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रसोइया के बेटे ने NEET क्रैक किया: सेनानी ग्राम खिसोरा में जश्न



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कुरूद।

जिस माँ के हाथ के बने भोजन से पूरे स्कूल के बच्चे अपनी भूख मिटाते हैं, उसी रसोइया माँ के बेटे ने ऐसी सफलता की थाली परोसी कि पूरा सेनानी ग्राम खिसोरा देखता रह गया। जी हां, रसोइया के बेटे ने NEET क्रैक किया है। ग्राम खिसोरा के होनहार छात्र हरिश्चंद्र पटेल ने तीसरे प्रयास में 508 अंक और छत्तीसगढ़ में 720वीं रैंक हासिल कर जशपुर के शासकीय मेडिकल कॉलेज में MBBS के लिए चयनित होकर माता-पिता को गौरवान्वित किया है।


रसोइया के बेटे ने NEET क्रैक किया - तीसरे प्रयास में कैसे रचा इतिहास?


कहते हैं कि प्रतिभाएं गरीबी और अभावों में पलती और विकसित होती हैं, यह बात खिसोरा निवासी छात्र हरिश्चंद्र पटेल के लिए सही साबित होती है। ग्राम खिसोरा के होनहार छात्र हरिश्चंद्र पटेल ने तीसरे अटेम्प्ट में MBBS तक ले जाने वाली कठिन परीक्षा NEET को क्रैक कर इतिहास रच दिया है। NEET जैसी कठिन परीक्षा में 508 अंक एवं छत्तीसगढ़ में 720वीं रैंक हासिल कर सामान्य वर्ग से चयनित हुए हैं हरिश्चंद्र, जो उनकी अद्वितीय प्रतिभा का परिचायक है। जशपुर के शासकीय मेडिकल कॉलेज में अपने सपनों को आकार देगा यह गुदड़ी का लाल।


सेनानी ग्राम खिसोरा के रसोइया के बेटे की सफलता क्यों है खास?


ग्राम खिसोरा को सेनानी ग्राम इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के गांव के रूप में जाना जाता है। बुजुर्गों के अनुसार स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस गांव के लोगों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया था, इसी कारण इसे सेनानी ग्राम खिसोरा कहा जाता है। इसी गौरवशाली परंपरा वाले गांव के एक साधारण परिवार के बेटे ने शिक्षा के क्षेत्र में नया इतिहास लिखा है।


किसान पिता और रसोइया माता के बेटे ने NEET क्रैक किया


आपको बता दें कि छात्र हरिश्चंद्र पटेल निम्न मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं। उनके पिता कोमल पटेल किसान हैं एवं अपने पारंपरिक व्यवसाय के रूप में बाड़ी में सब्जी-भाजी उगाकर एवं उनको बेचकर अपना जीवनयापन करते हैं। माता राजकुमारी पटेल गांव के ही शासकीय नवीन प्राथमिक शाला स्कूल में रसोइया का काम करती हैं। इसी सीमित आय में परिवार का भरण-पोषण होता है।


सरकारी स्कूल से पढ़कर रसोइया के बेटे ने NEET क्रैक किया


शुरू से ही प्रतिभाशील रहे हरिश्चंद्र ने अपनी पूरी पढ़ाई सरकारी स्कूल से ही पास की है। प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल से पूरी की एवं 9 से 12वीं तक की शिक्षा के लिए वे प्रयास आवासीय विद्यालय दुर्ग चले गए। प्रयास विद्यालय छत्तीसगढ़ शासन द्वारा गरीब प्रतिभावान बच्चों के लिए संचालित आवासीय विद्यालय है।


घर में रहकर की तैयारी, जब रसोइया के बेटे ने NEET क्रैक किया तो गांव में जश्न


12वीं उत्तीर्ण होने के बाद लगातार तीन वर्षों तक घर में रहकर उन्होंने कड़ी मेहनत की। इस रास्ते में उन्हें बार-बार असफलता मिली फिर भी वे हारे नहीं, और आखिरकार असफलताओं और चुनौतियों को सीढ़ी बनाकर अपनी मंजिल तक पहुंचने में कामयाब हुए हरिश्चंद्र। उनकी इस उपलब्धि पर उनके परिवार सहित, आस-पड़ोस एवं समस्त ग्रामवासियों ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।


छात्रों के लिए हरिश्चंद्र का संदेश है कि - "अपने लक्ष्य के लिए डटे रहें एवं कैसी भी परिस्थिति क्यों ना आए कभी हार नहीं मानें।"

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