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​धमतरी में 'अग्नि-कांड': 50 एकड़ में बिछी राख की चादर, तबाही देख आपस में ही उलझ पड़े दाने-दाने को मोहताज किसान


धमतरी |

धमतरी के बोड़रा क्षेत्र में गुरुवार की दोपहर कुदरत का नहीं, बल्कि 'इंसानी लापरवाही' का कहर बरपा। धधकती लपटों ने देखते ही देखते 50 एकड़ में लहलहाती उम्मीदों को काले धुएं में बदल दिया। जब मेहनत जलकर खाक हुई, तो सिसकते किसानों का सब्र टूट गया और ग्रामीण किसान आपस में ही उलझ पड़े। खेत की आग तो बुझ गई, लेकिन बर्बादी के इस मंजर ने गांव में तनाव की एक नई चिंगारी सुलगा दी है।

तबाही का हिसाब: राख हुई साल भर की मेहनत

दोपहर के सन्नाटे को चीरती आग की लपटों ने बोड़रा के खेतों को अपना निशाना बनाया। इस भीषण अग्निकांड में किसानों का सबसे बड़ा सहारा छिन गया है:

चना: लगभग 5 एकड़ में लगी चना की तैयार फसल, जो कटने की कगार पर थी, अब सिर्फ काली राख बन चुकी है।

सरसों: करीब 2 एकड़ में फैली सरसों की पीली चादर आग की भेंट चढ़ गई।

पैरावट: बेजुबान मवेशियों के निवाले पर भी संकट खड़ा हो गया है; 50 से अधिक पैरावट जलकर स्वाहा हो चुके हैं।

जब खेत जलने लगे, तो अपनों से ही भिड़ गए किसान

आग बुझाने की जद्दोजहद के बीच बोड़रा के खेतों में अजीबोगरीब स्थिति निर्मित हो गई। एक तरफ आग की लपटें थीं, तो दूसरी तरफ नुकसान से उपजा गुस्सा। ग्रामीण किसान आपस में उलझ गए; बहस इस बात पर छिड़ी कि आग किसकी लापरवाही से फैली और अब इस तबाही का जिम्मेदार कौन है? ट्रैक्टर, बोरी और पानी लेकर पहुंचे ग्रामीणों के बीच काफी देर तक तनातनी चलती रही, जिसे बाद में समझाइश देकर शांत कराया गया।

"हमारी 4 महीने की खून-पसीने की मेहनत आंखों के सामने जल गई। चना, सरसों और पैरावट... सब कुछ खत्म हो गया। अब शासन ही हमारा आखिरी सहारा है, हम मुआवजे की मांग करते हैं।"

— गंगाराम साहू, पीड़ित किसान

साजिश या लापरवाही? सरपंच का बड़ा दावा

गांव के सरपंच प्रीतम साहू ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि दोपहर 1 से 2 बजे के बीच किसी अनजान शख्स ने जानबूझकर खेतों में आग लगाई और फरार हो गया। ग्रामीणों ने अपनी जान पर खेलकर और ट्रैक्टर चलाकर आग को आगे बढ़ने से रोका, वरना पूरा इलाका श्मशान बन जाता।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

अब गेंद प्रशासन के पाले में है। क्या उन बेगुनाह किसानों को मुआवजा मिलेगा जिनकी फसलें राख हो गईं? और उस 'अज्ञात' चेहरे का क्या, जिसने हंसते-खेलते खेतों को मातम में बदल दिया? पूरा बोड़रा क्षेत्र अब न्याय और आर्थिक सहायता की गुहार लगा रहा है।

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