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धमतरी का 'खिसोरा'—आजादी के परवानों की मिट्टी से निकले तीन नए 'रणबांकुरे'


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धमतरी (छत्तीसगढ़) |

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले का एक छोटा सा गाँव खिसोरा, भारतीय मानचित्र पर अपनी एक अलग पहचान रखता है। यह केवल एक गाँव नहीं, बल्कि 'स्वतंत्रता संग्राम' की एक जीवित नर्सरी है। जिस मिट्टी ने कभी अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाले आधा दर्जन 'सुराजी सिपाही' (फ्रीडम फाइटर) पैदा किए, आज उसी मिट्टी के तीन और लाल—केवेन्द्र साहू, रोशन कश्यप और चंद्रशेखर नागरची—देश की सीमाओं पर अभेद दीवार बनने जा रहे हैं।

विरासत का नया अध्याय: 'सुराजी' पूर्वजों की परंपरा

खिसोरा के इतिहास में देशभक्ति का डीएनए रची-बसी है। आजादी के आंदोलन के दौरान यहाँ के बुजुर्गों ने जेलें काटीं और संघर्ष किया। अब उसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए इन युवाओं का CRPF (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) में चयन होना यह साबित करता है कि खिसोरा के रगों में आज भी वही 'क्रांतिकारी लहू' दौड़ रहा है।

"गाँव की पगडंडियों से दिल्ली की पैरामिलिट्री फोर्स तक का यह सफर केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि उन पूर्वज स्वतंत्रता सेनानियों को एक सच्ची श्रद्धांजलि है।"

14 फरवरी: जब 'मोहब्बत' का मतलब 'वतन' हो गया

जहाँ पूरी दुनिया इस दिन को वैलेंटाइन डे के रूप में मना रही थी, वहीं खिसोरा के गांधी चौक में नजारा कुछ और ही था। मातृभूमि अधिकारी कर्मचारी संगठन के तत्वावधान में आयोजित 'सैनिक सम्मान समारोह' ने यह संदेश दिया कि देश से बढ़कर कोई महबूब नहीं होता।

गूँजते नारे: आकाश 'भारत माता की जय' और 'जय जवान-जय किसान' के उद्घोष से गुंजायमान था।

भावुक पल: जब सेना की ट्रेनिंग पूरी कर लौटे जवानों का तिलक लगाकर अभिनंदन किया गया, तो हर ग्रामीण की आँखें गर्व से नम थीं।

मंच से उठी 'नशा मुक्त भारत' की पुकार

समारोह की अध्यक्षता कर रही सरपंच श्रीमती राखी साहू ने युवाओं के सामने एक गंभीर चुनौती रखी। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं के लिए 'नशा' सबसे बड़ा दुश्मन है। उन्होंने आह्वान किया कि अगर खिसोरा का मान बढ़ाना है, तो युवाओं को नशे की गिरफ्त से बाहर निकलकर इन तीन वीर जवानों की तरह 'देश की ढाल' बनना होगा।

दिग्गजों का मार्गदर्शन: "यह सम्मान हर वर्दी का है"

अखिल भारतीय भूतपूर्व सैनिक सेवा परिषद के अध्यक्ष श्री के.पी. साहू और सूबेदार टी.के. साहू ने अपने संबोधन में कहा कि यह सम्मान केवल मंच पर बैठे चंद लोगों का नहीं, बल्कि सियाचिन से लेकर कच्छ के रण तक तैनात हर उस भारतीय सैनिक का है, जो सर्दी-गर्मी की परवाह किए बिना डटा है।

कार्यक्रम के सूत्रधार और गणमान्य

नाम भूमिका / संगठन

उत्तम कुमार साहू अध्यक्ष, अधिकारी कर्मचारी संगठन (आभार प्रदर्शन)

हरिशंकर पटेल शिक्षक (सफल मंच संचालन)

रूपेंद्र, लक्षण, चमनलाल भूतपूर्व सैनिक (प्रेरक उपस्थिति)

जहाँ देशभक्ति एक संस्कार है

खिसोरा का यह आयोजन उन तमाम गाँवों के लिए एक मिसाल है जो अपनी जड़ों और अपने हीरों को भूल जाते हैं। फ्रीडम फाइटर गाँव की इस नई पीढ़ी ने बता दिया है कि वक्त बदल सकता है, लेकिन वतन के लिए मर-मिटने का जज्बा कभी पुराना नहीं होता।

रिपोर्टिंग - विजय दीप

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