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मगरलोड शिक्षाकर्मी भर्ती फर्जीवाड़ा: 17 साल बाद 'न्याय' का प्रहार, 8 प्रधानपाठक बर्खास्त

धमतरी: "झूठ की नींव पर खड़ी नौकरी की दीवार आखिरकार ढह गई।" छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के मगरलोड जनपद पंचायत में वर्ष 2007 में हुए बहुचर्चित शिक्षाकर्मी भर्ती फर्जीवाड़े में प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने फर्जी तरीके से नियुक्तियां पाने वाले और पदोन्नत होकर प्रधानपाठक बन चुके 8 शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है।

भूमिका: भ्रष्टाचार का वो काला अध्याय

​मामला साल 2007 का है, जब जनपद पंचायत मगरलोड में वर्ग-तीन के शिक्षाकर्मियों की भर्ती निकाली गई थी। उस वक्त नियमों को ताक पर रखकर अपात्रों को रेवड़ियों की तरह नौकरियां बांटी गई थीं। स्वीकृत 150 पदों के विरुद्ध 172 लोगों को नियुक्ति पत्र जारी कर दिए गए थे। यह खेल इतना शातिर था कि किसी के अंकों में हेराफेरी की गई, तो किसी ने स्काउट-गाइड और अनुभव के फर्जी प्रमाण पत्रों का सहारा लिया।

खुलासा और संघर्ष: एक ग्रामीण की जिद लाई रंग

​भ्रष्टाचार के इस गहरे राज से पर्दा साल 2011 में उठा, जब ग्राम चंदना निवासी कृष्ण कुमार साहू ने सूचना के अधिकार और प्रमाणित दस्तावेजों के साथ इस काले खेल को उजागर किया। उनकी शिकायत ने प्रशासन की नींद उड़ा दी। जांच की परतें जैसे-जैसे खुलीं, वैसे-वैसे चयन समिति, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत सामने आती गई।

जांच का सफर: CID और पुलिस की दबिश

​इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 2019 में तत्कालीन कलेक्टर ने जांच CID को सौंपने की सिफारिश की थी।

  • 105 आरोपी: पुलिस ने इस घोटाले में कुल 105 लोगों को आरोपी बनाया था।

  • शामिल चेहरे: इनमें 4 तत्कालीन अधिकारी (CEO सहित), 7 जनप्रतिनिधि (अध्यक्ष/उपाध्यक्ष) और बाकी शिक्षाकर्मी शामिल थे।

  • हालिया गिरफ्तारियां: तीन माह पूर्व ही पुलिस ने दो शिक्षाकर्मियों और एक पूर्व जनपद उपाध्यक्ष को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, जिसके बाद हड़कंप मच गया था।

कार्रवाई का विवरण: किन पर गिरी गाज?

​जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) अभय जायसवाल ने पुष्टि की है कि लोक शिक्षण संचालनालय के आदेश पर निम्नलिखित प्रधानपाठकों की सेवा समाप्त कर दी गई है:

हरिशंकर साहू (प्रा.शा. चटरीजाहरा, नगरी)

पुनम सीनयानी (प्रा.शा. करमाटी, नगरी)

हेमंत कुमार साहू (प्रा.शा. करेली छोटी, मगरलोड)

लता साहू (प्रा.शा. खिसोरा, मगरलोड)

श्रीमती युकेश (भांठापारा, मगरलोड)

मंजु खुटेर (प्रा.शा. भरदा, मगरलोड)

ईश्वरी निर्मलकर (सोनारिनदैहान, मगरलोड)

लखनलाल साहू (निलंबित - प्रा.शा. विश्रामपुर, धमतरी)

कर्मों का हिसाब और सबक

​इस मामले में अब तक 28 शिक्षाकर्मियों को न्यायालय से सजा मिल चुकी है। भ्रष्टाचार के इस दलदल में फंसे 15 आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि कई पहले ही त्यागपत्र देकर भाग चुके हैं।

 17 साल का लंबा वक्त जरूर लगा, लेकिन इस बर्खास्तगी आदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शासन और प्रशासन में धांधली करने वालों का भविष्य अंधकारमय ही होता है। फर्जीवाड़े के दम पर सरकारी खजाने से वेतन उठाने वाले इन 'गुरुओं' की विदाई ने उन तमाम युवाओं को उम्मीद दी है जो ईमानदारी से अपनी बारी का इंतजार करते हैं। मगरलोड का यह मामला प्रदेश के अन्य भर्ती घोटालों के लिए एक नजीर बन गया है।

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