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धमतरी में 'अग्नि-तांडव': 30 एकड़ में फैली बेशकीमती वनस्पति झुलसकर खाक, वन्यजीवों पर मंडराया संकट


धमतरी के केरेगांव जंगल में फैलती भीषण आग का दृश्य
धमतरी के केरेगांव जंगल में फैलती भीषण आग का दृश्य

धमतरी के केरेगांव जंगल में लगी भीषण आग को काबू करने के लिए फायर वाचर और वनकर्मी लगातार प्रयास करते हुए।
धमतरी के केरेगांव जंगल में लगी भीषण आग को काबू करने के लिए फायर वाचर और वनकर्मी लगातार प्रयास करते हुए।

धमतरी।

छत्तीसगढ़ का धमतरी जिला इन दिनों आग की दोहरी मार झेल रहा है। केरेगांव वन परिक्षेत्र (बीट नंबर 138) से जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे डरावनी हैं। भीषण गर्मी की दस्तक के साथ ही जंगल में लगी आग ने देखते ही देखते 30 एकड़ के विशाल भू-भाग को अपनी चपेट में ले लिया है। लाखों की इमारती लकड़ी और दुर्लभ औषधियां आग की लपटों में झुलस गईं।

घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि गर्मियों की शुरुआत के साथ ही जंगलों में आग की घटनाएँ क्यों बढ़ जाती हैं, और क्या हमारे पास इससे निपटने के लिए पर्याप्त Crisis Management System मौजूद है?

वन संपदा को अपूरणीय क्षति

मौके से मिली जानकारी के अनुसार आग इतनी तेजी से फैली कि वन विभाग को प्रारंभिक नियंत्रण में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

इस आग से सबसे अधिक नुकसान कीमती वन संपदा को हुआ है—

इमारती पेड़: साल और सागौन जैसे बहुमूल्य वृक्ष झुलस गए।

औषधीय वनस्पति: कई दुर्लभ जड़ी-बूटियाँ और झाड़ियां जलकर नष्ट हो गईं।

प्राकृतिक आवास: पक्षियों के घोंसले और छोटे जीवों के सुरक्षित ठिकाने पूरी तरह तबाह हो गए।

धुआं, तपिश और फायर फाइटर्स की चुनौती

सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम और फायर वाचर मौके पर पहुँच गए हैं। हवा की तेज रफ्तार और सूखे पत्तों का 'ईंधन' आग की लपटों को और हवा दे रहा है, जिससे बचाव कार्य में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। धुएं के गुबार ने आसपास के रहवासियों और राहगीरों के लिए सांस लेना दूभर कर दिया

कुछ दिन पहले किसानों की फसल भी बनी थी आग की भेंट

धमतरी जिले में हाल के दिनों में आगजनी की यह दूसरी बड़ी घटना है।

कुछ ही दिन पहले जिले के एक अन्य इलाके में

खड़ी चना और सरसों की फसल जलकर पूरी तरह राख हो गई थी।

कटाई के समय हुई उस घटना ने किसानों की महीनों की मेहनत को एक झटके में खत्म कर दिया और कई परिवारों को आर्थिक संकट में डाल दिया।

क्या तैयार है जिला प्रशासन?

धमतरी के जंगलों में भड़की यह आग सिर्फ वन क्षेत्र को नहीं जला रही, बल्कि प्रशासनिक तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर रही है—

क्या हमारी प्राकृतिक धरोहर को बचाने के लिए जिला प्रशासन वाकई सजग और गंभीर है??

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