MothersDay2026: एक माँ की तपस्या से 'राष्ट्रपति सम्मान', तो दूसरी के संघर्ष से खिल रही नन्ही प्रतिभा; कुरूद के बसंत फाउंडेशन में ममता की अद्भुत मिसाल
- moolchand sinha

- 4 days ago
- 2 min read
Updated: 4 days ago

कुरूद (धमतरी/छत्तीसगढ़):
मदर्स डे 2026 महज एक औपचारिक दिन नहीं, बल्कि उस अजेय शक्ति का उत्सव है जिसे हम 'माँ' कहते हैं। आज कुरूद का 'बसंत फाउंडेशन' ममता की दो ऐसी कहानियों का साक्षी बन रहा है, जो असंभव को संभव बनाने का साहस रखती हैं। यहाँ एक माँ ने अपने बेटे को मौत के मुँह से खींचकर राष्ट्रपति सम्मान तक पहुँचाया, तो दूसरी माँ मीलों की दूरी तय कर अपने दिव्यांग बच्चे के सपनों में रंग भर रही है।
95% दिव्यांगता पर ममता की जीत: Mother Ahilyabai Sahu की अतुलनीय तपस्या
यह कहानी श्रीमती अहिल्याबाई साहू की है, जिनका त्याग पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक मशाल है। वर्षों पहले एक सड़क हादसे ने उनके बेटे बसंत साहू को 95% दिव्यांग कर दिया था। जहाँ दुनिया ने उम्मीद छोड़ दी थी, वहाँ अहिल्याबाई एक ढाल बनकर खड़ी हुईं। उन्होंने अपने बेटे के हाथों में कूची थमाई और उसे हार न मानने का मंत्र दिया। माँ की इसी निष्ठा का फल है कि आज बसंत साहू राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित होकर देश के गौरव हैं। वे सिर्फ एक कलाकार नहीं, बल्कि अपनी माँ के अटूट विश्वास का जीवंत प्रमाण हैं।
Mothers Day 2026: मगरलोड से कुरूद का 25 किमी का सफर और माँ का अटूट विश्वास
अहिल्याबाई जी की इसी प्रेरणा की छाया में आज मगरलोड से आने वाला एक नन्हा दिव्यांग बालक और उसकी माँ संघर्ष की नई इबारत लिख रहे हैं। 25 किलोमीटर की लंबी दूरी और आर्थिक तंगी भी इस माँ के हौसले को नहीं डिगा पाई। किराए के एक छोटे से कमरे में रहकर, वह माँ हर दिन अपने बेटे को बसंत फाउंडेशन की क्लास तक लाती है। उसकी आँखों में केवल एक सपना है—"मेरा बेटा अपनी दिव्यांगता को पीछे छोड़ कला के दम पर दुनिया में अपनी पहचान बनाए।"
Basant Foundation Chhattisgarh: जहाँ सपनों को मिल रहा है
आज बसंत साहू स्वयं इन बच्चों के लिए संबल बने हुए हैं। माँ अहिल्याबाई का मार्गदर्शन और बसंत का अनुभव मिलकर यहाँ सैंकड़ों दिव्यांग और जरूरतमंद बच्चों को आत्मनिर्भर बना रहा है।
"असली ताकत शरीर की मांस-पेशियों में नहीं, बल्कि माँ के दिए संस्कारों और मन के हौसले में होती है। बसंत फाउंडेशन इसी भावना के साथ खड़ा है कि पैसों की कमी से कोई सपना अधूरा न रहे।"
यह भी पढ़े: https://www.breakinnow.com/post/कलकटर-अबनश-मशर
माँ सिर्फ जन्म नहीं, जीवन गढ़ती है
अहिल्याबाई साहू और मगरलोड से आने वाली वह कर्मठ माँ, दोनों यह साबित करती हैं कि माँ केवल जन्मदाता नहीं, बल्कि वह विधाता है जो संघर्षों की आग में तपकर बच्चे के भविष्य की तस्वीर बदल देती है। उनकी उपस्थिति सिखाती है कि माँ का प्रेम ही वह एकमात्र जादू है जो नामुमकिन को मुमकिन बना देता है।
सादर नमन एवं शुभकामनाएँ
हर माँ को समर्पित यह दिन (A Tribute to Every Mother)
इस MothersDay2026 पर बसंत फाउंडेशन परिवार माँ अहिल्याबाई साहू और समाज की हर उस संघर्षशील माँ के चरणों में सादर प्रणाम निवेदित करता है।




Comments