"शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो पिएगा वही दहाड़ेगा!" – हंचलपुर, बंगोली और दरबा में अजय चंद्राकर का शंखनाद
- moolchand sinha

- Apr 14
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[कुरुद | विशेष रिपोर्ट]
"शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो पिएगा वही दहाड़ेगा!" – बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के इन कालजयी शब्दों को जब पूर्व मंत्री एवं विधायक अजय चंद्राकर ने कुरुद के हंचलपुर में दोहराया, तो पूरा पांडाल तालियों की गूँज से भर उठा। मौका था ग्राम हंचलपुर में 'महार समाज भवन' के भव्य लोकार्पण का, जहाँ राजनीति और सामाजिक चेतना का एक अनूठा संगम देखने को मिला। विधायक चंद्राकर ने अपने इस तूफानी दौरे के दौरान बंगोली और दरबा में भी विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत कर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया।
सामाजिक भवन पर अजय चंद्राकर के विचार: इसे 'ज्ञान का मंदिर' बनाएं
लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए अजय चंद्राकर ने इस नवनिर्मित भवन को केवल उत्सवों तक सीमित न रखने की सलाह दी। उन्होंने युवाओं को ललकारते हुए कहा, "इस भवन को उन नौनिहालों के लिए 'पाठशाला' बनाना जो गरीबी की बेड़ियाँ काटना चाहते हैं।" उन्होंने साफ किया कि हंचलपुर की किस्मत अब केवल ईंट-पत्थरों से नहीं, बल्कि शिक्षा और ज्ञान की शक्ति से बदलेगी।
ग्राम बंगोली और दरबा में जनसंपर्क और विकास पर चर्चा
हंचलपुर के बाद विधायक चंद्राकर का काफिला ग्राम बंगोली और दरबा पहुँचा। यहाँ आयोजित कार्यक्रमों में उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएँ सुनीं और क्षेत्र के विकास कार्यों की समीक्षा की।
बंगोली में उन्होंने सामुदायिक एकजुटता पर जोर दिया।
दरबा में स्थानीय युवाओं और किसानों से चर्चा कर शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन का जायजा लिया।
इन तीनों गांवों के दौर ने पूरे क्षेत्र में एक नई राजनीतिक और वैचारिक लहर पैदा कर दी है।
कुरुद क्षेत्र में 'बौद्धिक क्रांति' का आह्वान
विधायक ने जोर देकर कहा कि समाज का उत्थान केवल बुनियादी ढांचों से नहीं बल्कि शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाने से होगा। उन्होंने विशेषकर दलित और पिछड़े वर्ग के युवाओं से आह्वान किया कि वे बाबा साहेब के पदचिह्नों पर चलें और प्रतिस्पर्धा के इस दौर में अपनी जगह खुद बनाएं। चमकते भविष्य की ओर बढ़ते इस कदम की चर्चा अब पूरे कुरुद और धमतरी क्षेत्र में हो रही है।




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