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मड़ई मेले में खूनी खेल: 4 दिन बाद भी FIR नहीं, ICU में जिंदगी की जंग लड़ रहा युवक, समाज में आक्रोश


कुरूद: 

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के कुरूद में आयोजित पारंपरिक मड़ई मेले का उल्लास उस वक्त चीख-पुकार में बदल गया, जब एक युवक पर जानलेवा हमला कर दिया गया। घटना के चार दिन (100 घंटे) बाद भी पुलिस द्वारा प्राथमिकी (FIR) दर्ज न किए जाने से क्षेत्र का माहौल तनावपूर्ण हो गया है। पीड़ित रामानंद ध्रुव वर्तमान में जिला चिकित्सालय धमतरी के ICU में वेंटिलेटर पर अपनी आखिरी सांसों के लिए संघर्ष कर रहा है।

​मोबाइल विवाद ने लिया खूनी मोड़

​घटना 20 दिसंबर 2025 (शनिवार) की रात ग्राम डाही की है। बताया जा रहा है कि मेले के दौरान मोबाइल फोन को लेकर हुए मामूली विवाद ने अचानक तूल पकड़ लिया। आरोपियों ने एक सोची-समझी साजिश के तहत रामानंद ध्रुव को चारों तरफ से घेर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हमलावरों ने लोहे की रॉड, मुक्कों और धारदार चाकू से युवक के शरीर के कई अंगों पर गंभीर प्रहार किए। बीच-बचाव करने आए साथी तुषार सेन पर भी चाकू से वार किया गया, जिससे वह भी घायल हो गया।

​प्रशासन की 'चुप्पी' पर उठे सवाल

​पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के चार दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस प्रशासन गहरी नींद में है। परिजनों ने निम्नलिखित गंभीर सवाल उठाए हैं:

  • FIR में देरी क्यों? घटना के 4 दिन बाद भी आधिकारिक रिपोर्ट दर्ज क्यों नहीं हुई?

  • बयान दर्ज नहीं: क्या पुलिस जानबूझकर पीड़ित का बयान लेने में देरी कर रही है?

  • दबाव की राजनीति: क्या आरोपियों को किसी राजनीतिक या रसूखदार व्यक्ति का संरक्षण प्राप्त है?

आदिवासी समाज की बड़ी चेतावनी

​इस घटना ने सामाजिक और राजनीतिक मोड़ ले लिया है। सर्व आदिवासी समाज और गोंड समाज के पदाधिकारियों ने कुरूद थाना प्रभारी चंद्रकांत साहू का घेराव किया।

जीराखन लाल मरई (जिला अध्यक्ष) और देवनाथ नेताम (तहसील अध्यक्ष) ने स्पष्ट कहा कि यदि आरोपियों पर ST/SC एक्ट और हत्या के प्रयास (Section 307) के तहत तत्काल कार्रवाई नहीं हुई, तो पूरा समाज सड़कों पर उतरकर चक्काजाम करेगा।

​इस मांग का समर्थन ललित ठाकुर, तेजराम छेदैया बसंत ध्रुव और संतोष सोरी सहित दर्जनों समाजसेवियों ने किया है।

​पुलिस का बयान: केवल 'आश्वासन' या 'कार्रवाई'?

​मामले की गंभीरता को देखते हुए कुरूद टीआई चंद्रकांत साहू ने कहा है:

​"हमने पीड़ित को बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा है। मामले में सूक्ष्मता से जांच की जा रही है और नियमतः सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"


न्याय की गुहार

​एक तरफ धमतरी पुलिस 'मित्र पुलिस' होने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर एक आदिवासी युवक के लहूलुहान होने के बाद भी FIR के लिए चार दिन का इंतजार सिस्टम की नाकामी को दर्शाता है। डाही मड़ई मेले की यह घटना अब महज एक अपराध नहीं, बल्कि न्याय और प्रशासन के बीच की लड़ाई बन चुकी है। ग्रामीणों और समाज का एक ही स्वर है— "जब तक गिरफ्तारी नहीं, तब तक चैन नहीं।"

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