सिस्टम को आईना! जब सिंधौरीकला के युवाओं ने उठाया फावड़ा, तो चमक उठा गाँव का ऐतिहासिक 'बड़ा तालाब'
- moolchand sinha

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कुरूद:
कहते हैं कि अगर समाज अपनी ताकत पहचान ले, तो वह बंजर में भी फूल खिला सकता है। कुछ ऐसा ही चमत्कार धमतरी जिले के सिंधौरीकला में हुआ है। जहाँ ग्रामीण प्रशासन और बजट का इंतज़ार करने के बजाय, गाँव की युवा टोली ने अपनी बाहें चढ़ाईं और दो दिनों के भीतर गाँव के सबसे बड़े जल स्रोत 'बड़े तालाब' का कायाकल्प कर दिया। यह केवल सफाई नहीं, बल्कि जल संरक्षण के प्रति एक मौन क्रांति है।
मिशन 'जल-शुद्धि': सिंधौरीकला के युवाओं ने दो दिन में बाहर निकाला टन भर कचरा
तालाब की स्थिति ऐसी थी कि घाटों पर पैर रखना मुश्किल था, लेकिन युवाओं के जुनून के आगे गंदगी का ढेर भी टिक न सका।
पहले दिन का लक्ष्य: कीचड़ और पॉलीथिन से मुक्ति
अभियान के पहले दिन युवाओं ने तालाब के गहरे हिस्सों में उतरकर सालों से जमी पॉलीथिन, कांच की बोतलें और गंदा कचरा बाहर निकाला। इसे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर डंपिंग यार्ड भेजा गया।
दूसरे दिन का प्रहार: फसल अवशेषों का सफाया
दूसरे दिन फोकस तालाब के 'पार' (किनारों) पर था। यहाँ कुछ ग्रामीणों द्वारा जलाई गई चने की फसल के अवशेषों और फैले हुए मलबे को साफ किया गया। युवाओं ने पसीना बहाकर सुनिश्चित किया कि घाट का एक-एक कोना आईने की तरह चमके।
केवल सफाई नहीं, 'ग्रीन कॉरिडोर' बनाने की है तैयारी
सिंधौरीकला के इन 'वॉटर हीरोज' का विजन सिर्फ तालाब साफ करने तक सीमित नहीं है।
पौधों का संरक्षण: तालाब के किनारे पहले से लगे पौधों को युवाओं ने गोद लिया है और वे नियमित रूप से उन्हें पानी दे रहे हैं।
नया संकल्प: आने वाले दिनों में यहाँ फूलदार और छायादार वृक्ष लगाकर एक ऐसा कोना तैयार किया जाएगा, जहाँ ग्रामीण शुद्ध हवा के बीच सुकून के पल बिता सकें।
मीडिया के जरिए ग्रामीणों को कड़ा संदेश: "तालाब हमारी सांझा विरासत"
युवाओं ने मीडिया के माध्यम से पूरे समाज को झकझोरने वाला संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तालाब किसी एक व्यक्ति या सरकार की जागीर नहीं, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति है। यदि हम इसका उपयोग करते हैं, तो इसे स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी भी हमारी है।
इस महा-अभियान के असली नायक (Team List)
इस श्रमदान यज्ञ में अपनी आहुति देने वाले प्रमुख चेहरे:
युवा ब्रिगेड:
रामचंद्र ध्रुव, राजेश ध्रुव, केजुराम साहू, रूद्र ध्रुव, पुष्पेन्द्र ध्रुव, भुनेश्वर ध्रुव, योगेश ध्रुव, नवीन साहू, साहिल ध्रुव, हेमंत मानिकपुरी।
ग्रामीण एवं प्रशासनिक सहयोग: सरपंच दुलार साहू, पंच गुलाब साहू, समाजसेवी श्रीकांत मिश्रा, ग्राम सचिव परमेश्वर साहू, भारत साहू, भगत साहू, पूरन ध्रुव, संतराम साहू, डीहूंराम साहू, झाड़ूदास मानिकपुरी।
महिला शक्ति:
श्रीमती चितरेखा ध्रुव, पार्वती ध्रुव, उर्वशी साहू, गीता साहू और सरिता ध्रुव ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सिंधौरीकला की यह तस्वीर देखकर मन में एक ही सवाल उठता है—अगर हर गाँव के युवा ऐसे ही जाग जाएं, तो क्या भारत की नदियाँ और तालाब कभी मैली रहेंगी? सलाम है इन युवाओं के जज्बे को!




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