कुरूद में जूडो का जलवा: 15 कॉलेजों के योद्धाओं ने मचाया तहलका!
- moolchand sinha

- Oct 15, 2025
- 2 min read
कुरूद। मंगलवार का दिन कुरूद के खेल इतिहास में स्वर्णाक्षरों से दर्ज हो गया।
संत गुरु घासीदास शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय का मैदान आज जूडो के जोश, जुनून और जज्बे से गूंज उठा।
15 कॉलेजों के जूडो खिलाड़ियों ने मैट पर उतरते ही ऐसा दमखम दिखाया कि हर गिरावट पर संघर्ष और हर जीत पर गर्व का उत्सव नजर आया।
दर्शकों की तालियों की गूंज, खिलाड़ियों का जोश और खेल भावना का संगम — कुरूद का मैदान ‘शौर्य के महाकुंभ’ में बदल गया।
🏆 यह सिर्फ प्रतियोगिता नहीं — खेल भावना और अनुशासन का पर्व था!
पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर एवं कुरूद महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतर-महाविद्यालयीन जूडो चैंपियनशिप ने युवा खेल प्रतिभाओं को नई पहचान दी।
शानदार उद्घाटन:
जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष टिकेश साहू ने भव्य शुभारंभ किया।
कार्यक्रम में विधायक प्रतिनिधि भोजराज चंद्राकर, खेमराज सिन्हा और श्रीमती अनुराधा साहू की गरिमामय उपस्थिति रही।
प्रतियोगिता की अध्यक्षता प्रभारी प्राचार्य डॉ. आर.के. पाण्डेय ने की।
खेल विभाग प्रमुख अमित टंडन और शारीरिक शिक्षा विभाग प्रमुख मेजर डॉ. ओमजी गुप्ता के कुशल निर्देशन में आयोजन उत्कृष्टता का उदाहरण बना।
मंच संचालन डॉ. हित नारायण टंडन ने प्रभावशाली ढंग से किया।
पुरुष वर्ग में दमखम और रणनीति का संगम
60 किग्रा: गौतम प्रसाद (विप्र रायपुर), मुकेश निर्मलकर (आईसीटी गरियाबंद), मनस्वी (जीएनए भाटापारा)
66 किग्रा: अपूर्व सोनी (विप्र रायपुर), सौरभ सिंह (जीएनए भाटापारा)
73 किग्रा: श्याम किशोर यादव (नेताजी सुभाष अभनपुर), जितेंद्र (जीएनए भाटापारा)
90 किग्रा: अर्नव पाल (दुर्गा रायपुर)
100 किग्रा: पोषण देवांगन (जीएनए भाटापारा)
महिला वर्ग में आत्मविश्वास और शक्ति का प्रदर्शन
48 किग्रा: प्राची (जीएनए भाटापारा), मुस्कान (अभनपुर), दीपिका डागा (डागा कन्या रायपुर)
52 किग्रा: झरना निषाद (डागा कन्या रायपुर), त्रिवेणी (कुरूद)
57 किग्रा: चेतना सिंह (यू.टी.डी. रायपुर), तनुजा (कुरूद), भूमिका (डी.बी. कन्या रायपुर)
63 किग्रा: अनुष्ठा (यू.टी.डी. रायपुर), पवनी (डी.बी. कन्या रायपुर), अवंतिका (जीएनए भाटापारा)
70 किग्रा: प्राची (यू.टी.डी. रायपुर), अकांक्षा (दुर्गा रायपुर)
सम्मान समारोह में गर्व की चमक:
मुख्य अतिथि श्री भोजराज चंद्राकर ने विजेता खिलाड़ियों को प्रमाणपत्र और पुरस्कार प्रदान किए।
उनके शब्दों में — “ऐसे आयोजन न केवल प्रतिभाओं को मंच देते हैं, बल्कि समाज में अनुशासन, सम्मान और संघर्ष की भावना भी जगाते हैं।”












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