top of page

अजय चंद्राकर का तीखा हमला: "पुरानी इमारतें ही नहीं, जब तक जर्जर सोच नहीं टूटेगी, तब तक आधुनिक कुरुद नहीं बनेगा"



₹9 करोड़ के विकास की फोटो भी जनता तक पहुँचाएं। कुरुद को खुद को 'विधाता' समझने वालों की नहीं, बल्कि एक आधुनिक विजन की जरूरत है।"
₹9 करोड़ के विकास की फोटो भी जनता तक पहुँचाएं। कुरुद को खुद को 'विधाता' समझने वालों की नहीं, बल्कि एक आधुनिक विजन की जरूरत है।"

कुरुद।

राजनीति में अक्सर लोग 'वक्त' काटने आते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो 'दौर' बदलने का माद्दा रखते हैं। कुरुद विधायक और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उनका लक्ष्य सिर्फ सड़कों का जाल बिछाना नहीं, बल्कि कुरुद को छत्तीसगढ़ का 'इंटेलेक्चुअल और हेल्थ हब' बनाना है।

₹8.68 करोड़ की लागत से बनने वाले शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय एवं स्टाफ क्वार्टर का भूमिपूजन महज़ एक सरकारी रस्म नहीं, बल्कि कुरुद की आत्मनिर्भरता का नया अध्याय है।

विरोधियों पर 'सर्जिकल स्ट्राइक': फोटो वायरल करने वालों को जवाब

अपने चिरपरिचित आक्रामक अंदाज़ में चंद्राकर ने उन लोगों को आड़े हाथों लिया जो पुरानी इमारतों के ढहने पर 'सियासी विलाप' कर रहे थे। उन्होंने कहा:

"जो लोग कल तक जर्जर छतों भवनों पर अफवाह फैला रहे थे, क्या वे आज इस ₹9 करोड़ के भव्य निर्माण की फोटो भी साझा करने की हिम्मत जुटा पाएंगे? कुरुद को 'विधाता' बनने का ढोंग करने वालों की नहीं, बल्कि ठोस विजन की ज़रूरत है। आधुनिक कुरुद के लिए पुरानी और जर्जर सोच को तोड़ना अनिवार्य है।"

रोजगार की नई परिभाषा: अब बाबू नहीं, 'स्किल लीडर' बनेंगे युवा

विधायक ने स्पष्ट किया कि रोजगार का मतलब सिर्फ सरकारी चपरासी की नौकरी नहीं है। उन्होंने कुरुद में उद्यानिकी, कृषि और अब नर्सिंग कॉलेज की चेन को 'हुनर की फैक्ट्री' करार दिया।

पीजी कोर्सेज की धमक:

कॉलेजों में पीजी कोर्स शुरू होना इस बात का प्रमाण है कि कुरुद अब शिक्षा के लिए महानगरों का मोहताज नहीं है।

ग्लोबल स्किल: चंद्राकर ने कहा, "मैं चाहता हूँ सिलौटी और कचना का बच्चा भी अपनी कंपनी खोलने का सपना देखे। स्टार्टअप नीति इसी विजन का हिस्सा है।"

'जी-राम' योजना: 3 साल में बदलेगा कुरुद का भूगोल

आगामी 3 वर्षों के लिए विधायक ने 'जी-राम' योजना और 'मिसिंग लिंक' प्रोजेक्ट का खाका पेश किया। इसके तहत बिना मांगे हर गांव की गलियां, नालियां और सीसी रोड का काम पूरा किया जाएगा। उन्होंने दो-टूक कहा कि वे राजनीति आने वाली पीढ़ी को जवाब देने के लिए कर रहे हैं, न कि सिर्फ वोट बैंक के लिए।

बजट पर तंज: "मेरे आलोचक तो इसे पढ़ भी नहीं पाएंगे"

शिक्षा के प्रति अपने समर्पण को दर्शाते हुए चंद्राकर ने चुटकी ली— "मैं बजट में एग्रीकल्चर के 5 पीजी सब्जेक्ट्स जुड़वाकर आया हूँ। मेरे आलोचक इसे अंग्रेजी में ठीक से पढ़ भी नहीं पाएंगे, लिखने की बात तो दूर है।

जब वे इस विजन को देखेंगे, तो यकीनन बेहोश हो जाएंगे!"

यह सिर्फ एक बयान नहीं था, बल्कि कुरुद के बौद्धिक स्वाभिमान का शंखनाद था। यह संदेश था कि कुरुद का विधायक सिर्फ सड़क-नाली नहीं सोचता, वह उस ग्लोबल एजुकेशन की बात करता है जो दिल्ली और मुंबई के बड़े संस्थानों में मिलती है।

"क्वालिटी से समझौता बर्दाश्त नहीं"CGMSC अध्यक्ष की 'मोहर'

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे दीपक महस्के ने साफ़ किया कि कुरुद में गुणवत्ता और समय के साथ कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा, "यह नर्सिंग कॉलेज आत्मनिर्भर कुरुद की दिशा में एक ऐसा मील का पत्थर है, जिसका लाभ आने वाली कई पीढ़ियों को मिलेगा।"

📍 न्यूज़ कार्ड

प्रोजेक्ट: शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय।

बजट: ₹8.68 करोड़।

खासियत: 100 बिस्तर अस्पताल और उच्च स्तरीय स्टाफ क्वार्टर।

"छोटा सोचना अपराध है, कुरुद अब बड़ा सोच रहा है।"

कुरुद अब 'डार्क एज' के अंधेरे से निकलकर 'डिजिटल और स्किल्ड' युग की दहलीज पर खड़ा है। यह प्रोजेक्ट न केवल स्वास्थ्य सुविधाएं देगा, बल्कि क्षेत्र के हज़ारों युवाओं को विश्वस्तरीय करियर के द्वार भी खोलेगा।

Comments


bottom of page