निरंजन भाटा ने दिलाई धमतरी को राष्ट्रीय पहचान, किसान स्वर्गीय लीलाराम साहू की विरासत को मिला सम्मान
- moolchand sinha

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Updated: 5 hours ago
कुरूद के घुमा-दर्रा के किसान ने वर्षों तक संरक्षित की थी पारंपरिक बैंगन किस्म; 2024 में PPV&FRA पंजीयन, 1.50 लाख रुपए के राष्ट्रीय किसान सम्मान से भी हो चुके थे सम्मानित

धमतरी, 2 सितंबर 2026।
गांव की मिट्टी में वर्षों तक सहेजा गया एक बीज जब राष्ट्रीय पहचान हासिल करता है, तो उसके पीछे केवल खेती नहीं, बल्कि किसान की पीढ़ियों की मेहनत, अनुभव और पारंपरिक ज्ञान की कहानी होती है। धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के ग्राम घुमा-दर्रा निवासी स्वर्गीय लीलाराम साहू ने ऐसी ही कृषि विरासत को वर्षों तक संभालकर रखा। उनके द्वारा संरक्षित पारंपरिक बैंगन किस्म ‘निरंजन भाटा’ को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने के बाद बुधवार को उनके योगदान का सम्मान किया गया। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कलेक्टर कार्यालय में स्वर्गीय लीलाराम साहू के पुत्र अजय शंकर साहू को सम्मानित कर उनके पिता के कृषि योगदान, पारंपरिक कृषि ज्ञान और स्थानीय जैव-विविधता के संरक्षण को सम्मान दिया।
निरंजन भाटा क्या है और क्यों है खास?
निरंजन भाटा पारंपरिक एवं विशिष्ट गुणों वाली बैंगन की स्थानीय किस्म है। इसके फल लंबे, मुलायम, मीठे गूदे वाले तथा अपेक्षाकृत कम बीज वाले होते हैं। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार इसके फलों की औसत लंबाई करीब 45.8 सेंटीमीटर है। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से प्रचलित इस किस्म को स्वर्गीय लीलाराम साहू ने लगातार संरक्षित किया और इसके बीज को आगे की पीढ़ियों तक पहुंचाने का काम किया।
उनकी मेहनत का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि बदलते कृषि परिदृश्य में कई पारंपरिक फसल किस्में धीरे-धीरे खेती से बाहर होती जा रही हैं। ऐसे समय में निरंजन भाटा का संरक्षण स्थानीय कृषि जैव-विविधता और किसान ज्ञान को बचाने का महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आया है।
वर्षों की मेहनत से खेत की किस्म पहुंची राष्ट्रीय पहचान तक
स्वर्गीय लीलाराम साहू ने केवल निरंजन भाटा की खेती नहीं की, बल्कि इसकी विशिष्टता को पहचानकर वर्षों तक इसके बीजों का संरक्षण किया। बाद में कृषि विज्ञान केंद्र, धमतरी के तकनीकी मार्गदर्शन से इस पारंपरिक किस्म के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और पंजीयन की दिशा में काम आगे बढ़ा।
इस प्रक्रिया में कृषि विज्ञान केंद्र, धमतरी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। केंद्र ने किस्म के संरक्षण एवं दस्तावेजीकरण के साथ पंजीयन प्रक्रिया में आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया। PPV&FRA प्रभारी प्रेमलाल साहू ने पंजीयन से संबंधित प्रक्रिया में सहयोग, मार्गदर्शन और समन्वय किया।
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निरंजन भाटा का 2024 में PPV&FRA पंजीयन
निरंतर प्रयासों के बाद ‘निरंजन भाटा’ का वर्ष 2024 में पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPV&FRA) के अंतर्गत पंजीयन कराया गया। यह पंजीयन स्थानीय एवं पारंपरिक कृषि किस्मों के संरक्षण के साथ किसानों के पारंपरिक ज्ञान और अधिकारों को संस्थागत पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
इस उपलब्धि ने घुमा-दर्रा के खेतों में वर्षों से संरक्षित निरंजन भाटा को राष्ट्रीय स्तर पर एक आधिकारिक पहचान दिलाने का रास्ता तैयार किया।
