संस्कारों की परेड: सरहद पर जाने से पहले माता-पिता के चरणों में झुका भावी सैनिक का शीश
- moolchand sinha

- 11 hours ago
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कुरूद।
मौरीकला की मिट्टी से एक ऐसी तस्वीर उभरने वाली है, जो आधुनिकता की चकाचौंध के बीच भारतीय संस्कारों की नई परिभाषा लिखेगी। 14 फरवरी को जब पूरी दुनिया वेलेंटाइन डे की तैयारी में होगी, तब जय बजरंग अखाड़ा का वीर बेटा कमलेश कुमार साहू अपनी 'विदाई रैली' से पहले अपने माता-पिता का पूजन कर दुनिया को बताएगा कि एक सैनिक के लिए देश के बाद उसका सबसे बड़ा तीर्थ उसके माता-पिता हैं।
समाचार विस्तार: जब देश-भक्ति और पितृ-भक्ति का होगा मिलन
विदाई की पहली शर्त: माता-पिता का आशीर्वाद
सेना और पुलिस भर्ती के कठिन रास्तों को पार करने वाले कमलेश साहू का मानना है कि वर्दी तक पहुँचने की शक्ति उन्हें अपने माता-पिता के संघर्षों से मिली है। 14 फरवरी को 'मातृ-पितृ पूजन दिवस' के अवसर पर, वह विशेष समारोह में अपने माता-पिता की आरती उतारेंगे और उनके आशीर्वाद को रक्षा कवच के रूप में धारण करेंगे।
पुलवामा के शहीदों के नाम 'एक शाम, एक सलाम'
यह आयोजन सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि एक प्रतिज्ञा है। विदाई रैली की शुरुआत उन अमर बलिदानियों को याद करते हुए होगी जिन्होंने पुलवामा में तिरंगे की शान के लिए प्राण दिए। 2 मिनट का मौन केवल शांति नहीं, बल्कि आने वाले कल के सैनिकों के लिए साहस का संकल्प होगा।
मौरीकला का ऐतिहासिक संदेश
जय बजरंग अखाड़ा (गुफा) द्वारा आयोजित यह विदाई रैली गाँव के युवाओं को यह संदेश देगी कि राष्ट्र की रक्षा वही कर सकता है जिसके भीतर अपनों के प्रति सम्मान और संस्कार जीवित हैं। विदाई का यह 'ऐतिहासिक दिन' गाँव के गौरव और संस्कृति का प्रतीक बनेगा।
तगड़ा समाचार सार (News Snippet)
नायक: कमलेश कुमार साहू (जय बजरंग अखाड़ा, मौरीकला)
प्रसंग: सेना/पुलिस सेवा हेतु विदाई एवं सम्मान समारोह।
विशेष केंद्र: मातृ-पितृ पूजन — माता-पिता के आशीर्वाद से शुरू होगा देश सेवा का सफर।
Key Highlights
ऐतिहासिक संगम: एक ही दिन शहादत को नमन, माता-पिता का वंदन और वीर की विदाई।
प्रेरणा का स्रोत: मौरीकला के युवाओं के लिए सेना में भर्ती होने का एक नया जुनून।
सामुदायिक एकता: जय बजरंग अखाड़ा (गुफा) द्वारा आयोजित एक भव्य विदाई समारोह।
"जब बेटा सरहद की ओर बढ़ता है,
तो पूरा गाँव उसकी ढाल बन जाता है। कमलेश की विदाई हमें याद दिलाती है कि देश सबसे ऊपर है।" — ग्रामवासी, मौरीकलाद्धांजलि: पुलवामा के शहीदों को समर्पित मौन एवं वंदन।
डिजिटल तड़का: सोशल मीडिया के लिए 'अपील'
"माँ की ममता का आँचल, पिता के कंधों का मान,
इन्हीं की बदौलत खड़ा है आज, तिरंगे का नया निगहबान!"
मौरीकला की गलियों से एक संदेश: आइए,
संस्कारों की इस पावन बेला के साक्षी बनें। जहाँ एक बेटा अपनी खुशियाँ वतन पर न्योछावर करने निकल रहा है, सबसे पहले अपने माता-पिता के चरणों में स्वर्ग ढूँढने के बाद।







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