अंतरराष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की गूंज न्यूयॉर्क में बजा माटी का मान — “भीम चिंताराम” ने दुनिया को दिखाया सेवा और संस्कार का असली अर्थ
- moolchand sinha

- Nov 4, 2025
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न्यूयॉर्क/रायपुर।
दुनिया की रोशनी में जब छत्तीसगढ़ का नाम गूंजा, तो तालियों की आवाज़ ने यह साफ कर दिया कि माटी का संस्कार चाहे जहाँ जाए, दिल जीत ही लेता है। प्रतिष्ठित अमेरिकन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में छत्तीसगढ़ की डॉक्यूमेंट्री “भीम चिंताराम” ने न सिर्फ भारत का प्रतिनिधित्व किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि छत्तीसगढ़ अब कहानी नहीं—वैश्विक पहचान बन चुका है।
यह वह क्षण था जब स्टेटन आइलैंड के अंतरराष्ट्रीय मंच पर उजियारे के बीच दाऊ चिंताराम टिकरिहा की तप, त्याग और सेवा की गाथा उभरी—और उपस्थित दर्शकों ने आदरभाव से सिर झुका दिया।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐतिहासिक चयन
2 नवंबर को स्टेटन आइलैंड, न्यूयॉर्क के सेंटर ऑफ द आर्ट प्रमोमिंग आर्ट थिएटर में आयोजित इस भव्य फिल्म महोत्सव में दुनियाभर के फिल्मकारों की निगाहें थीं। यह आंकड़ा ही अपने आप में इस उपलब्धि की विशालता बताता है:
कुल प्रविष्टियां: दुनियाभर के 154 देशों से 2,974 फिल्में
प्रदर्शन के लिए चुनी गईं फिल्में: केवल चुनिंदा
भारत से चयनित फिल्में: 8
और इन आठ चुनिंदा भारतीय फिल्मों में, गौरवशाली ढंग से छत्तीसगढ़ की अपनी "भीम चिंताराम" का नाम शामिल रहा, जिसने पूरे राज्य को एक नई पहचान दी है।
जननायक की प्रेरणादायक गाथा
यह डॉक्यूमेंट्री फिल्म एस. अंशु धुरंधर द्वारा निर्देशित है और यह छत्तीसगढ़ के महान समाजसेवी एवं जननायक दाऊ चिंताराम टिकरिहा के अतुलनीय जीवन पर आधारित है। यह केवल एक बायोपिक नहीं, बल्कि एक गहन शोध और समर्पण का परिणाम है।
फिल्म के निर्माण में तीन वर्षों का गहन अनुसंधान शामिल किया गया, जिसके तहत 245 लोगों के साक्षात्कार लिए गए। फिल्म में दाऊ चिंताराम टिकरिहा की जीवनी के माध्यम से समाज में संस्कार, सेवा और संघर्ष के महत्व को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। निर्देशक ने उनकी जीवन यात्रा को इस तरह फिल्माया है कि यह दर्शकों को समाज के प्रति अटूट समर्पण और नैतिक मूल्यों की स्थापना के लिए प्रेरित करती है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर "भीम चिंताराम" का चयन न सिर्फ युवा फिल्म जगत के लिए बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ महतारी के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि उसकी मिट्टी में ऐसे गौरवशाली चरित्र हैं, जिनकी गाथाएं विश्व तक पहुंचनी चाहिए। इस फिल्म के साथ ही, दाऊ चिंताराम टिकरिहा के जीवन पर एक पुस्तक भी प्रकाशित की गई है, जो नई पीढ़ी को उनके योगदान और विचारों से चिरकाल तक अवगत कराती रहेगी।








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