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“कुलगांव राइस मिल कांड: नाबालिग से दुष्कर्म पर अदालत का कड़ा फैसला—आरोपी को 20 साल की सजा, न्याय ने कहा ‘ऐसे अपराध पर Zero Tolerance’”




कांकेर।

कुलगांव राइस मिल में 14 वर्षीय आदिवासी बच्ची के साथ हुई दरिंदगी के मामले में न्यायालय ने तीखा और निर्णायक रुख अपनाते हुए आरोपी को कठोर दंड सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश विभा पांडेय ने आरोपी लालटून कुमार शाह (30 वर्ष, निवासी मोतिहारी, बिहार) को 20 वर्ष कठोर कारावास और ₹1000 अर्थदंड से दंडित किया। यह फैसला उन तत्वों के लिए सख्त चेतावनी है जो नाबालिगों के खिलाफ अपराध करने की हिम्मत रखते हैं—कानून अब ऐसे हर अपराधी पर पूरी ताकत से प्रहार करेगा।

कैसे अंजाम दी गई यह हैवानियत


8 मई 2024 की रात कुलगांव स्थित राइस मिल में 14 वर्ष 4 माह की बालिका काम पर गई थी।

रात 8 से 9 बजे के बीच सभी कर्मचारी छुट्टी कर जा चुके थे और बच्ची मिल में पूरी तरह अकेली रह गई।


इसी मौके का फायदा उठाकर राइस मिल का ऑपरेटर लालटून शाह उसे बहला-फुसलाकर अंदर ले गया और जबरन दुष्कर्म किया।

घटना के बाद डरी-सहमी नाबालिग किसी तरह वहाँ से भागकर पथरी स्थित पोल्ट्री फार्म पहुँची और पूरी घटना बताई।


एफआईआर, जांच और अदालत में सच्चाई का उजागर होना


पीड़िता की शिकायत पर कोतवाली थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना पूर्ण की।

विचारण के दौरान अभियोजन द्वारा प्रस्तुत:


मेडिकल रिपोर्ट

घटनाक्रम की सुरागवार श्रृंखला

प्रत्यक्षदर्शी और परिजनों के बयान

सबूतों ने आरोपी को कठघरे में खड़ा कर दिया।


न्यायालय ने इसे नाबालिग के सम्मान और सुरक्षित बचपन पर सीधा हमला बताते हुए आरोपी को कड़ी सजा सुनाई।

पैरवी और न्याय—दोनों पक्षों की मजबूती

शासन की ओर से इस अत्यंत महत्वपूर्ण मामले की पैरवी शासकीय अधिवक्ता ईश्वर लाल साहू ने की, जिन्होंने सभी साक्ष्यों को प्रभावी ढंग से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया।


इस निर्णय ने स्पष्ट कर दिया—

“बच्चियों की अस्मिता से खेलने वालों के लिए कानून में सिर्फ कठोर दंड है—राहत, समझौता या नरमी का कोई स्थान नहीं।”


कुलगांव राइस मिल कांड का यह फैसला न केवल पीड़िता और परिवार के लिए न्याय है, बल्कि पूरे समाज के लिए यह संदेश भी कि ऐसी बर्बरता पर न्यायालय हमेशा कठोरतम रुख अपनाएगा।

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