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भखारा के विकास का 'रजिस्ट्री' मॉडल; विधायक अजय चंद्राकर की दूरदर्शिता ने दिलाई उप-पंजीयक कार्यालय को मंजूरी


"ऐतिहासिक उपलब्धि: भखारा को मिली उप-पंजीयक कार्यालय की मंजूरी। विधायक अजय चंद्राकर के विजन और नगर पंचायत अध्यक्ष ज्योति हरखचंद जैन की सक्रियता से क्षेत्र के 73 गांवों को मिली बड़ी राहत।"
"ऐतिहासिक उपलब्धि: भखारा को मिली उप-पंजीयक कार्यालय की मंजूरी। विधायक अजय चंद्राकर के विजन और नगर पंचायत अध्यक्ष ज्योति हरखचंद जैन की सक्रियता से क्षेत्र के 73 गांवों को मिली बड़ी राहत।"

भखारा (धमतरी):

छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक इतिहास में कुछ फैसले केवल फाइलों का हिस्सा नहीं होते, बल्कि वे आम आदमी के संघर्ष को समाप्त करने का जरिया बनते हैं। धमतरी जिले की भखारा तहसील के लिए आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। कुरुद विधायक अजय चंद्राकर की 'पॉलिसी ऑफ प्रॉक्सिमिटी' (जनता के करीब प्रशासन) के विजन को बड़ी जीत मिली है। राज्य सरकार ने भखारा में स्वतंत्र उप-पंजीयक कार्यालय की स्थापना को हरी झंडी देकर क्षेत्र के सवा लाख लोगों को जिला मुख्यालय की 'थकाऊ दौड़' से परमानेंट आजादी दे दी है।

लॉजिक और इम्पैक्ट: क्यों खास है यह फैसला?

यह केवल एक नया दफ्तर नहीं, बल्कि भखारा की इकोनॉमिक लाइफलाइन में सुधार है। इसके तीन मुख्य स्तंभ हैं:

प्रशासनिक विकेंद्रीकरण: 2018 में जिस भखारा को तहसील बनाया गया था, उसे अब पूर्ण प्रशासनिक स्वायत्तता मिली है। अब जमीन की खरीद-बिक्री से लेकर अन्य कानूनी पंजीयन के लिए ग्रामीणों को 30-40 किमी दूर नहीं भटकना होगा।

समय बनाम लागत का गणित: तहसील की 52 पंचायतों और 73 गांवों के किसानों और व्यापारियों का सालाना लाखों का ट्रांसपोर्ट खर्च और हजारों घंटों का समय बचेगा।

पारदर्शिता का डिजिटल कवच: वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के नेतृत्व में विभाग द्वारा शुरू किए गए '10 टेक-नवाचार' (जैसे ऑटो डीड जनरेशन और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन) अब सीधे भखारा के केंद्र में संचालित होंगे, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी।

डेटा की जुबानी: भखारा का उभरता कद

भखारा की विशालता और इस कार्यालय की जरूरत को ये आंकड़े प्रमाणित करते हैं:

जनसंख्या का दबाव: 1,09,283 से अधिक की आबादी का सीधा जुड़ाव।

राजस्व का आधार: 28,483.57 हेक्टेयर का विशाल क्षेत्रफल।

प्रशासनिक नेटवर्क: 6 राजस्व निरीक्षक मंडल और 28 पटवारी हलके (विशेषकर भखारा और भठेली क्षेत्र के 20 प्रमुख गांव)।

साक्षरता: 74.31% की जागरूक आबादी, जिसे अब आधुनिक डिजिटल रजिस्ट्री सेवाओं का सीधा लाभ मिलेगा।

राजनीतिक इच्छाशक्ति: डॉ. रमन से साय सरकार तक का सफर

इस उपलब्धि के पीछे एक लंबा कालखंड है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने विधायक अजय चंद्राकर की मांग पर भखारा को तहसील बनाने की नींव रखी थी। अब विष्णुदेव साय सरकार ने इसे उप-पंजीयक कार्यालय की स्वीकृति देकर उस विकास यात्रा को पूर्णता प्रदान की है।

नगर पंचायत अध्यक्ष ने जताया आभार: "यह जनता के भरोसे की जीत"

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर नगर पंचायत अध्यक्ष ज्योति हरखचंद जैन ने हर्ष व्यक्त करते हुए इसे क्षेत्र के लिए स्वर्णिम अवसर बताया है। उन्होंने कहा कि—

"भखारा को तहसील बनाने से लेकर अब उप-पंजीयक कार्यालय की सौगात तक, विधायक अजय चंद्राकर जी ने हमेशा क्षेत्र की जरूरतों को प्राथमिकता दी है। इस कार्यालय के खुलने से हमारी माताओं, बहनों और किसानों को रजिस्ट्री के लिए अब भटकना नहीं पड़ेगा। यह सुशासन का असली मॉडल है।"

इस खुशी के मौके पर विधायक प्रतिनिधि हरख जैन, उपाध्यक्ष विष्णु साहू और समस्त पार्षदों ने भी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधायक अजय चंद्राकर का आभार व्यक्त किया है।


सुशासन का नया अध्याय

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का स्पष्ट संदेश है—"प्रशासन वहां, जहां जनता है।" भखारा में इस कार्यालय का खुलना न केवल रजिस्ट्री की प्रक्रिया को सुगम बनाएगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर स्टैंप वेंडर्स, वकील और कंप्यूटर ऑपरेटरों जैसे छोटे रोजगारों के नए द्वार भी खोलेगा।

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