निम्न और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र:
यहां धान प्रमुख फसल रहेगा। इसके साथ खस, बच और लेमन ग्रास जैसी औषधीय फसलों की संभावनाएं भी विकसित की जाएंगी।
मध्यम ऊंचाई और मौसमी जलभराव वाले क्षेत्र:
धान की कटाई के बाद कम अवधि वाली दलहन, तिलहन और सब्जियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
ऊंची एवं बेहतर जल निकासी वाली भूमि:
यहां दलहन-तिलहन, सब्जी, औषधीय फसल, फलदार पौधों तथा जैविक-प्राकृतिक खेती के क्लस्टर विकसित करने की योजना है।
यानी खेती का मॉडल अब केवल इस आधार पर नहीं होगा कि हर खेत में एक ही फसल ली जाए, बल्कि जिस जमीन की जैसी क्षमता, वहां उसी के अनुरूप फसल लेने पर जोर होगा।
5,458.90 हेक्टेयर में रबी फसलों का विस्तार
इस योजना का सबसे बड़ा लाभ खरीफ के बाद मिलेगा। धमतरी फसल विविधीकरण के तहत नदी किनारे के गांवों में 5,458.90 हेक्टेयर में रबी फसलों का विस्तार प्रस्तावित है।
इसमें:
3,244.10 हेक्टेयर — चना
662.80 हेक्टेयर — गेहूं
472.50 हेक्टेयर — सरसों
243.90 हेक्टेयर — मक्का
214.80 हेक्टेयर — उड़द
178.70 हेक्टेयर — मूंग
142.20 हेक्टेयर — मूंगफली
110.60 हेक्टेयर — औषधीय फसल
39 हेक्टेयर — सूरजमुखी
शामिल हैं।
नवंबर-दिसंबर में किसानों की मांग के अनुसार दलहन-तिलहन के बीज और औषधीय पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
धमतरी फसल विविधीकरण के साथ जल संरक्षण की भी तैयारी
नई फसल तभी टिकेगी जब पानी की व्यवस्था मजबूत होगी। इसलिए धमतरी फसल विविधीकरण के साथ जल संरक्षण को जोड़ा गया है। महानदी किनारे धमतरी और मगरलोड विकासखंड में 36 नालों की सफाई, 19 फार्म पॉण्ड, 17 सोकपिट तथा मगरलोड में 7 चेकडैम/एमआईटी सुधार के कार्य प्रस्तावित हैं। 75 नदी तटवर्ती गांवों में तटीय घास और पौधरोपण किया जाएगा। खेत से नाले और नाले से नदी तक पानी के बहाव को रोकने के लिए माइक्रो-वाटरशेड प्लान तैयार होगा
कलेक्टर बोले—आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करना लक्ष्य
कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कहा कि धमतरी फसल विविधीकरण का उद्देश्य किसानों को उनकी जमीन के अनुरूप अधिक विकल्प उपलब्ध कराना, खेती के जोखिम को कम करना और आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करना है। जल संरक्षण, सिंचाई, प्रदर्शन और प्रशिक्षण को साथ लेकर टिकाऊ कृषि प्रणाली विकसित की जाएगी।
152 गांवों, करीब 38 हजार किसानों और 30,841.96 हेक्टेयर रकबे तक पहुंचने वाली यह योजना जमीन पर कितनी प्रभावी होती है, यह क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। लेकिन दिशा स्पष्ट है - खेत वही रहेगा, पर कमाई के विकल्प बढ़ेंगे। किसान धान का साथ नहीं छोड़ेगा, लेकिन धान ही उसकी मजबूरी भी नहीं रहेगा।




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