1.50 लाख रुपए के राष्ट्रीय सम्मान से भी नवाजे गए थे लीलाराम साहू
निरंजन भाटा के संरक्षण के लिए स्वर्गीय लीलाराम साहू को इससे पहले भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल चुका था। PPV&FRA के प्रमाण-पत्र के अनुसार उन्हें वर्ष 2016-17 के लिए राष्ट्रीय किसान सम्मान प्रदान किया गया था। यह सम्मान 22 अक्टूबर 2019 को प्रदान किया गया, जिसमें उन्हें 1.50 लाख रुपए की पुरस्कार राशि, प्रशस्ति-पत्र और स्मृति-चिह्न दिया गया था।
यानी जिस पारंपरिक बैंगन किस्म को उन्होंने वर्षों तक अपने खेत में बचाकर रखा, उसी के संरक्षण ने उन्हें राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया।
पारंपरिक ज्ञान और नवाचार के लिए भी मिला सम्मान
स्वर्गीय लीलाराम साहू के पारंपरिक ज्ञान और निरंजन भाटा में किए गए नवाचार को National Innovation Foundation–India द्वारा आयोजित Ninth National Grassroots Technological Innovations & Traditional Knowledge Awards में State Award–Chhattisgarh से भी सम्मानित किया गया था।
इसके अलावा कृषि क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान तथा निरंजन भाटा जैसी विशिष्ट पारंपरिक किस्म के संरक्षण के लिए उन्हें ‘छत्तीसगढ़ बेस्ट कृषि उत्पाद-2022’ के सम्मान से भी नवाजा गया था।
कलेक्टर बोले—पारंपरिक किस्में किसानों की अमूल्य धरोहर
सम्मान समारोह में कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने स्वर्गीय लीलाराम साहू के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि पारंपरिक फसल किस्में केवल कृषि की विरासत नहीं हैं, बल्कि किसानों की पीढ़ियों से संचित ज्ञान, अनुभव और स्थानीय जैव-विविधता की अमूल्य धरोहर हैं।
उन्होंने कहा कि निरंजन भाटा जैसी स्थानीय किस्म का संरक्षण और उसका राष्ट्रीय स्तर पर पंजीयन धमतरी जिले के लिए गौरव की बात है। स्वर्गीय लीलाराम साहू के प्रयास जिले के अन्य किसानों को भी अपनी पारंपरिक फसल किस्मों के संरक्षण, संवर्धन और पंजीयन के लिए प्रेरित करेंगे।
एक किसान ने बचाई विरासत, अब आने वाली पीढ़ियों की धरोहर
स्वर्गीय लीलाराम साहू की कहानी यह बताती है कि किसानों के पास मौजूद पारंपरिक ज्ञान भी कृषि की अमूल्य संपदा है। वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण, तकनीकी मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग मिलने पर ऐसी स्थानीय किस्मों को न केवल संरक्षित किया जा सकता है, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय पहचान भी दिलाई जा सकती है।
निरंजन भाटा का पंजीयन इसी दिशा में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। यह स्थानीय कृषि जैव-विविधता के संरक्षण के साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण आनुवंशिक और कृषि संसाधन सुरक्षित रखने की पहल भी है।
कृषि विज्ञान केंद्र, धमतरी द्वारा किसानों के बीच स्थानीय एवं पारंपरिक फसल किस्मों की पहचान, संरक्षण, पंजीयन और कृषक अधिकारों के प्रति जागरूकता के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है।
स्वर्गीय लीलाराम साहू भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके खेत में सहेजी गई ‘निरंजन भाटा’ की विरासत आज भी उनकी कहानी कह रही है। कुरूद के एक किसान के खेत से शुरू हुआ यह सफर राष्ट्रीय पहचान तक पहुंचा और अब धमतरी की कृषि परंपरा का गौरव बन चुका है।
सम्मान समारोह में कृषि विज्ञान केंद्र, धमतरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. ईश्वर सिंह, सहायक संचालक कृषि मनोज सागर सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।




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