Dhamtari Police vs Forest Department: खाकी सोती रही, फॉरेस्ट 'बाजीगर' निकला; डिक्की में गांजा भरकर पुलिस को ठेंगा दिखा रहे थे तस्कर!
- moolchand sinha

- Apr 21
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धमतरी (नगरी):
उड़ीसा की सरहद से छत्तीसगढ़ में गांजे की एंट्री कोई नई बात नहीं है, लेकिन सोमवार को सांकरा नाके पर जो हुआ, उसने पुलिसिया चौकसी की बखिया उधेड़ कर रख दी है। जिस रूट पर पुलिस की 'तीसरी आंख' और मुखबिरों का जाल होने का दावा किया जाता है, उसी रास्ते पर तस्कर किसी VIP की तरह गांजा लोड करके निकल रहे थे। पुलिस को भनक तक नहीं लगी, लेकिन किस्मत से टकरा गए वन विभाग के अमले से, जिसने खाकी के सूचना तंत्र की पोल खोलकर रख दी।
MH 10 DQ 4294 नंबर की एर्टिका और तस्करों का 'ओवर-कॉन्फिडेंस'

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात तस्करों का बेखौफ अंदाज रहा। तस्कर महाराष्ट्र पासिंग की मारुति सुजुकी एर्टिका कार (नंबर MH 10 DQ 4294) में सवार होकर बड़ी ही आसानी से गांजे की तस्करी कर रहे थे। कार में सवार दो युवक गांजे को डिक्की में भरकर किसी आम यात्री की तरह सफर कर रहे थे, जिन्हें पुलिस की चेकिंग का जरा भी डर नहीं था। Dhamtari Police vs Forest Department
तस्करों का यह अति-आत्मविश्वास बताता है कि उन्हें इस रास्ते पर किसी 'वर्दी' का खौफ नहीं था।
Dhamtari Police vs Forest Department: शिकारी खुद यहाँ शिकार हो गया!
Dhamtari Police vs Forest Department के इस फिल्मी घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि जहाँ एक ओर पुलिस का मुखबिर तंत्र गहरी नींद में सोया रह गया, वहीं वन विभाग के जांबाजों ने इसी MH 10 DQ 4294 नंबर की कार को रोककर पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। अब इलाके में चर्चा आम है— "क्या अब नशे के सौदागरों को पकड़ने के लिए भी वन विभाग के 'पेड़-पौधों' वाले अनुभव की जरूरत पड़ेगी?"
वनांचल में 'फेल' हुआ खाकी का सुरक्षा घेरा?
हैरानी इस बात पर है कि पूर्व में इसी रास्ते पर पुलिस कई क्विंटल गांजा पकड़ती थी, मगर अब अचानक पुलिस के हाथ क्यों खाली हैं? सांकरा नाके के पास हुई इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि तस्कर अब पुलिस के रडार से बाहर हो चुके हैं। भले ही पकड़े गए तस्कर और माल अब पुलिस के सुपुर्द हैं, लेकिन इस 'क्रेडिट वॉर' में वन विभाग ने पुलिस को 'क्लीन बोल्ड' कर दिया है।




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