धमतरी पुलिस का न्याय-प्रहार: मासूम से दरिंदगी करने वाले को 20 साल की कालकोठरी ‘सटीक विवेचना’ के लिए सब-इंस्पेक्टर का बढ़ा मान
- moolchand sinha

- Dec 30, 2025
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धमतरी, छत्तीसगढ़ | 30 दिसंबर 2025
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से न्याय की एक ऐसी गूंज उठी है, जिसने न केवल अपराधियों के हौसले पस्त कर दिए हैं, बल्कि आम जनता का कानून पर भरोसा और भी मजबूत किया है। करीब डेढ़ साल पहले एक मासूम बच्ची के साथ हुई हैवानियत के मामले में धमतरी पुलिस की 'वॉटर-टाइट' विवेचना का नतीजा आज सबके सामने है। आरोपी को उसकी जवानी के 20 साल अब जेल की सलाखों के पीछे काटने होंगे। यह खबर इस समय सोशल मीडिया और न्यूज़ सर्कल्स में 'इंसाफ की जीत' के रूप में वायरल हो रही है।
क्या था वो खौफनाक मामला? (The Background)
घटना 26 जून 2024 की है, जब धमतरी जिले के मगरलोड थाना क्षेत्र (करेलीबड़ी चौकी) में एक नाबालिग बालिका के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया था। पुलिस ने तुरंत अपराध क्रमांक 150/24 दर्ज किया, जिसमें भादवि की धारा 363, 366, 376(2)(ढ) और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) की धारा 04 व 06 जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई थीं। मामला बेहद संवेदनशील था और पूरे क्षेत्र में आक्रोश था।
एसपी सूरज सिंह परिहार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति
धमतरी एसपी श्री सूरज सिंह परिहार ने पदभार संभालते ही स्पष्ट कर दिया था कि महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों में रत्ती भर भी ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने तत्कालीन चौकी प्रभारी उप निरीक्षक अजय सिंह को व्यक्तिगत रूप से इस केस की 'सटीक और वैज्ञानिक' विवेचना के निर्देश दिए।
विवेचना का 'मास्टरस्ट्रोक': कैसे बुना सबूतों का जाल?
पुलिस ने इस मामले में केवल मौखिक गवाहों पर भरोसा नहीं किया, बल्कि तकनीकी और फॉरेंसिक साक्ष्यों को आधार बनाया:
वैज्ञानिक साक्ष्य: घटनास्थल से मिले हर सूक्ष्म प्रमाण को सुरक्षित कर डीएनए जांच के लिए भेजा गया।
डिजिटल फुटप्रिंट्स: आरोपी के लोकेशन और मोबाइल डेटा का उपयोग कर उसे वारदात से सीधे जोड़ा गया।
त्वरित चार्जशीट: पुलिस ने रिकॉर्ड समय में कोर्ट में चालान पेश किया, जिससे कानूनी प्रक्रिया में तेजी आई।
अदालत का फैसला: 20 साल का सश्रम कारावास
माननीय अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) धमतरी ने मामले की सुनवाई के बाद आरोपी शिवकुमार उर्फ शिवा यादव (23 वर्ष, निवासी रायपुर) को दोषी करार दिया। अदालत ने उसे 20 वर्ष के सश्रम कारावास और 5,000/- रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में इसे समाज के खिलाफ एक गंभीर अपराध माना।
'रियल हीरो' का सम्मान और खाकी का गौरव
इस समाचार का सबसे प्रेरक हिस्सा तब सामने आया जब एसपी धमतरी ने बेहतरीन कार्य करने वाले अपने अधिकारी को सम्मानित किया। उत्कृष्ट विवेचना के लिए उप निरीक्षक अजय सिंह को उनकी सेवा पुस्तिका (Service Book) में प्रशंसा-प्रविष्टि के साथ 500/- रुपये का नगद पुरस्कार प्रदान किया गया।
यह सम्मान सिर्फ एक पुलिसकर्मी का नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था का है जिसने हार न मानते हुए एक मासूम को इंसाफ दिलाया। एसपी धमतरी की इस पहल से पुलिस विभाग के निचले स्तर के कर्मचारियों में भी 'बेहतर पुलिसिंग' का जज्बा पैदा हुआ है।
अपराधियों के लिए स्पष्ट संदेश
धमतरी पुलिस की यह कार्यवाही साबित करती है कि यदि पुलिस ठान ले, तो कोई भी अपराधी कानून की गिरफ्त से बच नहीं सकता। आज धमतरी के हर नागरिक की जुबान पर पुलिस की इस सक्रियता और न्याय की इस जीत की चर्चा है।








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