कलेक्ट्रेट की ये 'खास' कैंटीन बदल देगी आपकी सोच: 'सक्षम कैफे' में दिव्यांगों के जज्बे को सलाम, चखिए आत्मनिर्भरता का स्वाद
- moolchand sinha

- Dec 19, 2025
- 2 min read

कुरूद।
क्या आपने कभी ऐसी जगह चाय पी है जहाँ हर घूँट में संघर्ष की जीत और आत्मनिर्भरता की महक हो? जिला कलेक्ट्रेट परिसर में खुला 'सक्षम कैफे' आज पूरे शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह सिर्फ एक कैफे नहीं, बल्कि कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा की एक ऐसी सोच है जिसने दिव्यांगों के हाथों में लाचारी के बजाय रोजगार की चाबी थमा दी है।
एक रिबन कटा और खुल गए स्वावलंबन के द्वार

महापौर रामू रोहरा ने जब रिबन काटकर इस कैफे का उद्घाटन किया, तो वहां मौजूद हर शख्स की आँखों में एक नई उम्मीद थी। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा ने भी दिव्यांगजनों के परिश्रम की खुले मन से प्रशंसा की। अब कलेक्ट्रेट आने वाले लोगों को न केवल बेहतरीन नाश्ता मिलेगा, बल्कि उन्हें समाज के उस वर्ग को सहारा देने का मौका भी मिलेगा जो अपनी मेहनत से अपनी तकदीर लिख रहे हैं।
: क्यों खास है 'सक्षम कैफे'?
आत्मनिर्भरता का मंच: यह कैफे दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें स्थायी स्वरोजगार प्रदान करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
सुविधाजनक स्थान: कलेक्ट्रेट आने वाले आम नागरिकों, अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अब परिसर के भीतर ही गुणवत्तापूर्ण चाय-नाश्ते की सुविधा उपलब्ध होगी।
सम्मानजनक आजीविका: "दिव्यांग को स्वर्ग से रोजगार तक जोड़ना" के ध्येय के साथ, यह पहल उनके आत्मसम्मान को नई ऊँचाई देगी।
"शासकीय कार्यक्रमों का अब यही होगा ठिकाना"
कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने एक बड़ा दिल दिखाते हुए ऐलान किया है कि जिला प्रशासन के सभी सरकारी आयोजनों और मीटिंग्स में अब 'सक्षम कैफे' के जरिए ही खान-पान की व्यवस्था होगी। यह फैसला न केवल आर्थिक रूप से कैफे को मजबूती देगा, बल्कि सरकारी विभागों में भी संवेदनशीलता का संदेश फैलाएगा।
सक्षम कैफे का संचालन दिव्यांग दंपती बसंत कुमार बिश्नोई एवं संतोषी बिश्नोई द्वारा किया जा रहा है। यह पहल दिव्यांगजनों के लिए स्थायी रोजगार, स्वरोजगार और सम्मानजनक जीवन की दिशा में एक सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है।
स्वर्ग से रोजगार तक का सफर
समाज कल्याण विभाग की इस पहल ने साबित कर दिया है कि अगर सही दिशा और समर्थन मिले, तो दिव्यांगजन भी समाज के विकास में बराबर के भागीदार बन सकते हैं। 'सक्षम कैफे' आज एक रोल मॉडल बन चुका है, जिसे आने वाले समय में अन्य जिलों में भी दोहराया जा सकता है।








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