कुरूद का 'हृदय परिवर्तन': 27 जनवरी को अटल स्टेडियम में होने वाली है 'ऐतिहासिक हलचल', एशिया की सबसे बुलंद आवाज से रू-ब-रू होंगे हजारों सपने... क्या आप तैयार हैं?
- moolchand sinha

- Jan 24
- 2 min read

कुरूद/धमतरी।
इतिहास तारीखों से नहीं, घटनाओं से बनता है। लेकिन छत्तीसगढ़ का एक छोटा सा शहर 'कुरूद' 27 जनवरी को तारीख और घटना, दोनों को बदलने की तैयारी कर चुका है। कलीराम पब्लिक स्कूल के पास स्थित अटल बिहारी वाजपेई स्टेडियम में सन्नाटा टूटने वाला है, क्योंकि वहां 'विचारों के महाकुंभ' का शंखनाद होने जा रहा है।
अजय फाउंडेशन के बैनर तले और पूर्व मंत्री श्री अजय चंद्राकर के संरक्षण में हो रहा यह आयोजन महज एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक 'सामाजिक प्रयोग' है—यह परखने का कि जब एक छोटे शहर की प्रतिभा को वैश्विक मंच का मार्गदर्शन मिलता है, तो परिणाम कितने विस्फोटक होते हैं।
120 मिनट का वह 'तूफान', जो बदल देगा जीने का नजरिया
महज 120 मिनट और 'बाउंस बैक' का जादू
घड़ी की सुइयां जब दोपहर 12 से 2 के बीच गुजरेंगी, तब कुरूद के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा जा रहा होगा। डॉ. बिंद्रा, जो अपनी ओजस्वी वाणी और 'बाउंस बैक' (Bounce Back) के मंत्र के लिए दुनिया भर में विख्यात हैं, कुरूद के छात्रों, व्यापारियों और गृहिणियों को सफलता का वह रोडमैप देंगे, जो अब तक केवल महानगरों की चारदीवारी में कैद था।
जानकारों का कहना है कि यह आयोजन कुरूद की 'दशा और दिशा' दोनों बदलने की क्षमता रखता है। अजय फाउंडेशन का मकसद साफ़ है—स्थानीय प्रतिभा को यह अहसास दिलाना कि सफलता भूगोल की मोहताज नहीं होती।
संघर्ष की भट्टी से निकला 'कुंदन': डॉ. बिंद्रा की कहानी
मंच पर खड़े डॉ. बिंद्रा केवल प्रबंधन के सूत्र नहीं देंगे, बल्कि वह अपना जीवन रखेंगे। एक ऐसा बच्चा जिसने 3 साल की उम्र में पिता को खोया, अभावों में बचपन काटा, सन्यासी बना और फिर श्रीमद्भगवद्गीता के ज्ञान को कॉरपोरेट जगत का सबसे बड़ा हथियार बना लिया।
कुरूद का युवा जब उन्हें सुनेगा, तो उसे किसी 'सेलिब्रेटी' की नहीं, बल्कि अपने ही बीच से निकले एक संघर्षशील व्यक्ति की कहानी सुनाई देगी। यही वह 'कनेक्ट' है, जो इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाता है।
क्यों हो रही है इस 'महा-सेमिनार' की इतनी चर्चा?
बिजनेस का कायाकल्प: छोटे व्यापारियों के लिए यह सेशन 'संजीवनी' साबित हो सकता है। डॉ. बिंद्रा बताएंगे कि गल्ले पर बैठने वाला व्यापारी 'ब्रांड' कैसे बनता है।
भीड़ से अलग पहचान: करियर की दोराहे पर खड़े छात्रों के लिए यह सेशन 'लाइटहाउस' का काम करेगा।
गीता का मैनेजमेंट: तनाव और डिप्रेशन के दौर में डॉ. बिंद्रा बताएंगे कि कैसे कृष्ण के उपदेश आज के 'कॉरपोरेट युद्ध' में आपको विजेता बना सकते हैं।
27 जनवरी: जब कुरूद बनेगा 'लर्निंग कैपिटल'
विधायक अजय चंद्राकर की यह दूरदर्शी सोच कुरूद को बौद्धिक आयोजनों के केंद्र (Hub) के रूप में स्थापित कर रही है। 27 जनवरी को अटल स्टेडियम में उमड़ने वाला जनसैलाब केवल भीड़ नहीं होगी, बल्कि वह उन महत्वाकांक्षाओं का महासागर होगा, जो अब उफान पर आने को तैयार है।
फैसला आपके हाथ में है: क्या आप भीड़ का हिस्सा बनकर रह जाएंगे, या उस आवाज को सुनकर अपनी तकदीर बदलेंगे जो कहती है— "मैं ऐसा कर सकता हूँ, और मैं ऐसा करूँगा!"







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