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डॉ. तीजन बाई का निधन: पंडवानी की अमर आवाज़ हुई खामोश, PM मोदी और CM विष्णुदेव साय ने दी श्रद्धांजलि

पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई पंडवानी का मंचीय प्रदर्शन करती हुईं।

रायपुर।

छत्तीसगढ़ की माटी की वह बुलंद आवाज़, जिसने तंबूरे की अनुगूंज पर महाभारत को विश्व के रंगमंच पर सजीव कर दिया, अब हमेशा के लिए मौन हो गई। डॉ. तीजन बाई का निधन रविवार तड़के रायपुर AIIMS में लंबी बीमारी के बाद हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित देशभर से श्रद्धांजलियों का तांता लग गया।


पंडवानी को गांव की चौपाल से उठाकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने वाली लोककला की महान विभूति डॉ. तीजन बाई का निधन रविवार तड़के रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में हुआ। वे लंबे समय से अस्वस्थ थीं और उपचाराधीन थीं। निधन की खबर फैलते ही छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के कला, साहित्य, संगीत और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

डॉ. तीजन बाई का निधन कब और कैसे हुआ?

रायपुर एम्स में लंबे इलाज के बाद रविवार तड़के करीब 3:15 बजे उनकी सांसें थम गईं। परिवार और अस्पताल प्रशासन ने निधन की पुष्टि की।

38 दिनों से चल रहा था इलाज

तीजन बाई लंबे समय से गंभीर रूप से अस्वस्थ थीं और रायपुर एम्स के आईसीयू में विगत 38 दिनों से उपचाराधीन थीं। चिकित्सकों के अथक प्रयासों के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हो सका।

डॉ. तीजन बाई का जीवन परिचय — साधारण गांव से विश्व मंच तक

दुर्ग जिले के पाटन क्षेत्र के ग्राम गनियारी में जन्मी डॉ. तीजन बाई ने विपरीत परिस्थितियों के बीच अपनी प्रतिभा और अदम्य साधना के बल पर पंडवानी को वैश्विक पहचान दिलाई। बचपन में अपने नाना से महाभारत की कथाएं सुनते-सुनते यह महाकाव्य उनके जीवन का हिस्सा बन गया।

जब एक महिला ने बदल दी पंडवानी की परंपरा

कम उम्र में ही मंच पर कदम रखने वाली तीजन बाई ने उस दौर की सामाजिक परंपराओं को चुनौती दी। जहां महिलाओं की प्रस्तुति सीमित मानी जाती थी, वहीं उन्होंने अभिनयप्रधान कापालिक शैली अपनाकर पंडवानी को नई ऊंचाई दी।

तंबूरे से महाभारत तक — तीजन बाई की अनूठी कला

मंच पर उनकी प्रस्तुति के दौरान उनका तंबूरा कभी भीम की गदा बनता, कभी अर्जुन का रथ, कभी दुःशासन की भुजा, तो कभी द्रौपदी के केशों का प्रतीक बन जाता। उनकी ओजस्वी वाणी और भावपूर्ण अभिनय ने पंडवानी को जीवंत रंगमंच का स्वरूप दिया।

हबीब तनवीर से मिली पहचान, इंदिरा गांधी से लेकर विश्व नेताओं तक पहुंची कला

प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उनकी असाधारण प्रतिभा को पहचानकर उन्हें बड़े मंच तक पहुंचाया। इसके बाद तीजन बाई ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी सहित देश और दुनिया के कई राष्ट्राध्यक्षों के समक्ष अपनी यादगार प्रस्तुतियां दीं।

17 से अधिक देशों में लहराया छत्तीसगढ़ का परचम

उन्होंने अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान, रूस, ऑस्ट्रेलिया, तुर्की, मॉरीशस समेत 17 से अधिक देशों में पंडवानी का मंचन कर छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का परचम लहराया। उनकी कला को देश-विदेश में व्यापक सराहना मिली।

डॉ. तीजन बाई को मिले सम्मान और पुरस्कार

तीजन बाई पद्म विभूषण सम्मान समारोह

लोककला के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1988 में पद्मश्री, 1995 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2003 में पद्मभूषण तथा 2019 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

डॉ. तीजन बाई के निधन पर PM मोदी और CM साय ने जताया शोक

डॉ. तीजन बाई के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे "कला और संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति" बताया। उन्होंने कहा कि पंडवानी को वैश्विक पहचान दिलाने में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी अपने आधिकारिक X हैंडल पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा कि "छत्तीसगढ़ ने अपना एक अनमोल रत्न खो दिया है।" उन्होंने कहा कि डॉ. तीजन बाई का लोककला और संस्कृति के क्षेत्र में योगदान सदैव अमर रहेगा।

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