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कवर्धा: खाकी पर दाग लगाने की कोशिश, फर्जी टीआई का खेल खत्म; ग्रामीणों ने घेराबंदी कर 'साहब' को सिखाया सबक


कवर्धा। 

सरकारी गाड़ी का सायरन, कंधे पर सितारों वाली वर्दी और जुबान पर अफसराना धौंस—कवर्धा के केजेदाह गांव में उगाही का एक ऐसा मायाजाल बुना गया था जिसने कुछ देर के लिए असली प्रशासन को भी हैरत में डाल दिया। लेकिन कहते हैं कि 'कानून के हाथ लंबे होते हैं', और इस मामले में ग्रामीणों की एकजुटता ने उन हाथों को अपराधी की गर्दन तक पहुँचा दिया। खुद को थाना प्रभारी (TI) बताकर ट्रकों से अवैध वसूली करने वाला फर्जी अफसर अब बेनकाब होकर पुलिस की गिरफ्त में है।

​वर्दी का खौफ और सरकारी गाड़ी का खेल

​यह सनसनीखेज मामला कवर्धा जिले के केजेदाह गांव का है। मुख्य आरोपी रामकुमार श्रीवास अपने साथियों के साथ तहसीलदार के शासकीय वाहन का उपयोग कर रहा था। आरोपी ने न केवल पुलिस की वर्दी धारण कर रखी थी, बल्कि वह खुद को टीआई बताकर धान से भरे ट्रकों को रोकता था। सरकारी गाड़ी और वर्दी का भय दिखाकर उसने धान परिवहन करने वाले चालकों से खुलेआम अवैध वसूली का सिलसिला शुरू कर रखा था।

​जब ग्रामीणों ने चुना डर नहीं, साहस

​इस 'नकली राज' का अंत तब हुआ जब ग्रामीणों को रामकुमार की हरकतों पर शक हुआ। एक के बाद एक वाहन चालकों ने जब वसूली की शिकायत की, तो ग्रामीणों ने मोर्चा संभाल लिया। ग्रामीणों ने न केवल फर्जी अफसर को रंगे हाथों पकड़ा, बल्कि पुलिस के पहुंचने तक उसे बंधक बनाए रखा।

​हंगामे के बीच तहसीलदार का घेराव

​घटना की सूचना मिलते ही लोहारा तहसीलदार विवेक गुहैया मौके पर पहुंचे। हालांकि, स्थानीय लोगों का गुस्सा इतना अधिक था कि उन्होंने जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर तहसीलदार को भी कई घंटों तक घेरे रखा। स्थिति तब नियंत्रित हुई जब भारी पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।

​जांच के दायरे में 'सिस्टम' और 'नेटवर्क'

​इस खुलासे ने प्रशासन के भीतर भी खलबली मचा दी है। ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि:

पुलिस संलिप्तता: गिरोह में दो असली पुलिसकर्मियों की मिलीभगत होने की आशंका जताई जा रही है।

वन विभाग पर हमला: आरोपियों ने वन विभाग के चेकपोस्ट पर तैनात चौकीदार के साथ भी मारपीट की थी, जो उनके बेखौफ इरादों को दर्शाता है।

सरकारी वाहन का दुरुपयोग: सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक अपराधी के पास तहसीलदार की सरकारी गाड़ी कैसे पहुँची?

​कार्रवाई और फरार साथियों की तलाश

​पुलिस ने मुख्य आरोपी रामकुमार श्रीवास को गिरफ्तार कर विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। गिरोह के तीन अन्य सदस्य फिलहाल फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।


केजेदाह की यह घटना समाज की सतर्कता का एक जीवंत उदाहरण है। वर्दी की साख पर बट्टा लगाने वाले इस गिरोह का पर्दाफाश होना जरूरी था। अब देखना यह है कि क्या पुलिस की जांच उन सफेदपोश चेहरों और 'भीतर के मददगारों' तक पहुँच पाती है, जिनके संरक्षण में यह फर्जी खेल फल-फूल रहा था?

Breaking Now इस पूरे मामले की कड़ियों और आगामी खुलासों पर अपनी पैनी नज़र बनाए रखेगा।

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