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: माटी की महक अब देश की सरहद तक। खेत की पगडंडी से दिल्ली तक का सफर, कुरूद के ऋषभ साहू का CISF में चयन, पढ़िए संघर्ष की कहानी।

 

कुरूद।

अक्सर कहा जाता है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती, उसे बस एक मौके और अटूट जज्बे की दरकार होती है। छत्तीसगढ़ के कुरूद ब्लॉक के छोटे से गांव कोकड़ी में यह कहावत तब सच साबित हुई, जब वहां के होनहार युवक ऋषभ कुमार साहू (ऋतिक) ने भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन प्रतिष्ठित केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में अपना स्थान पक्का कर लिया।

​यह खबर केवल एक युवा की नौकरी लगने की नहीं है, बल्कि यह एक साधारण परिवार के असाधारण संघर्ष और जीत की कहानी है।

माता-पिता का तप और बेटे का समर्पण

हर सफल पुरुष के पीछे एक संघर्षशील परिवार होता है। ऋषभ की इस कामयाबी की नींव उनके पिता श्री जागेश्वर साहू और माता श्रीमती नीता साहू ने रखी है। जहाँ पिता ने खेतों में पसीना बहाकर बेटे को कभी किसी संसाधन की कमी नहीं होने दी, वहीं माँ नीता साहू ने अपने संस्कारों और आशीर्वाद से बेटे का मनोबल कभी टूटने नहीं दिया।

​ऋषभ के चयन की खबर मिलते ही माँ नीता साहू की आँखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने भावुक होकर कहा, "मेरे बेटे की मेहनत और भगवान के आशीर्वाद ने आज हमारे घर को रोशन कर दिया है।"

क्या है CISF और क्यों खास है यह उपलब्धि?

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) देश का वह प्रमुख अर्धसैनिक बल है जो देश की 'आर्थिक धड़कन' यानी बड़े उद्योगों, हवाई अड्डों, मेट्रो और परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा करता है। ऐसे अनुशासित और "एलिट फोर्स" में चयन होना आसान नहीं है। इसके लिए ऋषभ ने कड़ी शारीरिक और लिखित परीक्षाओं को पास कर अपनी योग्यता साबित की है।

ग्रामीण युवाओं के लिए बने 'रोल मॉडल'

कोकड़ी जैसे ग्रामीण अंचल से निकलकर राष्ट्रीय स्तर के सुरक्षा बल में शामिल होना कोई छोटी बात नहीं है। ऋषभ (ऋतिक) की यह सफलता गांव के उन सैकड़ों युवाओं के लिए एक 'केस स्टडी' है जो मानते हैं कि सरकारी नौकरी या बड़ी सफलता केवल शहर के बच्चों को मिलती है। ऋषभ ने साबित कर दिया है कि अगर लक्ष्य अर्जुन की तरह मछली की आँख पर हो, तो सफलता निश्चित है।

गांव में जश्न, बधाइयों का तांता

ऋषभ के घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। कुरूद क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, समाज के वरिष्ठ जनों और ग्रामीणों ने जागेश्वर साहू और नीता साहू को बधाई देते हुए कहा कि उनके बेटे ने न केवल साहू समाज का, बल्कि पूरे जिले का मान बढ़ाया है।

भविष्य की राह

जल्द ही ऋषभ अपनी ट्रेनिंग के लिए प्रस्थान करेंगे, जहाँ वे एक तपे हुए फौजी बनकर देश की रक्षा का दायित्व संभालेंगे। 'कोकड़ी' का यह लाल अब 'भारत माता' का प्रहरी बनकर अपनी सेवाएं देगा।

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