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धमतरी में सरेराह चमकता 'खौफ': पुलिस की कड़ाई के बीच क्या 'जागरूकता की पाठशाला' है समय की मांग?

धमतरी। जिले में शांति और सुरक्षा का दावा करने वाली खाकी जब सड़कों पर मुस्तैद दिखती है, तब अपराधी सलाखों के पीछे पहुंचते हैं। ताजा मामला मगरलोड के मेघा मड़ाई का है, जहाँ एक युवक द्वारा सार्वजनिक स्थान पर धारदार चाकू लहराकर दहशत फैलाने की कोशिश को पुलिस ने नाकाम कर दिया। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ गिरफ्तारियां काफी हैं? या फिर धमतरी की सड़कों पर बढ़ती इस 'धार' को कुंद करने के लिए सामाजिक चेतना की नई पाठशाला की जरूरत है?

​ मड़ाई की भीड़ में लहराया 'मौत का सामान'

​एसपी धमतरी के कड़े निर्देशों के पालन में जिले भर में गुंडा-बदमाशों के विरुद्ध अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में मगरलोड पुलिस की टीम ग्राम मेघा मड़ाई स्थल पर गश्त कर रही थी। बाजार चौक की भीड़भाड़ के बीच एक 19 वर्षीय युवक, वेदप्रकाश विभार, खुलेआम 10.7 इंच लंबा आरीनुमा धारदार चाकू लहरा रहा था।

​पुलिस ने त्वरित कार्यवाही करते हुए आरोपी को दबोचा और उसके पास से वह घातक हथियार जप्त किया। आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट की धारा 25, 27 के तहत मामला दर्ज कर उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

​ क्यों 'आम' हो गई है चाकूबाजी?

​धमतरी जिले में पिछले कुछ समय से चाकूबाजी की घटनाएं जिस तरह से बढ़ी हैं, वह प्रशासन और नागरिक समाज दोनों के लिए चिंता का विषय है। 19-20 साल के युवाओं के हाथों में किताबों के बजाय खंजर का होना एक गहरे सामाजिक पतन की ओर इशारा करता है।

मुख्य चिंताएं:

सुलभ उपलब्धता: ऑनलाइन शॉपिंग और स्थानीय बाजारों में बिना किसी रिकॉर्ड के ऐसे घातक हथियारों का मिलना अपराध को बढ़ावा दे रहा है।

सोशल मीडिया का प्रभाव: रील संस्कृति और 'भाईगिरी' दिखाने के चक्कर में युवा अपराध की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

डर का अभाव: हालांकि पुलिस कार्यवाही कर रही है, लेकिन अपराधियों में कानून का वह खौफ नजर नहीं आता जो उन्हें अपराध करने से पहले सोचने पर मजबूर करे।

​समय की मांग: 'जागरूकता की पाठशाला' कब?

​सिर्फ जेल भेजने से अपराधी सुधरेंगे, इसकी गारंटी नहीं है। शासन-प्रशासन को अब 'प्रिवेंटिव एक्शन' (निवारक कार्यवाही) पर ध्यान देना होगा।

शैक्षणिक संस्थानों में संवाद: स्कूलों और कॉलेजों में पुलिस और मनोवैज्ञानिकों के माध्यम से 'एंटी-क्राइम' वर्कशॉप आयोजित होनी चाहिए।

हथियारों की बिक्री पर सख्त निगरानी: क्या प्रशासन उन दुकानों पर शिकंजा कसेगा जहाँ से ये 'आरीनुमा' चाकू खरीदे जा रहे हैं?

सामाजिक बहिष्कार: मोहल्ला समितियों और ग्राम पंचायतों को ऐसे तत्वों की सूचना देने के साथ-साथ उनके सामाजिक सुधार पर भी जोर देना होगा।

​पुलिस की अपील

​धमतरी पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल दें। सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा। पुलिस का यह कदम सराहनीय है, लेकिन जनता को भी 'मूकदर्शक' बनने के बजाय 'जागरूक नागरिक' की भूमिका निभानी होगी।

मेघा की घटना ने एक बार फिर प्रशासन को आगाह किया है। पुलिस की सक्रियता से एक बड़ी अनहोनी तो टल गई, लेकिन जब तक धमतरी के युवाओं के जहन से 'चाकू संस्कृति' का नशा नहीं उतरेगा, तब तक शांति की बात बेमानी होगी। अब देखना यह है कि क्या शासन 'जागरूकता की पाठशाला' का बिगुल फूँकता है या व्यवस्था यूँ ही 'पकड़ो और जेल भेजो' के ढर्रे पर चलती रहेगी।

​ अपराध मुक्त समाज के लिए पुलिस की लाठी और समाज की सोच, दोनों का सही दिशा में होना अनिवार्य है।

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