कुरूद में 'बौद्धिक क्रांति': स्टेडियम में तिल रखने की जगह नहीं, डॉ. बिंद्रा की चेतावनी— "संगत गलत हुई तो 'शकुनि' बर्बाद कर देंगे"
- moolchand sinha

- Jan 27
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: अजय चंद्राकर की पहल से कुरूद में उमड़ा जनसैलाब: हजारों की भीड़ को दिया हनुमान जी जैसा 'प्रोफेशनल' बनने का मंत्र)

कुरूद ।
27 जनवरी कुरूद के इतिहास में दर्ज हो गई। अटल बिहारी वाजपेयी स्टेडियम में आज जो नजारा था, वह किसी राजनीतिक रैली का नहीं, बल्कि एक 'बौद्धिक क्रांति' का था।
अजय फाउंडेशन और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के आह्वान पर आयोजित इस कार्यक्रम में केवल युवाओं की भीड़ नहीं थी, बल्कि हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं, अपना काम छोड़कर आए व्यापारी, घर की जिम्मेदारी संभालने वाली गृहणियां और बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित पालक (Parents) भी एक उम्मीद लेकर पहुंचे थे। और जब मंच पर एशिया के नंबर वन मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. विवेक बिंद्रा आए, तो उन्होंने किसी को निराश नहीं किया।
गृहणियों और पालकों के लिए सबक: "संस्कार और संगत"
डॉ. बिंद्रा ने मंच से पालकों और माताओं (गृहणियों) की नब्ज टटोलते हुए कहा कि मोटिवेशन सिर्फ बिजनेस के लिए नहीं, बल्कि जीवन जीने के लिए जरूरी है। उन्होंने पालकों को आगाह करते हुए सीधा सवाल किया:
"आप अपने बच्चों को क्या 'बिलीफ सिस्टम' दे रहे हैं? अगर आप उन्हें बचपन से ही सीमाओं में बांधेंगे, तो वे उड़ना कैसे सीखेंगे?"
हजारों की भीड़ को सचेत करते हुए उन्होंने कहा,
"यंग लड़कों को बोल रहा हूँ, और यहाँ बैठे उनके माता-पिता भी सुनें—
5 शराबियों के साथ रहोगे, तो छठे शराबी आप बनोगे।
संगत ही भविष्य तय करती है। हर परिवार और समाज में आज 'शकुनि' और 'मंथरा' मौजूद हैं, जो आपके बच्चों का पैटर्न खराब कर रहे हैं।
इनसे अपने परिवार को बचाना ही आपकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
"
व्यापारियों को गुरुमंत्र: "सींग मारने वाले बैलों से बचें"
कुरूद के व्यापारी वर्ग के लिए डॉ. बिंद्रा का अंदाज बिल्कुल ठेठ और सीधा था। उन्होंने व्यापार के गणित को गौशाला और पोल्ट्री फार्म के उदाहरण से समझाया, जिसे सुनकर पूरा स्टेडियम हंसी और तालियों से गूंज उठा।
"व्यापारी भाइयों, गल्ले पर बैठने से धंधा नहीं बढ़ता। कस्टमर पहचानना सीखो। कुछ 'गाय' हैं जिनसे पेमेंट मांगनी पड़ती है, कुछ 'मुर्गी' हैं जो खुद पेमेंट देती हैं। लेकिन सावधान रहना, कुछ कस्टमर 'बैल' भी होते हैं, जो सिर्फ सींग मारते हैं, देते कुछ नहीं। ऐसे लोगों पर समय बर्बाद करना बंद करो।"
छात्रों के लिए: "डिग्री नहीं, स्पीड मायने रखती है"

स्टेडियम में मौजूद हजारों छात्र-छात्राओं के लिए डॉ. बिंद्रा ने सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली का उदाहरण देकर करियर का फलसफा बदल दिया।
"बाजार में पहले कौन आया, यह अब मायने नहीं रखता। गूगल 18वें नंबर पर आया था, लेकिन उसने पहले के 17 सर्च इंजनों को खत्म कर दिया। जीवन में आगे वो जाएगा जिसकी स्पीड तेज है और जो अपनी कमियों (बाउंसर) पर काम करके सचिन की तरह हेलमेट सुधार लेगा।"
शकुनि और मंथरा: संगत का असर
युवाओं को चेतावनी देते हुए डॉ. बिंद्रा ने 'संगत' (Association) को सफलता की सबसे बड़ी कुंजी बताया। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि हर युग में शकुनि और मंथरा रहे हैं। आज के कलयुग में ये हमारे आसपास, हमारे ऑफिस और समाज में मौजूद हैं। भगवान कृष्ण की तरह इनसे दूरी बनाना ही सफलता की पहली सीढ़ी है।
हनुमान जी जैसा 'प्रोफेशनल' बनिए
कॉर्पोरेट जगत में काम करने के तरीके (Work Ethics) पर उन्होंने हनुमान जी का उदाहरण दिया।
"जब लक्ष्मण जी मूर्छित हुए और जामवंत (HR Head) ने हनुमान जी को हिमालय (नेपाल) भेजा, तो हनुमान जी ने यह नहीं कहा कि मेरी जॉब लोकेशन श्रीलंका थी, मुझे नेपाल क्यों भेज रहे हैं? उन्होंने परिस्थिति नहीं देखी, समाधान देखा। आज के युवाओं को ऐसा ही 'सॉल्यूशन ओरिएंटेड' बनना होगा।"
अनाथ से 'स्टाफ' के ट्रेनर तक का सफर:
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण वह था जब डॉ. बिंद्रा ने अपनी निजी जिंदगी के पन्ने खोले। उन्होंने बताया, "मैं अनाथ था। फीस न होने के कारण 12 साल की पढ़ाई में 10 बार स्कूल बदला गया। जिन कॉलेजों में मैं पैसों की कमी से पढ़ नहीं पाया, आज वहां के प्रोफेसरों को पढ़ाने के लिए मुझे बुलाया जाता है।"
अजय चंद्राकर का विजन: "कुरूद से निकलेंगे सुपरस्टार"
कार्यक्रम के संरक्षक विधायक अजय चंद्राकर ने अपने स्वागत भाषण में इस आयोजन के पीछे की मूल भावना को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन भीड़ जुटाने के लिए नहीं, बल्कि कुरूद की प्रतिभाओं को तराशने के लिए है।
श्री चंद्राकर ने कहा, "मैं चाहता हूं कि कुरूद के बच्चे केवल डिग्री न लें, बल्कि ऐसी मानसिकता तैयार करें कि आने वाले समय में देश के पटल पर सुपरस्टार बनकर उभरें।"
आभार प्रदर्शन:
कार्यक्रम के समापन पर नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति भानु चंद्राकर ने सभी प्रतिभागियों—विशेषकर महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, युवाओं और व्यापारियों—का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने डॉ. विवेक बिंद्रा को विशेष धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके प्रेरक विचारों ने कुरूद को नई सोच, नई ऊर्जा और नई दिशा प्रदान की है।








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