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युवाओं का कमाल – गाँव की सोच अब बदल रही है! सिर्री स्कूल के पूर्व छात्रों ने मिलकर रच दिया अनोखा इतिहास



(सिर्री स्कूल में जनसहयोग से बनेगा 4 लाख रुपये की लागत का डिजिटल क्लासरूम और ई–लायब्रेरी, साथ ही डेढ़ लाख का बास्केटबॉल कोर्ट)

सिर्री/कुरूद।


जहाँ आमतौर पर लोग “सिस्टम खराब है”, “सरकार कुछ नहीं करती” कहकर हाथ खड़े कर देते हैं—उसी समाज में सिर्री स्कूल के युवा पूर्व छात्रों ने यह साबित कर दिया है कि परिवर्तन का रास्ता सरकार से नहीं, हमारी पहल से शुरू होता है।


4 जनवरी को होने वाले पूर्व छात्र सम्मेलन के लिए तैयारियाँ जोरों पर हैं। इसी सिलसिले में एक शिक्षक साथी और युवाओं की टीम रोज़ शाम को स्कूल से लौटने के बाद आसपास के गाँवों में जाकर पूर्व छात्रों को जोड़ने का अभियान चला रहे हैं। सभा, बैठकें, व्यक्तिगत मुलाकातें… हर माध्यम से वे समाज को अपने स्कूल की बेहतरी का भागीदार बना रहे हैं।


लक्ष्य बड़ा—जज़्बा उससे भी बड़ा


युवाओं ने संकल्प लिया है कि सिर्री स्कूल में

➡️ 4 लाख रुपये का अत्याधुनिक डिजिटल क्लासरूम

➡️ ई–लायब्रेरी

➡️ और अलग से डेढ़ लाख रुपये का बास्केटबॉल कोर्ट

तैयार किया जाएगा।


सबसे खूबसूरत बात—इस अभियान में आगे केवल पढ़े-लिखे या नौकरीपेशा लोग ही नहीं आ रहे, बल्कि किसान परिवारों से लेकर मेहनतकश वर्ग तक, हर कोई अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए सहयोग दे रहा है।


गुमनाम दानदाता ने किया सभी को चकित


एक व्यक्ति ने स्वयं फोन करके 50,000 रुपये का गुप्त दान दिया और कहा—

“अगली जरूरत पड़े तो मैं अकेले पूरा कर दूंगा। गाँव के इस स्कूल ने जो दिया, उसे अब लौटाना मेरी जिम्मेदारी है।”


ऐसी कृतज्ञता और समाज भावना ही किसी भी क्षेत्र की असली ताकत होती है।


संदेश साफ़ है—परिवर्तन करना हो, तो शुरुआत ‘हम’ से होती है


हम अक्सर कहते हैं कि हालात बदलें… लेकिन सच यह है कि हम ही स्कूलों को प्राथमिकता नहीं देते।

नहीं तो आज स्थिति कहीं बेहतर होती।

सिर्री के युवाओं ने यह दिखा दिया है कि सोच सकारात्मक हो और कदम आगे बढ़े—तो असंभव भी संभव हो जाता है।


युवाओं का यह प्रेरक प्रयास न केवल समाज को नई दिशा देगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव भी रखेगा।


आलेख – विजय दीप

सहायक प्राध्यापक, कुरूद महाविद्यालय

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