धमतरी साइबर ठगी: फ्री कार के चक्कर में लुटा ₹1 करोड़, 3 साल तक चला खेल
- moolchand sinha

- 4 days ago
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कुरूद (धमतरी) |
क्या कोई 'इनाम' आपकी पूरी जिंदगी की गाढ़ी कमाई निगल सकता है? छत्तीसगढ़ के "भखारा क्षेत्र में धमतरी साइबर ठगी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने सबको चौंका दिया है भखारा क्षेत्र के एक व्यक्ति ने 'मुफ्त कार' की चाहत में पिछले 36 महीनों (2022-2025) के दौरान करीब ₹1,00,00,000 (एक करोड़ रुपये) लुटा दिए। यह ठगी इतनी शातिर थी कि पीड़ित को तीन साल तक अहसास ही नहीं हुआ कि वह किसी गहरी साजिश का शिकार हो रहा है।
धमतरी साइबर ठगी का सबसे बड़ा मामला: कैसे बुना गया जाल?
ठगी की यह दास्तां साल 2022 में शुरू हुई। भिलाई में कार्यरत कमलेश ठाकुर को एक अनजान कॉल आया, जिसने उन्हें बताया कि उन्होंने लकी ड्रा में एक महंगी कार जीती है। यहीं से अपराधियों ने उनके मनोविज्ञान के साथ खेलना शुरू किया:
पहला जाल (भरोसा): कार की डिलीवरी के नाम पर डीजल खर्च और ड्राइवर फीस के तौर पर छोटी रकम मांगी गई।
दूसरा जाल (उम्मीद): एक बार पैसे देने के बाद ठगों ने टैक्स, आरटीओ क्लियरेंस और फाइल प्रोसेसिंग के नाम पर बार-बार पैसे मंगाए।
तीसरा जाल (डर): जब रकम लाखों में पहुँच गई, तो ठगों ने पीड़ित को डराना शुरू किया कि "यदि अगला टैक्स नहीं भरा, तो आपका पुराना पूरा पैसा और कार दोनों जब्त हो जाएंगे।"
इसी 'रिकवरी के डर' में पीड़ित लगातार किस्तों में पैसे ट्रांसफर करता रहा और देखते ही देखते आंकड़ा एक करोड़ के पार चला गया।
साइबर ठगों का 'साइकोलॉजिकल वारफेयर'
यह मामला केवल तकनीकी ठगी का नहीं है, बल्कि 'माइंड गेम' का है। पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, ठगों ने पीड़ित को इस कदर भरोसे में ले रखा था कि उन्होंने उसे किसी और से सलाह लेने का मौका ही नहीं दिया। फर्जी जीएसटी रसीदें और जाली सरकारी दस्तावेज व्हाट्सएप पर भेजकर यह यकीन दिलाया गया कि पूरी प्रक्रिया कानूनी है।
1,000 दिन और करोड़ों का सन्नाटा
हैरानी की बात यह है कि करीब 1,000 दिनों तक ठगों ने पीड़ित को अपने संपर्क में रखा। जब बैंक खाते पूरी तरह खाली हो गए और कार की जगह केवल 'अगली किस्त' की मांग जारी रही, तब जाकर पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ। तब तक अपराधी अपने डिजिटल निशान मिटाकर गायब हो चुके थे।
भखारा थाने में FIR दर्ज, साइबर सेल की बड़ी चुनौती
पीड़ित की शिकायत पर भखारा पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
जांच का केंद्र: पुलिस अब उन बैंक खातों की 'मनी ट्रेल' खंगाल रही है जिनमें पैसा भेजा गया।
टेक्निकल एक्सपर्ट्स की राय: विशेषज्ञों का कहना है कि 3 साल का लंबा समय बीत जाने के कारण ठगों ने रकम को कई अलग-अलग लेयर्स (Layers) में ठिकाने लगा दिया होगा, जिससे रिकवरी एक कठिन चुनौती है।
सावधान! इन 5 संकेतों को कभी न करें नजरअंदाज
साइबर सेल ने इस घटना के बाद आम नागरिकों के लिए 'रेड अलर्ट' जारी किया है:
मुफ्त का लालच: इनाम के नाम पर फीस = फ्रॉड
अनजान कॉल: बैंक डिटेल कभी शेयर न करें
दबाव बनाना: तुरंत भुगतान की धमकी = खतरा
फर्जी दस्तावेज: व्हाट्सएप पेपर पर भरोसा न करें
छुपाना: परिवार से बात न करना सबसे बड़ी गलती
👉 याद रखें: जितना बड़ा लालच, उतना बड़ा धोखा 🚨




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