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धमतरी के 3 शिक्षकों की मिसाल: दो राज्यपाल पुरस्कार के लिए चयनित, तीसरी का नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज

8 hours ago
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नवाचार, जनभागीदारी और समर्पण की मिसाल बने धमतरी के शिक्षक — कलेक्टर ने किया सम्मानित


कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने धमतरी में शिक्षकों को किया सम्मानित

धमतरी।

किसी स्कूल की सूरत बदलने के लिए मोटे बजट की दरकार नहीं होती — चाहिए होती है नीयत की साफगोई, सोच की ताज़गी और बच्चों के कल के प्रति एक जिद। धमतरी शिक्षक राज्यपाल पुरस्कार की यह कहानी बताती है कि धमतरी जिले के तीन शिक्षकों ने अपने रोज़मर्रा के काम से यही साबित कर दिखाया है कि एक अकेला शिक्षक भी पूरे शिक्षा तंत्र की दिशा मोड़ सकता है।

अपनी जेब से खर्च कर, अतिरिक्त वक्त निकालकर और पालकों-सहकर्मियों को साथ जोड़कर शासकीय प्राथमिक शाला धौराभाठा के शिक्षक श्री लीलाराम साहू, शासकीय माध्यमिक शाला लुगे की शिक्षिका श्रीमती रंजीता साहू और शासकीय प्राथमिक शाला कोलियारी की शिक्षिका श्रीमती प्रीति शांडिल्य ने ऐसा काम किया है जिसकी गूंज राज्य स्तर तक पहुंची है। नतीजा सिर्फ स्कूलों में बढ़ी दर्ज संख्या भर नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को मिले बेहतर मौके और आधुनिक शैक्षणिक संसाधन भी हैं।

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खेल-खेल में पढ़ाई से 23 बच्चे पहुंचे नवोदय और एकलव्य विद्यालय

धौराभाठा के शिक्षक श्री लीलाराम साहू ने पढ़ाई को खेल और गतिविधियों से जोड़कर बच्चों के लिए अधिक रोचक बनाया। खेल-आधारित शिक्षण और टीएलएम पद्धति ने बच्चों के मन में सीखने की भूख जगाई, जिससे स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।

इसी का नतीजा है कि उनके मार्गदर्शन में पढ़े 23 विद्यार्थियों का चयन जवाहर नवोदय विद्यालय और एकलव्य विद्यालय के लिए हुआ है। 'पढ़ई तुहर दुआर' अभियान और टीएलएम आधारित शिक्षण में उनके योगदान को राज्य स्तर पर पहचान मिली, और अब उनका चयन राज्यपाल पुरस्कार के लिए हुआ है।

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'मैं हूं गुल्लक' अभियान — छोटी पहल से 150 स्कूलों तक पहुंची डिजिटल शिक्षा

लुगे की शिक्षिका श्रीमती रंजीता साहू ने संसाधनों की कमी को बहाना नहीं, चुनौती माना। उन्होंने 'मैं हूं गुल्लक' अभियान शुरू किया और शिक्षकों-पालकों को जोड़कर जिले के 150 विद्यालयों तक स्मार्ट टीवी पहुंचाए।

इतना ही नहीं, करीब 300 स्कूलों में गणित वर्णमाला और लगभग 11 हजार बच्चों तक पेन, कॉपी-किताबें पहुंचाने में भी उनकी भूमिका अहम रही। तकनीक और जनभागीदारी के इस अनूठे मेल के लिए उनका चयन भी राज्यपाल पुरस्कार के लिए हुआ है।

दृष्टिबाधित बच्चों के लिए 11 हजार ऑडियो बुक्स, गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज

कोलियारी की शिक्षिका श्रीमती प्रीति शांडिल्य ने समावेशी शिक्षा की मिसाल कायम की। राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षिका श्रीमती के. शारदा के नेतृत्व में राज्य के 30 शिक्षकों की टीम के साथ उन्होंने दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए ब्रेल और ऑडियो आधारित सामग्री तैयार करने में योगदान दिया।

कक्षा 5वीं से 12वीं तक के दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए 11 हजार से ज़्यादा ऑडियो बुक्स तैयार हुईं, जो 400 से अधिक स्कूलों और 20 दृष्टिबाधित विशेष विद्यालयों तक पहुंचीं। इस टीम-प्रयास की सामग्री को लाखों बार सुना जा चुका है, और यह उपलब्धि 'गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' में दर्ज हो चुकी है।

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धमतरी शिक्षक राज्यपाल पुरस्कार — कलेक्टर ने शाल-श्रीफल भेंटकर किया सम्मान

इन शिक्षकों की उपलब्धियों को जिले का गौरव बताते हुए कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में श्री लीलाराम साहू और श्रीमती रंजीता साहू को शाल-श्रीफल व प्रशस्ति पत्र भेंटकर सम्मानित किया। इस मौके पर उन्होंने दोनों को राज्यपाल पुरस्कार के लिए चयनित होने पर बधाई दी। कार्यक्रम में मुख्य कार्यपालन अधिकारी (जिला पंचायत) श्री जयंत नाहटा सहित जिला अधिकारी मौजूद रहे।

कलेक्टर श्री मिश्रा ने कहा कि धमतरी के इन शिक्षकों ने साबित किया है कि शिक्षा में बदलाव संसाधनों से नहीं, दृष्टिकोण और समर्पण से आता है। उन्होंने सरकारी विद्यालयों को बच्चों-पालकों की पहली पसंद बनाने की दिशा में ऐसे प्रयासों को ज़रूरी बताया और तीनों शिक्षकों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

एक शिक्षक की पहल, अनेक बच्चों के सपनों की उड़ान

धमतरी के इन शिक्षकों की कहानी सिर्फ ट्रॉफी और सर्टिफिकेट तक सीमित नहीं। यह इस बात का सबूत है कि जब कोई शिक्षक अपनी नौकरी को मिशन में बदल लेता है, तो स्कूल की चारदीवारी से निकली रोशनी बच्चों के सपनों को नई उड़ान दे देती है — चाहे वे” नवोदय-एकलव्य पहुंचते बच्चे हों, डिजिटल क्लासरूम से जुड़ते विद्यार्थी हों, या दृष्टिबाधित बच्चों तक पहुंचती ऑडियो किताबें।

क्या धमतरी के इन शिक्षकों का मॉडल हर सरकारी स्कूल में अपनाया जाना चाहिए? आपकी राय क्या है?

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