रील की दुनिया छोड़ो, खेल से नाता जोड़ो: कुरूद के 'कबड्डी महाकुंभ' में पदमपुर का डंका, पुलिस अधीक्षक ने दी युवाओं को बड़ी नसीहत
- moolchand sinha

- Jan 19
- 3 min read

कुरूद ( खेल समाचार ):
जब रेडर की हुंकार और डिफेंडर की ललकार आपस में टकराती है, तो जो शोर उठता है वही असली खेल है। कुरूद नगर के खेल मेला मैदान में पिछले दो दिनों से यही शोर गूंज रहा था। मौका था टॉरनेडो क्रिकेट क्लब द्वारा आयोजित भव्य जिला स्तरीय कबड्डी प्रतियोगिता का, जहाँ जिले भर की 32 टीमों ने अपनी ताकत की नुमाइश की।
इस महाकुंभ का उद्देश्य केवल हार-जीत नहीं, बल्कि उन यादों को जिंदा रखना था जो स्व. विनोद गोस्वामी और दिवंगत खेल प्रेमियों ने इस मिट्टी को दी थीं। इस रोमांचक सफर का अंत एक सांस रोक देने वाले फाइनल मुकाबले के साथ हुआ, जहाँ वनांचल के शेरों (पदमपुर) ने बाजी मारी।
फाइनल का रोमांच: जब पदमपुर ने पलटा पासा
रविवार की शाम फाइनल मुकाबला पदमपुर (नगरी) और मेजबान ब्लॉक की चर्रा टीम के बीच हुआ। मैच के हर पल में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कभी चर्रा के डिफेंडर्स हावी होते, तो कभी पदमपुर के रेडर्स की फुर्ती। अंततः, पदमपुर के धाकड़ खिलाड़ियों ने अपने हरफनमौला प्रदर्शन से चर्रा को पछाड़ते हुए 'चैलेंजर कप' और 21,000 रुपये की इनामी राशि पर कब्जा जमाया। चर्रा की टीम ने भी गजब का जीवट दिखाया और उपविजेता (11,000 रुपये) बनकर सबका दिल जीता।
विजयी वीरों का सम्मान:
तृतीय स्थान: धौराभाटा (6,000 रुपये)।
चतुर्थ स्थान: परसट्टी (4,000 रुपये)।
मैन ऑफ द सीरीज: टिकेश निषाद (चर्रा)।
बेस्ट रेडर: त्रिलोक (पदमपुर)।
बेस्ट कैचर: कोमल यादव (चर्रा)।
मंच से गूंजा संदेश: "मैदान बुला रहा है..."
पुरस्कार वितरण समारोह में अतिथियों ने सिर्फ इनाम नहीं बांटे, बल्कि जीवन का फलसफा भी समझाया। मुख्य अतिथि जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष निरंजन सिन्हा ने पुराने दिनों के किस्से सुनाते हुए कहा, "प्रतिभा एसी कमरों में नहीं, इसी धूल और पसीने में पैदा होती है। कुरूद की माटी खिलाड़ियों की जननी है।"
वहीं, विशिष्ट अतिथि पुलिस अधीक्षक (SP) और टॉरनेडो के सीनियर खिलाड़ी नीरज चंद्राकर ने युवाओं को 'स्क्रीन' से 'सीन' की ओर लौटने का मंत्र दिया। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, "आभासी दुनिया (Virtual World) एक छलावा है। मोबाइल, रील और सोशल मीडिया के नशे को छोड़ो और मैदान में उतरकर अपनी असली ताकत दुनिया को दिखाओ।"
कुरूद के गौरव का सम्मान:
इस मंच ने केवल कबड्डी ही नहीं, बल्कि अन्य विधाओं के नायकों को भी सलाम किया:
एशिया कप में जगह बनाने वाले बॉल बैडमिंटन खिलाड़ी नरेंद्र कुमार (परखंदा)।
राष्ट्रीय पटल पर चमकने वाली कबड्डी खिलाड़ी धनेश्वरी निर्मलकर।
देश भर में (उज्जैन से शिमला तक) घुंघरुओं की झनकार बिखेरने वाली कथक नृत्यांगना सिया शर्मा।
आयोजन के सूत्रधार
इस भव्य आयोजन की सफलता की इबारत संयोजक सुरेश निषाद, रमेश कुमार साहू और उनकी पूरी टॉरनेडो टीम (नूरसिंग, घनश्याम, वरुण, शिवनंदन आदि) ने अपनी मेहनत से लिखी। रेफरी और व्यवस्थापकों ने खेल भावना को सर्वोपरि रखा।
एक नई शुरुआत
मैच खत्म हो चुका है, भीड़ छंट चुकी है, लेकिन खेल मेला मैदान की हवा में एक सवाल अब भी तैर रहा है। 32 टीमों का यह संघर्ष केवल एक ट्रॉफी के लिए नहीं था, यह एक 'अलार्म' था उस युवा पीढ़ी के लिए जो अपनी उंगलियां मोबाइल की स्क्रीन पर घिस रही है।
स्व. विनोद गोस्वामी की स्मृति में आयोजित इस दंगल ने साबित कर दिया कि जब युवा रील बनाना छोड़कर खेल बनाना शुरू करते हैं, तो पदमपुर जैसा इतिहास रचा जाता है। ट्रॉफी पदमपुर गई है, लेकिन जीत उस जज्बे की हुई है जिसने दो दिन तक कुरूद को 'मोबाइल मुक्त' और 'खेल युक्त' रखा।








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