मौरीकला की पावन माटी से 'महाशक्ति' बनने का संकल्प: संतों की तपोभूमि अब उगल रही राष्ट्रवीर
- moolchand sinha

- 1 day ago
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[ब्यूरो रिपोर्ट | धमतरी]
धमतरी जिले का ग्राम मौरीकला आज पूरे क्षेत्र के लिए राष्ट्रभक्ति का एक जीवंत उदाहरण पेश कर रहा है। यह वह पावन भूमि है जिसकी पहचान कभी संत बोधानंद महाराज एवं सगुणानंद महाराज की तपस्या से थी, और आज वही पहचान यहाँ के युवाओं के फौलादी इरादों से और भी सशक्त हो रही है। प्रेरणा युवा संगठन एवं ग्राम पंचायत मौरीकला के सहयोग से जय बजरंग अखाड़ा मौरीकला (गुफा) द्वारा संचालित "गांव से सेना-पुलिस भर्ती अभियान" ने एक ऐसी क्रांति छेड़ दी है, जिसकी गूंज अब आसपास के जिलों तक सुनाई दे रही है।
आध्यात्मिक गौरव: जहाँ की 'भभूति' में बसती है बरकत
मौरीकला की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक मान्यता प्रगाढ़ है। जनश्रुति है कि यह भूमि सिद्ध संतों की साधना स्थली रही है और यहाँ की पावन भभूति के बिना दीपावली पर मां लक्ष्मी की पूजा अधूरी मानी जाती थी। आज उसी पावन धरा की धूल को माथे पर लगाकर क्षेत्र के युवा सुबह की पहली किरण के साथ राष्ट्रसेवा का संकल्प ले रहे हैं। संतों की तपोभूमि पर पसीना बहाते इन युवाओं का लक्ष्य स्पष्ट है— मातृभूमि की रक्षा के लिए खुद को समर्पित करना।
संसाधनों को मात देता 'फौजी' जुनून
भले ही प्रशिक्षण के साधन सीमित हों, लेकिन मौरीकला के इस 'गुफा वाले अखाड़े' में जोश की कोई कमी नहीं है। इस अभियान की खास बातें इसे प्रदेश के अन्य केंद्रों से अलग बनाती हैं:
निःशुल्क फौलादी ट्रेनिंग:
आर्थिक अभाव को सपनों की दीवार नहीं बनने दिया जा रहा। यहाँ शारीरिक और लिखित दोनों स्तरों पर मुफ्त मार्गदर्शन जारी है।
अनुशासन की पाठशाला:
यहाँ केवल दौड़ना नहीं, बल्कि एक सैनिक की तरह अनुशासित जीवन जीना सिखाया जा रहा है।
नशा मुक्ति का शंखनाद:
अभियान का एक बड़ा लक्ष्य युवाओं को नशे और गलत गतिविधियों के दलदल से बाहर निकालकर उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनाना है।
लक्ष्य: 'वीर सपूतों की धरती' के रूप में पहचान
प्रतिदिन आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में युवाओं का इस अभियान से जुड़ना यह साबित करता है कि मौरीकला अब भारतीय सेना और पुलिस बल में शामिल होने वाले जांबाजों की 'नर्सरी' बन चुका है। युवाओं का अटूट विश्वास है कि उनकी निरंतर मेहनत और संकल्प के बल पर आने वाले समय में यह पूरा इलाका 'वीर सपूतों की धरती' के रूप में विश्वविख्यात होगा।
"हमारा प्रयास है कि मौरीकला के नाम के साथ 'वीरों की भूमि' का गौरव जुड़े। जिस तरह यहाँ की भभूति पावन मानी जाती है, उसी तरह यहाँ का प्रशिक्षित हर युवा देश के लिए स्वाभिमान बनेगा।" — अभियान संचालक, जय बजरंग अखाड़ा






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