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"धमतरी: 'खूनी' सस्पेंस की पूरी कहानी, पिकनिक में चाकू चलाने वाला आरोपी चढ़ा पुलिस के हत्थे"


धमतरी पुलिस द्वारा खूनी सस्पेंस का आरोपी गिरफ्तार"।

धमतरी:

सन्नाटा... अंधेरा... और फिर अचानक एक चीख। 08 फरवरी की उस शाम पैरी नदी का किनारा किसी डरावनी फिल्म के सीन जैसा हो गया था। पिकनिक मना रहे दोस्तों को क्या पता था कि उनके बीच ही एक 'शिकारी' छिपा बैठा है। दो महीने तक अंधेरे में गायब रहने के बाद, आखिरकार कानून के लंबे हाथों ने उस चेहरे को दबोच लिया जिसने पूरी घाटी में दहशत फैला दी थी।

दबे पांव आई मौत: 'खूनी सस्पेंस' के बीच गूंजी गालियां:

"पिकनिक का माहौल हंसी-ठिठोली से गुलजार था, लेकिन पैरी नदी के रेतीले घाट पर एक भारी सन्नाटा पसरा था। तभी उस जमी हुई चुप्पी को भेदते हुए एक परछाईं करीब आई। वह साया कोई अजनबी नहीं, बल्कि गांव का ही त्रिलोकी साहू था—वही शख्स जिसने इस खूनी सस्पेंस की पूरी पटकथा पहले ही लिख ली थी।"

वो एक डिमांड... और फिर चमकता हुआ चाकू 🔪

त्रिलोकी की आंखों में एक अजीब सा जुनून था। उसने गाली-गलौज करते हुए एक ऐसी मांग रखी, जिसने सबका खून सुखा दिया—"मुर्गा और शराब के लिए पैसे निकाल!"

जब प्रार्थी त्रिभुवन साहू ने असमर्थता जताई, तो त्रिलोकी के हाथ में दबे हुए लोहे ने अपनी चमक दिखाई। पलक झपकते ही उसने प्रार्थी के कुल्हे पर गहरा वार किया और अंधेरे का फायदा उठाकर गायब हो गया। पीछे छूट गई थी सिर्फ खून की लकीरें और दहशत।

'मिशन चेस': कैसे खत्म हुआ फरारी का सस्पेंस?

दो महीने तक पुलिस की आंखों में धूल झोंकने वाला त्रिलोकी सोच रहा था कि वह बच गया है। लेकिन चौकी करेलीबड़ी की टीम खामोशी से अपना जाल बुन रही थी।

खोजबीन: हर वो ठिकाना जहां त्रिलोकी छिप सकता था, पुलिस की नजर में था।

दबिश: जैसे ही मुखबिर ने इशारा किया, पुलिस ने उस 'हथियार' समेत उसे घेर लिया जिसे वह अपना सुरक्षा कवच समझता था।

सत्य: पूछताछ के कमरों की दीवारों के बीच त्रिलोकी का गुरूर टूट गया और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

जेल की सलाखें और कानून का हिसाब

पुलिस ने आरोपी के पास से वही चाकू बरामद किया है जिसने उस रात तबाही मचाई थी। अब त्रिलोकी साहू (25 वर्ष) पुलिस की गिरफ्त में है और उसके खिलाफ BNS की सख्त धाराएं 296, 115(2), 351(2), 119(1), और 118(1) लगाई गई हैं।

करेलीबड़ी पुलिस का कड़ा संदेश: "अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून की पटकथा हमेशा उसके अंजाम से ही खत्म होती है।"

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