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खामोश गवाह, चीखते सबूत: धमतरी पुलिस ने कैसे बुना कातिल के लिए उम्रकैद का जाल?

धमतरी, छत्तीसगढ़

​"अपराध कितना भी शातिराना क्यों न हो, कानून की नजरों से बच नहीं सकता।" धमतरी पुलिस ने सिर्री पुल हत्याकांड की गुत्थी सुलझाकर इस बात को फिर से सच साबित किया है। जहाँ न कोई प्रत्यक्षदर्शी था और न ही कोई सुराग, वहाँ पुलिस की 'फॉरेंसिक बुद्धिमत्ता' और सटीक कड़ियों ने एक अंधे कत्ल को उम्रकैद के ऐतिहासिक फैसले तक पहुँचा दिया। यह मामला आज प्रदेश भर में पुलिस की कार्यक्षमता की मिसाल बन चुका है।

आखिर क्या था वो 'सीक्रेट' सबूत?

​9 अक्टूबर 2024 की सुबह जब ग्राम सिर्री के पास नहर में एक अज्ञात युवक की हाथ-पैर बंधी लाश मिली, तो इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान कंडेल निवासी किशोर साहू के रूप में हुई। आरोपी मुकेश साहू ने बड़ी चालाकी से वारदात को अंजाम दिया था—उसने न केवल हत्या की, बल्कि मोबाइल और बाइक की नंबर प्लेट जैसी अहम निशानियों को नहर की गहराइयों में फेंक दिया ताकि पहचान और कड़ी का तालमेल कभी न बैठ सके।

चुनौतियों का चक्रव्यूह: सीमाएं और खामोशी

​इस मामले में पुलिस के सामने तीन बड़ी दीवारें थीं:

भौगोलिक त्रिकोण: पीड़ित अर्जुनी क्षेत्र का, वारदात कुरुद में और शव की बरामदगी बिरेझर चौकी क्षेत्र में। तीन अलग-अलग थाना क्षेत्रों के बीच कड़ियों को जोड़ना एक कठिन प्रशासनिक कार्य था।

शून्य चश्मदीद: घटनास्थल पर कोई गवाह मौजूद नहीं था।

परिस्थितिजन्य साक्ष्य: कातिल ने अपनी तरफ से हर सबूत मिटा दिया था।

जांच का 'धमतरी मॉडल': तकनीक और तर्क की जीत

​पुलिस अधीक्षक श्री सूरज सिंह परिहार के मार्गदर्शन में तत्कालीन चौकी प्रभारी निरीक्षक चंद्रकांत साहू ने इस केस को एक चुनौती के रूप में लिया। वैज्ञानिक पद्धति (Scientific Investigation) का उपयोग करते हुए पुलिस ने:

  • लास्ट सीन थ्योरी: तकनीकी विश्लेषण से मृतक और आरोपी के अंतिम क्षणों के संबंधों को प्रमाणित किया।

  • बरामदगी का महत्व: आरोपी की निशानदेही पर नहर से फेंकी गई वस्तुओं की बरामदगी ने कोर्ट में आरोपी के खिलाफ 'लौह कवच' जैसा साक्ष्य पेश किया।

  • सूक्ष्म विश्लेषण: घटनास्थल के निरीक्षण और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर हत्या के तरीके और समय का सटीक आकलन किया।

न्यायिक प्रहार: आजीवन कारावास का फैसला

​द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायालय, धमतरी ने पुलिस की इस 'त्रुटिहीन' (Error-free) विवेचना पर मुहर लगाते हुए आरोपी मुकेश साहू को आजीवन कारावास और 07 वर्ष के सश्रम कारावास की कड़ी सजा सुनाई। साथ ही, अर्थदंड से भी दंडित किया गया। यह फैसला कानून की उस ताकत का प्रतीक है जहाँ विज्ञान की मदद से न्याय की जीत सुनिश्चित की गई।

सम्मान और प्रेरणा: वर्दी का गौरव

​इतने जटिल केस में सटीक विवेचना कर दोषसिद्धि (Conviction) सुनिश्चित करने के लिए एसपी धमतरी ने निरीक्षक चंद्रकांत साहू को नकद पुरस्कार और उनकी सेवा पुस्तिका में प्रशंसा अंक अंकित कर सम्मानित किया। यह सम्मान केवल एक अधिकारी का नहीं, बल्कि धमतरी पुलिस की उस कार्यक्षमता का है जो अपराधियों के लिए काल और आम नागरिकों के लिए ढाल बनी हुई है।

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