नारी महानदी पुल पर हत्या का राज़: दस दिन की जांच के बाद पुलिस के हाथ लगा कातिल
- moolchand sinha

- 24 hours ago
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धमतरी/कुरूद।
नारी महानदी पुल पर हत्या का राज़ आखिरकार खुल गया है। एक कारोबार, दो हिस्सेदार, और एक की तरक्की — यही वो चिंगारी थी जिसने चावल मंडी की प्रतिद्वंद्विता को खून-खराबे में बदल दिया। दस दिनों तक सन्नाटे में डूबी इस हत्याकांड की गुत्थी को धमतरी पुलिस ने सुलझा लिया है। 22 जुलाई को पुल पर मिले 27 वर्षीय नीरज साहू के शव के पीछे छिपी थी एक ऐसी कहानी, जिसमें दोस्ती नहीं, जलन बोल रही थी।
सुनसान पुल, खामोश बोलेरो, और अनगिनत सवाल
22 जुलाई की सुबह जब नारी महानदी पुल पर नीरज साहू का रक्तरंजित शव मिला, तो पूरा इलाका सन्न रह गया। गले और माथे पर गहरे घाव, और पास ही खड़ी उसकी बोलेरो पिकअप (CG-06-GT-7675) — हर निशान चीख-चीख कर कह रहा था कि यह हत्या सोच-समझकर, ठंडे दिमाग से अंजाम दी गई थी।
नारी महानदी पुल पर हत्या का राज़ खोलने में जुटी रही पूरी टीम
एसपी भावना पांडेय के निर्देश पर कुरूद, मगरलोड और साइबर टीम ने साझा मोर्चा संभाला। अतिरिक्त एसपी शैलेन्द्र कुमार पांडेय और देवचरण पटेल, डीएसपी भानूप्रताप चंद्राकर तथा एसडीओपी रागिनी मिश्रा के मार्गदर्शन में टीमों ने घटनास्थल से जुड़े हर संभावित रास्ते की छानबीन की। सैकड़ों CCTV फुटेज खंगाले गए, वैज्ञानिक साक्ष्यों को बारीकी से परखा गया — और इसी मेहनत ने जांच को सीधे बिरेंद्र कुमार साहू के दरवाज़े तक पहुंचा दिया।
पूछताछ में खुला राज़ — कारोबार की चमक बनी नफ़रत की वजह
गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में जो सामने आया, उसने सबको स्तब्ध कर दिया। आरोपी बिरेंद्र और मृतक नीरज, दोनों चावल के व्यापारी थे — लेकिन नीरज का कारोबार परवान चढ़ रहा था, जबकि आरोपी अंदर ही अंदर इस सफलता को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। यही अनकही जलन एक दिन नफ़रत में तब्दील हुई, और मौका पाते ही आरोपी ने सुनसान पुल पर नीरज को घेर लिया। कैंची और पाना — घर के आम औजार, उस रात कातिल हथियार बन गए।
सबूत बरामद, आरोपी सलाखों के पीछे
आरोपी की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल कैंची और पाना बरामद कर गवाहों के समक्ष विधिवत जब्त किए गए। पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर 21 वर्षीय बिरेंद्र कुमार साहू, पिता कन्हैया लाल साहू, निवासी सांकरा, थाना मगरलोड को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
नारी महानदी पुल पर हत्या का राज़ खुलने के साथ यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि चाहे साजिश कितनी भी सधी हुई क्यों न हो, वैज्ञानिक जांच और तकनीकी साक्ष्यों की बारीक पड़ताल के आगे अपराधी देर-सबेर पकड़ में आ ही जाता है।




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